![]()
बढ़ती उम्र के साथ शरीर में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन कई बार हम यह भूल जाते हैं कि हमारा मन भी उम्र के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया से गुजरता है। अगर इसे सही दिशा मिल जाए, तो 60 वर्ष के बाद का जीवन चिंता से मुक्त और संतोष भरा हो सकता है। प्रसिद्ध लेखक डेल कार्नेगी ने अपनी पुस्तक ‘हाउ टू स्टॉप वरीइंग एंड स्टार्ट लिविंग’ में इसी के लिए एक व्यावहारिक सूत्र- ‘डे-टाइट कम्पार्टमेंट्स’ दिया है। डे-टाइट कम्पार्टमेंट्स यानी आज के 24 घंटों में जिएं, बीते व आने वाले कल की चिंता छोड़ दें। तेजी से बदलते दौर में यह सूत्र बुजुर्गों के लिए खासतौर पर उपयोगी है। तनाव घटेगा चिंता का सबसे बड़ा कारण अतीत का पछतावा या भविष्य का भय होता है। जब आज में जीते हैं तो तनाव हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ कम होता है। क्या करें सुबह उठकर खुद से पूछें- आज मैं कौन सी खुशियां जुटा सकता हूं? सुबह की सैर, चाय के साथ अखबार पढ़ना, पोते से बात करना आदि।
Source link








