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- Meghna Pant Column | Women Road Rights & Gurugram Road Rage Incident
10 घंटे पहले
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मेघना पंत, पुरस्कृत लेखिका, पत्रकार और वक्ता
भारत में लड़कियों को नियमित रूप से दिए जाने वाले मशविरों में कुछ ऐसा है, जो हमारे समाज के बारे में बहुत कुछ उजागर करता है। यह कि उलझो मत, बहस मत करो, प्रतिक्रिया मत दो, उसे जाने दो, उसे रोकने की कोशिश मत करो, सावधान रहो। ये तमाम सलाहें व्यावहारिक लगती हैं, लेकिन ये थका देने वाली हैं। क्योंकि इनके पीछे यह धारणा है कि महिलाओं को पुरुषों की आक्रामकता से निपटना सीखना होगा।
कोई महिला जब “नहीं’ कहती है, तो उससे सबसे पहले यही अपेक्षा की जाती है कि वह अपने फैसले की वजह बताए। दूसरे, वह रास्ते से हट जाए। और तीसरे, वह सुनिश्चित करे कि जिस पुरुष को उसने “नहीं’ कहा है, वह नाराज न हो जाए। हाल में गुरुग्राम में हुई रोड-रेज की घटना इस बात को स्पष्ट रूप से सामने लाती है।
यह घटना सिया के साथ हुई। उनके मुताबिक, वे बाइक चला रही थीं, तभी एक कार उनका पीछा करने लगी। उन्होंने ड्राइवर से दूरी बनाए रखने को कहा, पर टकराव बढ़ता गया। उनका आरोप है कि कार ने उनकी बाइक के सामने अचानक दिशा बदल दी, जिससे वे सड़क पर जा गिरीं। पूरी घटना बाइक्स पर लगे कैमरों में रिकॉर्ड हो गई।
इस तरह के कैमरों की बड़ी अहमियत है। उनके बिना यह कहानी सड़क किनारे हुए एक और उलझे विवाद में बदल जाती : शुरुआत किसने की? कौन गलत तरीके से गाड़ी चला रहा था? क्या यह महज दुर्घटना थी? क्या यह रोड-रेज था?
क्या महिलाओं को गाड़ी चलानी चाहिए? लेकिन उस फुटेज ने महिला को वह चीज दी, जो अजनबियों के साथ होने वाले टकराव में उनके पास अकसर नहीं होती- यानी वास्तव में क्या हुआ, इसका प्रमाण। आरोपी ने कहा कि उसने जानबूझकर टक्कर नहीं मारी थी और टक्कर दुर्घटनावश हुई। लेकिन बाद में पुलिस ने सबूतों की समीक्षा करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया।
बिहार का जमुई मामला इस बात को और परेशान करने वाले तरीके से सामने लाता है। एक छात्रा और उसका सहपाठी कोचिंग से लौट रहे थे, तभी उन्हें रास्ते में रोक लिया गया, घेर लिया गया, परेशान किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पूरी घटना वीडियो में रिकॉर्ड हो गई और बाद में इसी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। अब तक तीन गिरफ्तारियां होने की खबर है। तो, कैमरा मायने रखता है।
सड़कें ऐसी जगह बनती जा रही हैं, जहां लड़कियों से सिर्फ यातायात ही नहीं, पुरुषों के एनटाइटलमेंट वाले रवैये से भी निपटने की अपेक्षा की जाती है। गुरुग्राम की घटना में सवाल यह है कि जब किसी टकराव के दौरान कोई महिला अपना स्पेस, अपने अधिकारों या अपनी गरिमा को छोड़ने से इनकार करती है, तब क्या होता है।
कुछ लोगों के लिए किसी महिला का एक पॉवरफुल बाइक चलाना अब भी इतना असामान्य है कि वे इसे उकसावे के तौर पर लेते हैं। जब कोई महिला कहती है- दूरी बनाए रखें, तो इसे सड़क पर कही गई एक सामान्य हिदायत के रूप में लेने के बजाय चुनौती या उद्दंडता के रूप में देखा जा सकता है। यह बड़ी समस्या है।
महिलाओं को सड़क पर कैसे व्यवहार करना चाहिए, इस पर एक और लेक्चर की जरूरत नहीं है। भारत में महिलाओं से पूछिए कि वे सार्वजनिक जगहों पर कैसा महसूस करती हैं और ज्यादातर कहेंगी कि वे खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
यह खतरनाक है, क्योंकि इसका असर महिलाओं की शारीरिक और आर्थिक स्वतंत्रता पर पड़ता है। बदले की कार्रवाई या नुकसान के डर से महिलाएं घर में रह जाती हैं या सड़क पर हर समय बेहद सतर्क रहती हैं। इसकी कीमत को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)








