रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जैकी: बीस रुपए लेकर गए थे ‘हीरो’ बनने
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जैकी: बीस रुपए लेकर गए थे ‘हीरो’ बनने

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गत 24 जनवरी को सुभाष घई जी का बर्थडे था और उसी दिन उन्होंने अपने संस्थान व्हिस्लिंग वुड्स की कन्वोकेशन सेरेमनी रखी थी। सुभाष जी से मेरे बहुत नजदीकी ताल्लुकात रहे हैं, मगर इस फंक्शन में मैं पेरेंट की हैसियत से गया था, क्योंकि मेरे बेटे साहिर को भी डिग्री मिलनी थी। मुख्य अतिथि थे जैकी श्रॉफ। 290 बच्चों को डिग्रियां दी जानी थीं, जिसमें काफी वक्त लगा, लेकिन जैकी पूरे समय स्टेज पर खड़े रहे। हर बच्चे को पूरा अटेंशन दिया, हर एक से बात की, पीठ थपथपाई और उसके साथ ठीक से पोज देकर फोटो खिंचवाई। तब से ही मेरे जहन में जैकी श्रॉफ पर कॉलम लिखने की बात चल रही थी। तो आज बात जैकी की। जैकी श्रॉफ की शुरुआत कैसे हुई, उन्हें पहली फिल्म कैसे मिली, ये किस्से बहुत आम हैं। मगर मैं वो बात बताना चाहता हूं जो बहुत कम लोगों को पता है। जैकी ने अपनी गर्लफ्रेंड, जो अब उनकी बीवी आयशा हैं, को पहली बार बस में स्कूल यूनिफॉर्म में देखा था। बस से उतरते ही उन्होंने बात की और दोस्ती का हाथ बढ़ाया। आयशा ही वह लड़की थीं, जिन्होंने जैकी से कहा कि तुम्हें फिल्मों में काम करना चाहिए। उन्होंने एक प्रोड्यूसर का पता भी दिया और कहा कि अपना फोटो और 20 रुपए देकर आ जाओ, शायद तुम सेलेक्ट हो जाओ। जैकी ने सच में फोटो और 20 रुपए उस प्रोडक्शन कंपनी में जमा करवा दिए। हालांकि उनका सिलेक्शन नहीं हुआ, क्योंकि ऊपर वाले ने उनके लिए उससे बेहतर अवसर रखे थे। उन्हें देवानंद जैसे लीजेंडरी स्टार ने चुना। यह बात और है कि पहले उन्हें विलन का राइट हैंड बनाया गया। फिर सुभाष घई जी ने उन्हें हीरो बनाकर फिल्म इंडस्ट्री को सिर्फ एक हीरो नहीं, एक सुपरस्टार और उससे भी बढ़कर एक अच्छा इंसान दे दिया। मैं बात कर रहा हूं जैकी श्रॉफ की सादगी की। वे बड़ा हो या छोटा, अमीर हो या गरीब, सबसे एक ही तरह से मिलते हैं। यह बात बहुत पुरानी है। तब मैं मुंबई शिफ्ट नहीं हुआ था। रिश्तेदारों के यहां ठहरा हुआ था। वहीं मेरी मुलाकात सोहेल नाम के एक शख्स से हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि शूटिंग देखनी है? मैंने कहा बिल्कुल। उन्होंने बताया कि अंधेरी ईस्ट में चांदीवाली स्टूडियो है, जहां मनमोहन देसाई प्रोडक्शन की फिल्म ‘अल्लाह रक्खा’ की शूटिंग चल रही है। डायरेक्टर हैं उनके बेटे केतन देसाई और मैं उनका असिस्टेंट हूं। दूसरे दिन मैं डरते-डरते लोकल पकड़कर निकला। मुंबई के रास्ते भी ठीक से नहीं जानता था। पहली बार मुंबई में अकेले स्टूडियो जाने का अनुभव था। किसी तरह चांदीवाली स्टूडियो पहुंचा। सोहेल जी ने मुझे केतन देसाई, फाइट मास्टर पप्पू वर्मा और जैकी श्रॉफ से मिलवाया। यह तजुर्बा मैं जिंदगी में कभी नहीं भूल सकता। शूटिंग खत्म हुई। मैं स्टूडियो के बाहर आया। उस जमाने में वह इलाका बिल्कुल सुनसान रहता था। समझ नहीं आ रहा था कि कहां जाऊं। चलते-चलते पहाड़ी से मेन रोड पर आ गया। तभी एक काली फिएट आकर रुकी। उसमें जैकी श्रॉफ बैठे थे। उन्होंने पूछा, ‘बच्चे कहां जाना है।’ मैंने कहा, अंधेरी स्टेशन जाना है, समझ नहीं आ रहा कैसे जाऊं। जैकी बोले, ‘बैठ जाओ।’
मुझे यह किसी ख्वाब जैसा लग रहा था। हाईवे पर उन्होंने गाड़ी रोकी और कहा, बेटा यह जो सीधा रोड जा रहा है न, यही अंधेरी स्टेशन जाता है। और मुझे वहीं उतार दिया। मैं आज भी उस फिएट को जाते हुए देखता रहा। उसका नंबर 1234 आज तक याद है। तीस साल तक मैंने यह किस्सा किसी को नहीं सुनाया, अपने घरवालों को भी नहीं। लोग कहते कि शूटिंग देखने गया और झूठ बोल रहा है कि जैकी श्रॉफ ने लिफ्ट दी। जब मैं इंडस्ट्री में स्थापित हो गया और जैकी मेरे दोस्त बन गए, तब मैंने यह किस्सा उन्हें सुनाया। जैकी बोले, ‘मुझे याद है, क्योंकि मेरी भी तब ज्यादा फिल्में नहीं हुई थीं। मुझे याद है कि मैंने चांदीवाली से एक लड़के को हाईवे पर छोड़ा था। तब तू बच्चा था, अब बड़ा हो गया।’ आज जब हम मिलते हैं तो सलाम नहीं करते, एक गाना गाते हैं : जब अंधेरा होता है, आधी रात के बाद / एक चोर निकलता है / अंधेरे से सूनी सी रातों में/ एक आवाज आती है चोर चोर। दरअसल, इसके पीछे की भी एक कहानी है। हम लोग ‘अलबेला’ फिल्म की शूटिंग के लिए ऑस्ट्रिया गए थे। वहां खूबसूरत शैले (स्विस शैली में वुडन हाउस) में ठहरे थे। सुबह छह बजे शूटिंग पर जाते और शाम को थके हुए लौटते। यूरोप में प्राय: सात बजे तक डिनर हो जाता है। एक घंटे बाद ठक-ठक की आवाज आती। ऐसा लगता कोई जा रहा है। फिर रात बारह या एक बजे के आसपास फिर ठक-ठक की आवाज आती। लगता था कि कोई लौटकर आया है। दो दिन मेरी नींद खराब हुई। तीसरे दिन जब जूतों की आवाज आई तो मैंने देखा, सिर पर कपड़ा बांधे, बूट पहने जैकी बाहर जा रहे थे। तब मैंने भीतर से ही यह गाना गाया : जब अंधेरा होता है, आधी रात के बाद / एक चोर निकलता है…। जैकी अंदर आए और हंसते हुए बोले, भिड़ू, तू मेरी जासूसी कर रहा है! मैंने कहा कि मैं जासूसी नहीं कर रहा हूं। आपके बूट्स बताते हैं कि आप कब जाते हैं और कब आते हैं… तब से हम यही गाना गाते हैं। आज जैकी को याद करते हुए उनकी पहली सुपरहिट फिल्म ‘हीरो’ का यह गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए। प्यार करने वाले कभी डरते नहीं,
जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं।



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