द न्यूयॉर्क टाइम्स. न्यूयॉर्क2 घंटे पहले
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दीवारों पर अपनों के बजाय डॉग-कैट के पोर्ट्रेट लगवा रहे लोग।
अमेरिका के वाल्डोस्टा में रहने वाले स्मिथ दंपती के छह पोते-पोतियां हैं, जिनकी तस्वीरें अलमारी में सहेजी गई हैं, पर लिविंग रूम की मुख्य दीवार पर अनूठा पोर्टेट लटका है। चौंकिए नहीं, यह तस्वीर उनके प्यारे ‘किंग चार्ल्स स्पैनियल’ कुत्ते रस्टी की है।
69 साल की तान्या कहती हैं, ‘यह अजीब लग सकता है, क्योंकि पहले मैंने ऐसा कभी नहीं किया होता। पता नहीं क्या सोचकर हमने रस्टी की पेंटिंग बनवाई, लेकिन आज वही हमारी सबसे कीमती याद है।’ रस्टी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी पेंटिंग स्मिथ परिवार के लिए सदस्य से कम नहीं है।
किसी जमाने में घरों की मुख्य दीवारों पर परिवार के बुजुर्गों या हंसते-खेलते बच्चों की ऑयल पेंटिंग शान बढ़ाती थी। अब ड्राइंग रूम में इन पालतुओं का राज है। इंसानों व जानवरों का कलात्मक रिश्ता सदियों पुराना है, लेकिन ‘जानवर’ से ‘पालतू’ बनने का सफर हालिया है।
गूगल ट्रेंड्स के बीते 10 साल का डेटा देखें तो ‘कस्टम पेट्स पोर्ट्रेट’ की सर्च 90% बढ़ी है। लोग सिर्फ कुत्तों-बिल्लियों की फोटो नहीं खींच रहे, बल्कि उन्हें आर्ट गैलरी का हिस्सा बना रहे हैं। पोर्टलैंड की मैत्री मोदी ने अपने 13 साल के पग ‘अरि’ का कैंसर का इलाज करवाया, उसकी कई पेंटिंग्स बनवाईं। मैत्री कहती हैं,‘मेरे पास रिश्तेदारों के पोर्ट्रेट नहीं हैं, क्योंकि अरि ही मेरा परिवार है। तलाक व कॅरियर के उतार-चढ़ाव में वही मेरा सहारा था। ‘अरि’ की पेंटिंग जीवन की सबसे खूबसूरत याद है। वे कहती हैं,‘जब भी इसे देखती हूं, वो दिन याद आ जाते हैं।’
कलाकार बेन लेनोविट्ज कहते हैं,‘पेट्स पोर्ट्रेट’ हम कलाकारों के लिए फायदेमंद करियर बन चुका है। चूंकि पेट्स की उम्र कम होती है, इसलिए ग्राहक बार-बार नई यादें सहेजने के लिए कलाकारों के पास लौटते हैं। कला बाजार में इंसान की पुरानी तस्वीर की तुलना में पेट्स की कलाकृतियों की ‘रीसेल वैल्यू’ कहीं ज्यादा होती है, जो इस क्षेत्र को और भी आकर्षक बनाती है। बजट कम होने पर लोग ‘मोड पॉज’ जैसी वेबसाइट्स इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दो हजार से 10 हजार रुपए तक में डिजिटल पेंटिंग और टी-शर्ट प्रिंटिंग की सुविधा देती हैं।
हर मुश्किल में साथ देने वालों को प्रति सम्मान जताने का तरीका
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया अपने कुत्तों की सैकड़ों पेंटिंग्स बनवाती थीं। तब यह रईसों का शौक था, पर आज यह आम आदमी के जज्बात से जुड़ गया है। हालांकि, कुछ पारंपरिक आर्ट सोसायटीज में जानवरों की पेंटिंग बनाने को कमतर माना जाता है। पर बाजार की हकीकत अलग है। जेनिफर जेनारी पेट पोर्ट्रेट के लिए 16 लाख रु. तक लेती हैं। उनके पास हस्तियों की लंबी कतार है। यह सिर्फ दीवार सजाना नहीं, बल्कि मुश्किल में साथ देने वालों के प्रति सम्मान जताना भी है।









