44 मिनट पहले
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रविवार, 1 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी है। सप्तमी तिथि दोपहर करीब 2.55 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन भानु सप्तमी और अहोई अष्टमी व्रत दोनों किए जाएंगे। इस दिन पुष्य नक्षत्र भी है। कार्तिक मास, रवि पुष्य नक्षत्र, भानु सप्तमी, अहोई अष्टमी और रविवार के योग में सूर्यदेव और अहोई माता की विशेष पूजा करनी चाहिए।
अहोई अष्टमी व्रत संतान की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। पूजा-पाठ के साथ ही इस दिन नदी स्नान और दान-पुण्य भी करना चाहिए। 1 तारीख की शाम को यानी प्रदोषकाल में कार्तिक कृष्ण अष्टमी रहेगी, इस वजह से पंचांगों में इसी दिन अहोई अष्टमी व्रत करने की सलाह दी गई है।
रवि पुष्य योग में क्या करना रहेगा शुभ?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इसे धन, समृद्धि, स्थिरता और शुभता का प्रतीक माना गया है। जब रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ता है तो रवि पुष्य योग बनता है। इस योग में किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माने जाते हैं। इस दिन सोना-चांदी और आभूषण खरीदना, नया व्यापार शुरू करना, वाहन और संपत्ति की खरीदारी, लक्ष्मी पूजा, सूर्य पूजा जैसे शुभ काम किए जा सकते हैं।
अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी उम्र के लिए किया जाता है व्रत
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की अच्छी सेहत, लंबी उम्र, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना से व्रत रखती हैं। उत्तर भारत में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत करने का संकल्प लेती हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा की जाती है।
पूजा स्थल पर अहोई माता और उनके बच्चों की तस्वीर या पारंपरिक चित्र बनाया जाता है। इसके बाद रोली, चावल, फूल, दीपक और अन्य पूजन सामग्री से पूजा की जाती है।
अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनी और सुनाई जाती है। शाम को तारे दिखाई देने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर संतान की मंगलकामना की जाती है। कुछ जगहों पर चंद्र के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है।
भानु सप्तमी पर सूर्यदेव को चढ़ाएं जल
1 नवंबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने और रविवार पड़ने से भानु सप्तमी का योग बन रहा है। रविवार सूर्यदेव का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य की उपासना करने से आरोग्य, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, चावल और कुमकुम डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। सूर्यदेव के मंत्र ॐ सूर्याय नमः का जप भी किया जा सकता है। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
पुष्य नक्षत्र में दान-पुण्य करने का है विशेष महत्व
रवि पुष्य योग के अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, भूखों को भोजन कराना, गौसेवा करना और गरीब बच्चों को शिक्षा सामग्री दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीले फल, अनाज, गुड़, तांबे के बर्तन और वस्त्र का दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।








