इंस्पायरिंग:  असली बहादुरी डर के न होने में नहीं है, डर के बावजूद आगे बढ़ते रहने में है – रितिक रोशन
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इंस्पायरिंग: असली बहादुरी डर के न होने में नहीं है, डर के बावजूद आगे बढ़ते रहने में है – रितिक रोशन

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13 घंटे पहले

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रितिक रोशन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहली बार बतौर प्रोड्यूसर कदम रख रहे हैं। सेट पर छोटे-छोटे काम करने से लेकर निर्माता बनने तक के सफर का हासिल, उन्हीं की जुबानी… मुझे हमेशा ऐसे किरदार बहुत आकर्षित करते हैं, जिनमें सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि कोई न कोई मानवीय कमजोरी भी हो। मुझे लगता है, असली ताकत वही होती है जिसमें कमजोरी की झलक हो, जो अपूर्ण होकर भी पूर्ण लगे। ये बात मैंने जिंदगी से सीखी है और शायद इसीलिए मुझे ऐसे किरदार निभाना पसंद है, जो मजबूत होते हैं, लेकिन साथ ही टूटे और जूझते हुए भी होते हैं… जैसा कि वाकई एक इंसान होता है। किसी किरदार में असफलता है, किसी में डर… पर यही सब उन्हें इंसान बनाता है। मैंने अपने पूरे करियर में अब तक गिनी-चुनी फिल्में की हैं। अगर तुलना करूं अपने साथियों से तो ये संख्या बहुत कम है, पर मैंने कभी गिनती नहीं देखी, क्वालिटी देखी। मेरे लिए एक सच्ची कहानी, एक सच्चा किरदार सौ फिल्मों से अधिक मायने रखता है। लोग अक्सर कहते हैं, तुम स्टार हो…पर सच्चाई ये है कि मैं खुद को कभी ‘स्टार’ नहीं मानता। मैं महज एक मेहनतकश इंसान हूं। पूरे साल में ऐसे मुश्किल से कुछ ही दिन होते होंगे, जब मैं मंच पर खड़ा होकर स्टार जैसा महसूस करता हूं। बाकी दिनों में मैं सुबह 6:30 बजे उठता हूं, दो घंटे सफर करता हूं, धूप में शूट करता हूं, गिरता हूं, चोट खाता हूं और फिर भी वर्कआउट करता हूं। सच कहूं तो मैं 360 दिन एक मजदूर की तरह काम करता हूं और 5-6 दिन स्टार बनता हूं। यही मेरा सच है। मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा मेरे बच्चे हैं। एक वजह वो भी हैं, जिसकी बदौलत मैं हर बार गिरकर उठ खड़ा होता हूं। मेरे लिए उनके साथ बिताया वक्त सबसे अच्छा है। अगर मेरी कोई मीटिंग है और उसी वक्त मेरे बच्चों से मिलने का वक्त तय है… तो मीटिंग इंतजार करती है, बच्चे नहीं। हम अकसर कुछ भी क्रेजी करते हैं, कभी अचानक सफर पर निकल पड़ते हैं, कभी रेगिस्तान में बिना टेंट के रात बिताते हैं, कभी बर्फीले पहाड़ों पर स्कीइंग करना सीखते हैं। मेरे बच्चे मुझे याद दिलाते हैं कि जिंदगी में खुशी बनाना कितना आसान है, बस इरादा होना चाहिए। वो मुझे सिखाते हैं कि मजा किसी चीज में नहीं, नजरिया बदलने में है। मैं उन्हें सिखाने की कोशिश करता हूं कि डर से भागो नहीं, डर को गले लगाओ। अगर मैं किसी चीज से डरता हूं, तो मैं वही करता हूं। ताकि वो देखें… उनके पिता भी डरते हैं, पर रुकते नहीं। मैं चाहता हूं वो सीखें कि असली बहादुरी डर की गैरमौजूदगी नहीं, डर के बावजूद आगे बढ़ने में है। मैं परफेक्ट नहीं हूं। मैं सीखता हूं, गिरता हूं, उठता हूं… और आगे बढ़ता हूं। यही मेरी ताकत है। जिस चीज को तलाश न पाएं, उसे क्रिएट कर लें जिंदगी में जब भी कोई दुविधा आती है, जब कुछ समझ में नहीं आता… तो यही वक्त आपको अपने भीतर झांकना सिखाता है। मैं जन्म से ही एक खोजी इंसान रहा हूं। मुझे कुछ चाहिए होता है, तो मैं उसे ढूंढ ही लेता हूं। अगर वो चीज कहीं नहीं भी होती है, तो मैं उसे बना लेता हूं। यही मेरा स्वभाव है। यही मुझे जिंदा रखता है। (तमाम इंटरव्यू में…)



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