रसरंग में पाकिस्तान डायरी:  जब हसन अब्दाल में जुटे 7 हजार भारतीय सिख
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रसरंग में पाकिस्तान डायरी: जब हसन अब्दाल में जुटे 7 हजार भारतीय सिख

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हामिद मीर5 घंटे पहले

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पाकिस्तान के हसन अब्दाल स्थित पवित्र गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में हर
साल भारत सहित दुनियाभर के कई सिख वैसाखी का पर्व मनाने के लिए एकत्र
होते हैं। - Dainik Bhaskar

पाकिस्तान के हसन अब्दाल स्थित पवित्र गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में हर साल भारत सहित दुनियाभर के कई सिख वैसाखी का पर्व मनाने के लिए एकत्र होते हैं।

पाकिस्तान के एक छोटे शहर हसन अब्दाल में बीते हफ्ते 14 अप्रैल को भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों से 8,000 से अधिक सिख वैसाखी महोत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए थे। हसन अब्दाल इस्लामाबाद के उत्तर-पश्चिम में 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह इलाका खैबर पख्तूनख्वा की पहाड़ियों के बेहद करीब है, जो कई बार आतंकियों का निशाना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केपीके में कुछ पाकिस्तानी सिखों पर हमले हो चुके हैं। सिख तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए असाधारण सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। 14 अप्रैल की शाम को वैसाखी का यह बड़ा दिन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब हसन अब्दाल के इंचार्ज सरदार सरतूक सिंह ने पाकिस्तान सरकार को हसन अब्दाल के इतिहास में वैसाखी का सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई दी।

पाकिस्तान में सिख धर्म के अनेक पवित्र स्थल हैं, जिनमें गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान ‘ननकाना साहिब’ (लाहौर से 75 किलोमीटर दूर पंजाब में स्थित) शामिल है। मुल्क में कुल 195 गुरुद्वारे व पवित्र स्थल हैं, जिनमें पांच सबसे अहम हैं। ये हैं नरोवाल में करतारपुर साहिब, हसन अब्दाल में गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब (जहां एक चट्टान पर गुरु नानक जी के दाहिने हाथ की छाप मानी जाती है, इसलिए इसे पंजा साहिब कहा जाता है), लाहौर में गुरुद्वारा डेरा साहिब और लाहौर किले के पास स्थित रणजीत सिंह की समाधि। इसके अलावा ‘ननकाना साहिब’ तो है ही। हर साल भारत और दुनिया भर से हजारों सिख इन धार्मिक स्थलों के दर्शन करने पाकिस्तान आते हैं। इस साल वैसाखी में भाग लेने के लिए भारत से रिकॉर्ड संख्या में सिखों ने पाकिस्तान का दौरा किया।

पाकिस्तान-भारत धार्मिक प्रोटोकॉल समझौता 1974 के तहत किसी भी धार्मिक त्योहार में भाग लेने के लिए पाकिस्तान में 3,000 तक सिख तीर्थयात्रियों को आने की अनुमति दी जाती है। यह पहली बार है कि पाकिस्तान सरकार ने वैसाखी महोत्सव में भाग लेने के लिए भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को कुल 6,751 वीजा जारी किए। 3,751 अतिरिक्त वीजा का प्रबंधन करना आसान कार्य नहीं था, लेकिन इसके पीछे सरदार रमेश सिंह अरोड़ा का बड़ा योगदान है।

अरोड़ा इस समय दो महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। वे नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) से जुड़े हैं। वे पंजाब सरकार (जिसकी अगुवाई मरियम नवाज कर रही हैं) में अल्पसंख्यक और मानवाधिकार मामलों के मंत्री हैं। अरोड़ा पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष भी हैं। इस वर्ष अरोड़ा ने मरियम नवाज के माध्यम से संघीय सरकार में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया, जहां विदेश मंत्री इशाक डार मरियम नवाज की छोटी बहन असमा नवाज के ससुर हैं। अरोड़ा ने संघीय सरकार को सुझाव दिया कि पाकिस्तान को वैसाखी महोत्सव के लिए अधिकतम वीजा जारी करने चाहिए क्योंकि अप्रैल में मौसम अधिक गर्म नहीं होता है। कनाडा, अमेरिका और यूरोप से भी लगभग 2,000 सिख पाकिस्तान वैसाखी मनाने आए। इस वर्ष अरोड़ा ने वैसाखी पर करतारपुर साहिब में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की और अपनी शानदार प्रबंधन क्षमता से उन्हें प्रभावित किया।

जब मैंने सरदार रमेश सिंह अरोड़ा से पूछा कि उन्होंने भारतीय नागरिकों के लिए 6,500 से अधिक वीजा का प्रबंधन कैसे कर लिया तो उन्होंने बड़ी विनम्रता से इसका श्रेय दूसरों को दिया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती लाहौर से ननकाना साहिब और फिर ननकाना साहिब से गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल) तक हजारों भारतीय तीर्थयात्रियों को सुरक्षा प्रदान करने की थी। पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए शानदार व्यवस्था की। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के नेता दलजीत सिंह सरना भी दिल्ली से आए एक दल का हिस्सा थे। उन्होंने अरोड़ा के प्रयासों की प्रशंसा की और पाकिस्तान की सीमा के अंदर इतनी बड़ी संख्या में भारतीय सिखों की मेजबानी करने के लिए उनका धन्यवाद किया।

वैसाखी हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है, जो भारतीय सौर वर्ष के पहले महीने “वैसाख’ का पहला दिन होता है। पंजाब और उत्तर भारत में यह फसल कटाई का पर्व माना जाता है। सिखों के लिए यह नया साल नहीं है। सिख समुदाय नानकशाही कैलेंडर के अनुसार “चेत’ महीने में नया साल मनाता है। सिखों के लिए फसल उत्सव के अलावा वैसाखी का एक और बड़ा महत्व यह है कि इसी दिन 13 अप्रैल 1699 को दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। लगभग एक सदी बाद 12 अप्रैल 1801 को वैसाखी के अवसर पर ही रणजीत सिंह जी को पहले सिख साम्राज्य का महाराजा घोषित किया गया था।

पाकिस्तानी हिंदू भी वैसाखी को अपने पारंपरिक सौर नववर्ष के पहले दिन के रूप में मनाते हैं, जैसे कि भारत के असम, बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, केरल, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य हिस्सों के हिंदू मनाते हैं। पाकिस्तानी हिंदू पंजाब के चकवाल जिले में स्थित कटासराज मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 2005 में कटासराज का दौरा किया था। मुझे इस्लामाबाद में आडवाणी साहब से मुलाकात याद है। वे कटासराज की यात्रा के बाद बहुत खुश थे और उन्होंने मुझे मुस्कराते हुए एक बेबाक इंटरव्यू भी दिया था। मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान भविष्य में भारतीय नागरिकों को वीजा देने के और भी कई रिकॉर्ड बनाएगा। भारत को इस दौड़ में पाकिस्तान को पीछे छोड़ना चाहिए। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा दक्षिण एशिया को यूरोपीय संघ (ईयू) की तरह एक सॉफ्ट बॉर्डर जोन में बदल सकती है।



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