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3 मिनट पहले
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इतिहासकार सुमित सरकार का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 87 साल के थे। इतिहासकार और परिवार की करीबी मित्र अरुणिमा ने यह जानकारी दी। अरुणिमा ने बताया कि प्रोफेसर सरकार लंबे समय से बीमार थे। कुछ समय से उम्र संबंधी परेशानियों के कारण उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी।
सुमित सरकार का जन्म 1939 में इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की थी।
उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में लेक्चरर और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान में रीडर के तौर पर पढ़ाया। इतिहास के प्रोफेसर के रूप में उनका सबसे लंबा कार्यकाल दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहा।
उनकी प्रमुख किताबों में द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल, मॉडर्न इंडिया 1885-1947 और राइटिंग सोशल हिस्ट्री शामिल हैं। इन किताबों ने उन्हें औपनिवेशिक शासन, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन को अलग-अलग सामाजिक समूहों, वर्गों और जन आंदोलनों के नजरिए से समझने वाले प्रमुख इतिहासकार के रूप में स्थापित किया।
सुमित सरकार मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन पर महत्वपूर्ण अध्ययन किया और भारतीय राष्ट्रवाद के केवल बड़े नेताओं पर केंद्रित पारंपरिक इतिहास को चुनौती दी।
वह सबाल्टर्न स्टडीज कलेक्टिव के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे, हालांकि बाद में उन्होंने इस विचारधारा की आलोचना भी की।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर अपने काम के लिए सुमित सरकार को 2003 में इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी का सरित चटर्जी मेमोरियल अवॉर्ड मिला था।
2004 में उनकी किताब राइटिंग सोशल हिस्ट्री के लिए उन्हें रवींद्र पुरस्कार दिया गया। हालांकि, 2007 में उन्होंने पश्चिम बंगाल की CPI(M) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के किसानों के साथ व्यवहार के विरोध में यह पुरस्कार लौटा दिया था।








