पुलिस की ओर से पकड़ा गया आरोपी हन्नी।
झज्जर जिले की थाना साइबर क्राइम टीम ने अमेरिकी नागरिकों को ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पिछले दिनों 18 आरोपियों के कॉल सेंटर पर पर्दाफाश के बाद हुई कार्रवाई का हिस्सा है।
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थाना प्रभारी साइबर क्राइम के निरीक्षक सोमबीर ने बताया कि आरोपी हन्नी सेक्टर 6 बहादुरगढ़ का निवासी है और दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर का काम करता है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि हन्नी ने पहले पकड़े गए आरोपी मयंक और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर अवैध कॉल सेंटर का संचालन किया।
हन्नी ने कॉल सेंटर के लिए जगह, इंटरनेट कनेक्शन, वाई-फाई राउटर और अन्य सभी आवश्यक उपकरण मुहैया कराए।

पुलिस की ओर से पकड़े गए आरोपी।
कॉल सेंटर के लिए 20 लोगों की जरूरत बताई गई हन्नी ने बताया कि पकड़े गए आरोपी दिल्ली निवासी मयंक के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग के काम के दौरान मुलाकात हुई। मयंक ने उसे ऑफर दिया कि वे दोनों अवैध रूप से कॉल सेंटर चलाते हैंं। जिस लालच में आकर आरोपी हन्नी ने उनके साथ काम करने की बात रखी। इसके बाद आरोपी मयंक ने इसे दिल्ली निवासी एक व्यक्ति से मिलाया, जिसने बताया कि वह और मयंक मिलकर पहले भी गुरुग्राम व दिल्ली में अलग-अलग जगह पर अवैध कॉल सेंटरों पर काम कर चुके हैं।
हमें इसका काफी अनुभव है। इसके बाद उन्होंने हन्नी को इस बारे में पूरी जानकारी दी, और कहा कि इसके लिए हमें अंग्रेजी बोलने वाले 20 व्यक्तियों की आवश्यकता होगी।
इंटरव्यू के बाद ही कॉल सेंटर के लिए होता था चयन जांच में पता चला कि कॉल सेंटर में काम करने वाले एजेंटों का इंटरव्यू मयंक द्वारा लिया जाता और केवल चुने हुए लोगों को ही काम पर रखा जाता था। अमेरिकी ग्राहकों से तकनीकी सहायता के नाम पर कॉल करके उनसे सर्विस चार्ज, गिफ्ट कार्ड और ऑनलाइन पेमेंट के रूप में डॉलर में ठगी की जाती थी। इसके बाद ठगी की राशि रुपए में बदलकर एजेंटों में वितरित की जाती थी।

साइबर पुलिस की ओर से पकड़े गए आरोपी।
दो तीन महीने से ओमेक्स में चल रहा था काम हन्नी ने बहादुरगढ़ स्थित ओमेक्स के पीछे रूहिल फ्लैट में शुरुआत की। दो-तीन महीने बाद उन्होंने अपना ठिकाना बदलकर ओमेक्स सिटी शुभांगन टावर नंबर 17 के सातवीं और आठवीं मंजिल पर फ्लैट किराए पर लेकर वहीं संचालन शुरू किया। उनकी अनुपस्थिति में नैफी अरसलान, दिल्ली निवासी, कॉल सेंटर का संचालन संभालता था।
नहर में फेंक दिए थे फोन और सिम पुलिस ने बताया कि हन्नी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना फोन और सिम नहर में फेंक दिए थे। आरोपी को बहादुरगढ़ की अदालत में पेश किया गया, जहां उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया।
यह मामला पिछले महीने उजागर हुए बड़े साइबर फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका के नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के लिए तकनीकी सहायता देने का झांसा दिया गया था। उस कार्रवाई में कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से पांच को पुलिस रिमांड पर लिया गया था।
मामले से जुड़े अन्य आरोपी भी शीघ्र होंगे गिरफ्तार निरीक्षक सोमबीर ने बताया कि इस मामले से जुड़े अन्य आरोपी भी जल्द ही गिरफ्तार किए जाएंगे। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन कॉल या ट्रांजैक्शन की सूचना तुरंत साइबर क्राइम थाना को दें ताकि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय ठगी के मामलों को समय रहते रोका जा सके।

पुलिस की ओर से पकड़े गए 18 आरोपी।
साइबर ठगी के तरीके:
- कॉल सेंटर एजेंट अमेरिकी ग्राहकों से अंग्रेजी में बातचीत करते और उन्हें तकनीकी समस्या का झांसा देकर विश्वास में लेते।
- इसके बाद उनसे सर्विस चार्ज, गिफ्ट कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट में डॉलर में राशि ले ली जाती थी।
- ठगी की राशि बाद में रुपए में बदलकर आरोपी अपने नेटवर्क में वितरित करते।
- कॉल वैंडर और फर्जी टोल-फ्री नंबर का इस्तेमाल करके कॉल को shark pbx डायलर व myvoip system डायलर के इंटरफेस पर भेज देते थे।
- नए कर्मचारियों का इंटरव्यू मयंक द्वारा लिया जाता था और केवल चुने हुए लोगों को काम पर रखा जाता था।








