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- Brahma Chellaney’s Column War Has Inspired Iran To Make Atom Bombs Instead
6 घंटे पहले
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ब्रह्मा चेलानी पॉलिसी फॉर सेंटर रिसर्च के प्रोफेसर एमेरिटस
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर यह प्रचारित किया गया था कि यह उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए थे। जबकि परिणाम इससे उलट भी हो सकता है। क्योंकि अब ईरान को पक्का भरोसा हो गया है कि भविष्य के हमलों से बचने और अपनी हुकूमत को कायम रखने के लिए परमाणु हथियार हासिल करना ही इकलौता विकल्प रह गया है।
एक समय था, जब दवाब और प्रोत्साहन की मिली-जुली रणनीति के जरिए ईरान को इस विषय पर बातचीत के लिए तैयार कर लिया गया था। 2015 में जॉइंट कॉम्प्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) के जरिए ईरान उस पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत और अन्य रियायतों के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए राजी भी हो गया था। लेकिन इसके बावजूद इजराइल की मांग पर डॉनल्ड ट्रम्प अपने पहले कार्यकाल में जेसीपीओए से हट गए। इससे 20 माह की अथक कूटनीति से बना आपसी भरोसा टूट गया।
कुछ लोग तर्क देते हैं कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखे में रखकर आवश्यकता से अधिक यूरेनियम परिष्कृत कर रहा था। ऐसे में उसने खुद ही इन हमलों को न्योता दिया। ये शिकायतें भी जायज हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इजराइल के हमलों से पहले ही अपनी रिपोर्ट में ईरान के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के उल्लंघन को लेकर चिंता जाहिर कर दी थी।
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी की ओर से इस रिपोर्ट के विश्लेषण में तो यह भी कहा गया कि ‘ईरान फोर्दो प्लांट में अपने 60% तक परिष्कृत यूरेनियम को महज तीन हफ्तों में 233 किलोग्राम वेपन-ग्रेड यूरेनियम में बदल सकता है, जिससे 9 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।’ लेकिन साथ ही आईएईए ने त्वरित परमाणु संधि की आवश्यकता जताते हुए यह भी कहा था कि उसके पास ऐसे कोई पुख्ता संकेत नहीं हैं कि ईरान में अघोषित परमाणु कार्यक्रम चल रहा है।
इसके बावजूद अमेरिकी और इजराइली नेताओं ने ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान जैसे परमाणु ठिकानों पर हमलों को हरी झंडी दे दी, जो आईएईए के सुरक्षा मापदंडों के तहत आते हैं और अप्रसार संधि की ईरानी प्रतिबद्धताओं के तहत इनकी निगरानी की जाती है।
ऐसा करके उन्होंने परमाणु हथियारों पर अंकुश लगाने वाले कानूनी और सत्यापन-संबंधी फ्रैमवर्कों की ही कलई खोल दी। इन हमलों ने आईएईए की ताकत को कम किया है। अप्रसार संधि के परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन किया है।
सत्ता-परिवर्तन के लिए युद्धों का रिकॉर्ड रखने वाले अमेरिका और अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर से इनकार करने वाले इजराइल ने इससे दुनिया को यह भी गलत संदेश दे दिया कि सिर्फ कमजोरों से ही नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है। वस्तुत:, आपके पास यदि परमाणु हथियार हैं तो आप अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना कर सकते हैं।
पाकिस्तान आतंकवाद को पोषित करता है, छद्म युद्ध करता है और परमाणु हमलों की धमकियां देता फिरता है। ईरान के काल्पनिक बम की तुलना में पाकिस्तान भले ही क्षेत्रीय शांति के लिए अधिक बड़ा खतरा हो, लेकिन उस पर अमेरिका चुप्पी साधे हुए है।
80 और 90 के दशकों में अमेरिकी सरकारों ने पाकिस्तान द्वारा खुफिया तरीके से यूरेनियम संवर्धन और परमाणु बम बनाने के सबूतों को अनदेखा किया। पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता भी जारी रखी। इसका परिणाम एक खंडित राष्ट्र के रूप में सभी के सामने है।
अब जबकि कूटनीति पटरी से उतर चुकी है, निरीक्षणों की अवहेलना हो रही है और दोहरे मानदंड प्रभावी हैं तो ईरान को इस बात के लिए कैसे राजी किया जा सकता है कि वह परमाणु हथियार न बनाए? यह उसके लिए रणनीतिक तौर पर व्यावहारिक भी है।
अतीत में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा परमाणु हथियारों के खिलाफ फतवा जारी करने और इस मुद्दे पर वर्षों की बहस के बावजूद ईरानी निर्णयकर्ता अब मान चुके हैं कि उनके मुल्क को हमलों से सुरक्षित रखने के लिए अब कोई और रास्ता नहीं रह गया है।
ईरान के पास आज हर वो तर्क है, जिसकी मदद से वह आईएईए के दायरे से बाहर हो सकता है या उसे सीमित कर परमाणु शक्ति बनने की दौड़ में शामिल हो सकता है। जैसे 1981 में आईएईए की निगरानी वाले ओसिराक रिएक्टर पर इजराइली हमले के बाद सद्दाम हुसैन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को भूमिगत कर दिया था, उसी तरह से ईरान भी खुफिया तरीके से अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रख सकता है। ऐसे में यह उसका अपने अस्तित्व पर खतरे को देखते हुए उठाया गया कदम होगा।
अगर सुरक्षा मानकों के अनुरूप चलने वाले परमाणु ठिकानों पर भी हमला किया जा सकता है तो क्यों कोई अप्रसार में भरोसा करेगा? यदि किसी देश को इराक, लीबिया, यूक्रेन जैसे हश्र से बचना है तो वह एटम बम बनाना ही चाहेगा। (© प्रोजेक्ट सिंडिकेट)








