रसरंग में ट्रैवल:  किशनगढ़ : मार्बल स्लरी को देखने जुटते हैं पर्यटक
अअनुबंधित

रसरंग में ट्रैवल: किशनगढ़ : मार्बल स्लरी को देखने जुटते हैं पर्यटक

Spread the love


मृदुला द्विवेदी8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

किशनगढ़ अजमेर के पास स्थित एक ऐतिहासिक कस्बा है। यह एक बेहतरीन ऑफबीट डेस्टिनेशन माना जाता है, जिसे जरूर देखा जा सकता है। इसकी स्थापना जोधपुर के दूसरे राजकुमार महाराजा किशन सिंह जी ने की थी, जो अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहते थे। ऐतिहासिक विरासत और कला-संस्कृति के कारण किशनगढ़ में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण हैं, लेकिन इनमें सबसे लोकप्रिय जगह कुछ अलग और अप्रत्याशित है।

मार्बल डंपिंग यार्ड : यह आज किशनगढ़ का सबसे बड़ा टूरिस्ट आकर्षण बन चुका है और इसकी कहानी पूरी तरह संयोग से जुड़ी है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह जगह संगमरमर के कचरे (मार्बल स्लरी) को डालने के लिए उपयोग में लाई जाती थी। किशनगढ़ एशिया का सबसे बड़ा मार्बल व ग्रेनाइट बाजार है और यहां सफेद संगमरमर का कचरा एक विशेष क्षेत्र में जमा किया जाता रहा। समय के साथ यह इलाका बर्फ जैसी सफेद विशाल भूमि में बदल गया जो देखने में बेहद आकर्षक लगने लगा। धीरे-धीरे यह स्थान पर्यटकों, फोटोग्राफरों और विज्ञापन निर्माताओं के बीच लोकप्रिय हो गया, क्योंकि तस्वीरों में यह बेहद शानदार दिखाई देता है। आज यह इलाका पर्यटकों से गुलजार रहता है और इसके आसपास बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में खाने-पीने की चीजें और सावनियर्स भी मिल जाते हैं।

फूल महल पैलेस : किशनगढ़ किले के पास स्थित फूल महल पैलेस भी शहर का एक खास आकर्षण है जो शाही परिवार की संपत्ति रहा है। इसे अब एक होटल में बदल दिया गया है और यह निजी रूप से संचालित होता है। यह एक विशाल और भव्य इमारत है, जिसमें सजे हुए सैलून, शानदार डाइनिंग एरिया और बड़े लॉन शामिल हैं। आम लोग प्रबंधन से पूर्व अनुमति लेकर इसे देख सकते हैं। इसी परिसर में स्टूडियो किशनगढ़ भी स्थित है जो किशनगढ़ की कलात्मक विरासत को बढ़ावा देता है और शाही संरक्षण में संचालित होता है। फूल महल का गोंडुलाव झील के पास होना इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है।

किशनगढ़ किला : इसका निर्माण महाराजा स्वरूप सिंह ने 1649 में कराया था। यह एक विशाल किला है, जहां से पुराने शहर के नजारे दिखते हैं। दुर्भाग्य से यह किला आम जनता के लिए खुला नहीं है और केवल फूल महल पैलेस में ठहरने वाले मेहमान ही इसे देख सकते हैं। किशनगढ़ अपनी प्रसिद्ध लघु चित्रकला बनी ठनी के लिए जाना जाता है जो इसी किले में विशिष्ट शैली में बनाई गई थी। इस चित्र में राजदरबार की एक महिला सदस्य राधा को सजीव शृंगार में दर्शाया गया है। इसे 1750 से 1760 के बीच निहालचंद ने बनाया था और इसे भारतीय मोनालिसा भी कहा जाता है। वर्ष 1973 में इस चित्र पर डाक टिकट भी जारी किया गया था।

पुराना किशनगढ़ शहर : किशनगढ़ किले के पीछे यह शहर स्थित है, जहां आज भी बड़ी-बड़ी हवेलियां और पुरानी दुकानें देखी जा सकती हैं। इस छोटे से बाजार में घूमते हुए एक ऐसे चित्रकार से मुलाकात हो सकती है, जिनकी दुकान पर कोई नाम नहीं लिखा होता। उनका नाम गौरीशंकर जाखल है, जो पेशे से टेलर हैं, लेकिन चित्रकला उनका जुनून है। इसी इलाके में मिठाई की कई दुकानें हैं और यहां की स्थानीय खास मिठाई मक्खन वड़ा जरूर चखनी चाहिए।

नवग्रह मंदिर : पुराने शहर में ही बाजार के पास नवग्रह मंदिर स्थित है, जो एक ही स्थान पर नौ ग्रहों को समर्पित होने के कारण खास माना जाता है। यह मंदिर एक शांत और सुंदर बगीचे के बीच स्थित है और यहां का वातावरण काफी सुकून भरा है।

रूपनगढ़ किला : यह किशनगढ़ से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित है, जो पुराने किले की दीवारों के भीतर बने एक महल के रूप में जाना जाता है। पूर्व अनुमति लेकर इसके सार्वजनिक हिस्सों को देखा जा सकता है। यह भी शाही परिवार की संपत्ति है और होटल के रूप में संचालित होता है। किले के भीतर छिपे महल की अवधारणा इसे बेहद खास बनाती है।

ऐसे बनाएं यात्रा की योजना… कब जाएं? किशनगढ़ घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक माना जाता है, जब मौसम सुहावना रहता है। जुलाई से सितंबर तक मानसून के दौरान हरियाली देखने को मिलती है। अप्रैल से जून तक तेज गर्मी के कारण यह ऑफ सीजन रहता है। कैसे जाएं? किशनगढ़ हवाई, रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली-अजमेर शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत दोनों ही किशनगढ़ में रुकती हैं। किशनगढ़ एयरपोर्ट से सीमित शहरों के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। जयपुर, अजमेर और आसपास के शहरों से यहां नियमित बस सेवाएं भी चलती हैं। कहां ठहरें? किशनगढ़ में शाही विरासत के कारण ठहरने के लिए कई हेरिटेज होटल उपलब्ध हैं, वहीं मार्बल उद्योग के चलते आधुनिक होटल और लॉज भी मिल जाते हैं। पर्यटक अपनी रुचि और बजट के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *