रसरंग में ट्रैवल:  मॉस्को मेट्रो: सिर्फ स्टेशन नहीं, पूरी कला दीर्घा!
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रसरंग में ट्रैवल: मॉस्को मेट्रो: सिर्फ स्टेशन नहीं, पूरी कला दीर्घा!

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पर्णश्री देवी1 घंटे पहले

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दुनिया में शायद ही कोई ऐसी मेट्रो होगी, जहां की यात्रा किसी कलादीर्घा की सैर जैसी लगे। लेकिन मॉस्को में भूमिगत रेल का सफर ऐसा होता है, मानो आप समय की गलियों में प्रवेश कर गए हों, जहां संगमरमर की चमक, भव्य झूमरों की रोशनी और दीवारों पर बने अद्भुत चित्रांकन हर मोड़ पर हमें इतिहास की सांसों से रूबरू करवाते हैं। दुनिया के सबसे खूबसूरत और कुशल परिवहन तंत्रों में गिने जाने वाला मॉस्को मेट्रो रोजमर्रा की यात्रा को अविस्मरणीय बना देता है। यहां का हर स्टेशन एक कहानी कहता है- कला की, इतिहास की और उस शहर की, जिसने गोया कि अपने लोगों के लिए धरती के नीचे एक पूरा साम्राज्य खड़ा कर दिया है।

शहर के नीचे स्टेशन नहीं, बसे हैं महल!

1935 में जब मॉस्को मेट्रो की शुरुआत हुई तो इसकी “जनता का महल’ के रूप में कल्पना की गई थी, एक ऐसा स्थान जो सोवियत आदर्शों की भव्यता, शक्ति और उन्नति का प्रतीक हो। उस समय स्टालिन ने वास्तुकारों से कहा था, ‘हमारे स्टेशन साधारण नहीं होंगे, वे ऐसे दिखने चाहिए मानो हम बसों (ट्रेन की बोगियों) को राजमहलों के द्वारों से गुजारकर ले जा रहे हों।’ आज 430 किलोमीटर से अधिक लंबे ट्रैक और 250 से अधिक स्टेशनों वाला यह नेटवर्क रोजाना लाखों यात्रियों को ढोता है। पर इसके बावजूद इसकी दीवारों और छतों में वह शुरुआती महत्वाकांक्षा अब भी दिखाई देती है, जहां कला रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन सके। जैसे ही आप लंबे एस्केलेटर से नीचे उतरते हैं, ऊपर की आधुनिक दुनिया धीरे-धीरे पीछे छूट जाती है। नीचे चमचमाते संगमरमर के कॉरिडोर्स, विशाल मेहराबें, दमकते झूमर और श्रमिकों, सैनिकों व कलाकारों के जीवन को दर्शाती भित्तिचित्रों की अनोखी ऐतिहासिक दुनिया से रूबरू होने लगते हैं। इस अनुभव में सिनेमा-सी भव्यता भी है तो एक आत्मीयता भी।

गतिशील कला का संसार

मॉस्को मेट्रो के अनेक स्टेशन अपने-आप में एक ‘गंतव्य’ की तरह हैं। कोम्सोमोल्स्काया अपनी सुनहरी मोजेक कला और बारोक शैली की मेहराबों से आपको मंत्रमुग्ध कर देता है। मयाकोव्स्काया आर्ट डेको शैली का अद्भुत नमूना है। यहां स्टेनलेस स्टील के चमकते स्तंभों और छत पर बने ‘सोवियत आकाश’ के चित्रों से जीवन जगमगाता दिखाई देता है। प्लोश्चद रिवोल्यूत्सी में 76 कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं। यहां आने वाले कई यात्री इन्हें स्पर्श करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने से किस्मत साथ देने लगती है। नोवोस्लोबोद्स्काया की रंगीन शीशे की खिड़कियां किसी चर्च सा आभास कराती हैं, जो रोशनी के प्रतिबिंब से पूरे हॉल को रंगों की जादुई दुनिया में बदल देती हैं। यहां का हर स्टेशन किसी प्रदर्शनी जैसा लगता है।

इतिहास के साथ चलती रेल

अपनी सुंदरता के अतिरिक्त मॉस्को मेट्रो इतिहास की गहराइयों से भी जुड़ी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस स्थान का उपयोग बम शेल्टर और कमांड सेंटर के रूप में हुआ था। हजारों नागरिकों ने यहां रातें गुजारी थीं। कई स्टेशन इतने मजबूत बनाए गए थे कि उन पर विस्फोटों का प्रभाव भी नगण्य पड़ता। युद्ध के बाद मेट्रो की सोवियत इंजीनियरिंग सार्वजनिक गर्व का प्रतीक बन गई। यह एक ऐसा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जिस पर रूसी लोग आज भी वैसी ही निष्ठा रखते हैं जैसे 80 साल पहले रखते थे। आज नई पीढ़ी की अल्ट्रा-मॉडर्न ट्रेनें भी उन्हीं पुराने स्तंभों के बीच से तेजी से गुजरती हैं। यह दृश्य मॉस्को की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसमें वह आधुनिकता और विरासत, दोनों को साथ लेकर चलता है।

सबके लिए सुलभ लग्जरियस

मॉस्को मेट्रो की सबसे अनूठी बात यह है कि उसकी कला सबके लिए सुलभ है। यह लग्जरियस का लोकतांत्रिक स्वरूप है, जहां खूबसूरती किसी महंगे संग्रहालय में बंद नहीं है, बल्कि रोजाना लाखों यात्रियों के साथ चलती है। यह याद दिलाता है कि पर्यटन का मतलब हमेशा बड़े व लोकप्रिय स्थलों की यात्रा करना ही नहीं होता। कई बार शहर के रोजमर्रा के रास्तों में भी अद्भुत सौंदर्य छिपा होता है, बस उसे देखने की नजर चाहिए। जब मॉस्को जाएं, तो मेट्रो जरूर लें। सिर्फ इसलिए नहीं कि आपको कहीं जाना है, बल्कि इसलिए कि यहां यात्रा ही गंतव्य बन जाती है।

मॉस्को मेट्रो को किस तरह देखें? इसे अनुभव करने का सबसे अच्छा तरीका है विस्मय से भरे मन के साथ कैमरा हाथ में लेकर मॉस्को मेट्रो की यात्रा करना। शुरुआत करें ट्रोइका कार्ड से, जो मेट्रो, बसों और ट्राम, तीनों में आसान और निर्बाध यात्रा की सुविधा देता है। यह सिस्टम अद्भुत रूप से शानदार है। व्यस्त समय में हर 90 सेकंड में एक ट्रेन आ जाती है। यदि आप इससे भी गहराई से जानना चाहते हैं, तो एक निजी गाइडेड टूर बुक कर सकते हैं। अनुभवी गाइड आपको वे छिपे हुए विवरण भी दिखाते हैं, जैसे सोवियत विमानन से प्रेरित मोजाइक या छतों की भित्तिचित्रों में छिपे हुए सूक्ष्म प्रतीक। भीड़-भाड़ के समय से बचेंगे तो बेहतर रहेगा। इसके लिए सुबह या देर शाम का समय अच्छा है। इस समय स्टेशन को ऐसी अवस्था में देखने का मौका मिलता है, जहां पॉलिश की हुई फर्श झूमरों की मद्धिम रोशनी को खूबसूरती से प्रतिबिंबित करती हैं।



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