6 घंटे पहले
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आज (27 मई) ज्येष्ठ अधिक मास यानी मलमास का पहला एकादशी व्रत है। इसे पद्मिनी, कमला और पुरुषोत्तमी एकादशी कहते हैं। इस बार तिथियों की घट-बढ़ की वजह से 26 और 27 मई, दो दिन ये तिथि है। बीते कल यानी 26 तारीख का सूर्योदय दशमी तिथि में हुआ था, इस कारण अधिकतर लोग आज ये व्रत कर रहे हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अधिक मास की एकादशी का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि यह महीना करीब 3 साल में एक बार आता है। मान्यता है कि मलमास के एकादशी व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मलमास, बुधवार और एकादशी के योग में भगवान गणेश, विष्णु जी और बुध ग्रह की विशेष पूजा करनी चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें आज बुध ग्रह के लिए मूंग का दान करना चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत
- जो भक्त पद्मिनी एकादशी व्रत करते हैं, वे सुबह जल्दी जागते हैं और स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के सामने व्रत-पूजा करने का संकल्प करते हैं।
- भगवान का ध्यान करते हुए धूप-दीप जलाएं। भगवान गणेश को जल-दूध, पंचामृत से स्नान कराएं। हार-फूल और नए वस्त्रों से श्रृंगार करें। दूर्वा, चंदन, चावल, मिठाई, लड्डू अर्पित करें। श्री गणेशाय नम: मंत्र का जप करें। गणेश जी के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें।
- विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमाओं को जल-दूध, पंचामृत से स्नान कराएं। हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। धूप, दीप जलाएं। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। मौसमी फल चढ़ाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
- व्रत कर रहे हैं, तो दिनभर निराहार रहें। भूखे रहना संभव न हो, तो फलाहार कर सकते हैं। फलों का रस, दूध पी सकते हैं। शाम को भी विष्णु जी की पूजा करें।
- अगले दिन यानी 28 मई की सुबह भी भगवान विष्णु की पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, इसके बाद खुद भोजन करें।
- व्रत-पूजा के साथ ही दान-पुण्य भी जरूर करें। अभी गर्मी का समय है, इसलिए जल, छाया (छाता) और जूते-चप्पल दान का विशेष महत्व है। अनाज, धन, कपड़े का दान भी कर सकते हैं। किसी गौ शाला में गायों की देखभाल के लिए धन दान करें, गायों को हरी घास खिलाएं।
मलमास के स्वामी हैं भगवान विष्णु
मान्यता है कि अधिक मास को मलिन (अशुद्ध) माना गया है, इस कारण कोई भी देवता इस महीने का स्वामी बनने को तैयार नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम देकर सर्वोच्च सम्मान दिया। इसलिए इस महीने में किया गया व्रत, जप और दान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है।
अश्वमेध यज्ञ के समान मिलता है पुण्य
पद्मिनी एकादशी के संबंध में मान्यता है कि इस व्रत से भक्त को यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। साथ ही यह व्रत सुख-शांति और सफलता देने वाला माना गया है।









