मंडे फोटो स्टोरी:  जापान में महामारियों से रक्षा के लिए उतरे देवताओं के रथ; 300 साल पुरानी परंपरा
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मंडे फोटो स्टोरी: जापान में महामारियों से रक्षा के लिए उतरे देवताओं के रथ; 300 साल पुरानी परंपरा

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जापान के फुकुओका प्रांत में करीब 300 साल पुराना ऐतिहासिक ‘इटोडा गियॉन यामाकासा’ उत्सव शुरू हो गया है। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य वायरस और घातक महामारियों से समुदाय की रक्षा करना है। मान्यता है कि इस आयोजन से इलाके की बीमारियां, खतरनाक वायरस और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण ‘ओयामा’ कहे जाने वाले विशालकाय पहियेदार रथ (फ्लोट्स) हैं। रोशनी से सजे इन 9 भव्य रथों को चलाने के लिए करीब 500 से अधिक स्थानीय युवा अपना दमखम दिखाते हैं। प्रत्येक रथ को 50 से 100 युवाओं की टोली खींचती है। करीब 10 मीटर ऊंचे इन रथों के रखरखाव और आयोजन पर स्थानीय समुदाय लाखों रुपए खर्च करता है। रात के समय सैकड़ों लालटेनों से जगमगाते ये रथ आस्था के साथ-साथ जापानी इंजीनियरिंग और एकता का अद्भुत उदाहरण पेश करते हैं। उत्सव की प्रमुख बातें उद्देश्य – यह परंपरा 18वीं शताब्दी की शुरुआत से चली आ रही है, जिसका उद्देश्य महामारियों, बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों से समुदाय की रक्षा करना है। ओयामा (यामाकासा) रथ – इस उत्सव का मुख्य आकर्षण ऊंचे और वजनी विशालकाय रंगीन रथ हैं। युवाओं का उत्साह – स्थानीय युवाओं की टोलियां इन रथों को अपने कंधों पर उठाकर शहर में घुमाती हैं। विशेष आकर्षण – रात के समय जब ये रथ जगमगाती रोशनी में ‘फेस्टिवल पार्क इटोडा’ में इकट्ठे होते हैं, तो वह दृश्य देखते ही बनता है।



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