Budget 2026: अभी तक आयकर अधिनियम की धारा 93 के तहत निवेशकों को यह छूट मिलती थी कि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से हुई आय का अधिकतम 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च टैक्स से घटा सकते थे।
Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में निवेशकों के लिए एक अहम बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो कर्ज लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। अब तक ऐसे निवेशकों को राहत मिलती थी क्योंकि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर लिए गए कर्ज के ब्याज का कुछ हिस्सा टैक्स से घटा सकते थे। लेकिन बजट 2026 के प्रस्ताव के बाद यह सुविधा खत्म होने जा रही है। यानी अब डिविडेंड कमाने के लिए लिया गया लोन टैक्स बचाने में मदद नहीं करेगा।
क्या है डिटेल
अभी तक आयकर अधिनियम की धारा 93 के तहत निवेशकों को यह छूट मिलती थी कि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से हुई आय का अधिकतम 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च टैक्स से घटा सकते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक को ₹1 लाख का डिविडेंड मिला और उसने ₹25 हजार ब्याज चुकाया, तो वह ₹20 हजार तक की कटौती ले सकता था। यह नियम खास तौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद था जो लोन लेकर लॉन्ग टर्म इनकम बनाने की रणनीति अपनाते थे।
बजट में रखा गया प्रस्ताव
लेकिन बजट 2026 में सरकार ने इस नियम को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव रखा है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक, अब डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आय पर किसी भी तरह का ब्याज खर्च टैक्स में नहीं घटेगा। आयकर विभाग ने साफ किया है कि चाहे लोन सीधे निवेश के लिए ही क्यों न लिया गया हो, उस पर दिया गया ब्याज अब टैक्स छूट के दायरे में नहीं आएगा। यह नियम सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगा, चाहे वे व्यक्तिगत निवेशक हों या कोई और श्रेणी।
इस बदलाव का मतलब साफ है कि अब कर्ज लेकर निवेश करने की टैक्स एफिशिएंसी कम हो जाएगी। ऐसे निवेशक जो डिविडेंड इनकम को ध्यान में रखकर लोन लेते थे, उन्हें अब अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से हाई-लेवरेज निवेश पर ब्रेक लगेगा और निवेशक ज्यादा सतर्क होकर फैसले लेंगे। आने वाले समय में डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई करने वालों के लिए टैक्स प्लानिंग पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।







