रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जब हर पत्थर पर लिख दिया था कुली नं 1
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब हर पत्थर पर लिख दिया था कुली नं 1

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रूमी जाफरी4 घंटे पहले

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पिछले हफ्ते फिल्म इंडस्ट्री के बड़े और मशहूर प्रोड्यूसर वाशु भगनानी जी का जन्मदिन था। उनके घर चार पांच खास लोगों जैसे डेविड धवन, रवीना टंडन, अभिषेक बच्चन, चंकी पांडेय, तुषार कपूर का डिनर था। मेहमानों का स्वागत उनके बेटे जैकी भगनानी और बहु रकुलप्रीत ने किया। वहां से निकलकर मैंने सोचा कि मैं ज्यादातर कॉलम एक्टर्स, स्टार्स, डायरेक्टर्स, राइटर्स, म्यूजिक डायरेक्टर्स आदि पर ही लिखता हूं। किसी प्रोड्यूसर के बारे में कभी नहीं लिखा। तो सोचा कि आज मैं कुछ बातें वाशु भगनानी जी के बारे में साझा करूं।

वाशु जी का कलकत्ता में कपड़ों का कारोबार था। उन्होंने मुंबई आकर कंस्ट्रक्शन और ऑडियो कैसेट बनाने का काम शुरू किया। उस जमाने में ऑडियो कैसेट बहुत बिकते थे। उन कैसेट्स के कवर वाशु जी बनाते थे। उसकी वजह से उनकी सारी म्यूजिक कंपनी के मालिकों से अच्छी दोस्ती हो गई और फिर वाशु जी ने फिल्म प्रोडक्शन शुरू किया। उनकी जो पहली मूवी थी, वह ‘कुली नंबर वन’ थी। यह मैंने लिखी थी और डेविड धवन साहब ने डायरेक्ट की थी। वो फिल्म सुपरहिट हुई। उसके बाद मैंने उनके लिए हीरो नंबर 1, बीवी नंबर 1, बड़े मियां छोटे मियां, मुझे कुछ कहना है, वगैरह लगातार कई हिट फिल्में लिखीं। मेरा और उनका रिश्ता एक परिवार का रिश्ता हो गया।

हमारी फिल्म इंडस्ट्री वाशु जी को इस बात का श्रेय देती है कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को मार्केटिंग और पब्लिसिटी करना सिखाया। उन्होंने सिखाया कि पब्लिसिटी किसी फिल्म के लिए कितनी जरूरी होती है। जब कुली नंबर 1 रिलीज होने वाली थी, तब मैं उनके ऑफिस गया। उन्होंने मेरे सामने पानी की एक बोतल रख रखी थी, जिस पर कुली नंबर 1 लिखा हुआ था। सामने एक ऐश ट्रे रखी थी, उसमें भी कुली नंबर 1 लिखा हुआ था। फिर उन्होंने स्कूटर की स्टेफनी के कवर दिए और कहा कि ये अपने उन दोस्तों को दे देना, जिनके पास स्कूटर है। उनसे कहना कि वो अपने स्कूटर पर लगा लें। उस पर भी कुली नंबर 1 लिखा था। फिर उन्होंने मेरे सामने कुछ छाते रख दिए और कहा कि इसे आप ले जाइए। उन पर भी यही लिखा हुआ था। चूंकि पिक्चर 30 जून को रिलीज होनी थी। मुंबई में तो बारिश रिलीज के दो हफ्ते पहले ही शुरू होनी थी। उन्होंने मुझे कुछ लेटर पैड दिए। उन पर लिखा था कुली नंबर 1, पेन दिए उन पर भी कुली नंबर 1 लिखा हुआ था।

मैं ये सब देखकर चौंक गया और कहा कि वाशु जी ये सब क्या है? मैंने जिंदगी में पहले कभी ऐसा नहीं देखा था। वाशु जी जो हमेशा मुस्कराते रहते हैं, मुस्कराकर बोले- सरकार, आपकी फिल्म का प्रमोशन कर रहा हूं। मैं और वो एक दूसरे को सरकार कहकर ही बुलाते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि इसकी बहुत जरूरत है। आप फिल्म इंडस्ट्री वाले लोग फिल्म के पोस्टर लगवाकर, ट्रेलर दिखवाकर समझते हैं कि फिल्म चल जाएगी, इसी को पब्लिसिटी मानते हैं। जब तक आप लोग अपने प्रोडक्ट की पब्लिसिटी नहीं करोगे, तब तक कैसे लोगों को पता चलेगा। अगर पब्लिसिटी जरूरी नहीं होती तो इतने बड़े-बड़े कॉर्पोरेट हैं, वो अपने प्रोडक्ट पर इतने करोड़ों रुपए क्यों खर्च करते? चाय से लेकर घी तक और राशन से लेकर सीमेंट तक, इतने करोड़ों रुपए पब्लिसिटी पर खर्च क्यों करते हैं, क्योंकि उससे रिजल्ट मिलता है। आप देखिएगा, ये मेरी पब्लिसिटी के बाद आपको क्या रिजल्ट मिलेगा। वाशु जी की इसी बात पर मुझे शकील आजमी का ये शेर याद आ रहा है –

हर घड़ी चश्म-ए-खरीदार में रहने के लिए कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए

खैर, उसके बाद वाशु जी बोले कि सरकार इसको ले जाइये, दोस्तों में बांटिये और दो दिन बाद घर से निकलकर नजर चौकन्नी रखिएगा, आपको सरप्राइज देखने को मिलेगा। दो दिन बाद जब मैं घर से निकला, तो एक बगीचे पर मेरी नजर पड़ी। वहां पत्थर पर कुली नंबर 1 लिखा था। मैं लोखंडवाला से बांद्रा तक गया। रास्ते में हर जगह दीवार पर पोस्टर लगे हुए थे। कोई भी जगह जो खाली थी, हर उस जगह पर, हर पत्थर पर कुली नंबर 1 लिखा था। फिल्म रिलीज हुई और सुपरहिट रही। कई महीनों तक वो पत्थर मौजूद रहे, जिन पर कुली नंबर 1 लिखा हुआ था।

उसके बाद तो वाशु जी ने पब्लिसिटी की लाइन लगा दी, क्योंकि उनकी सभी फिल्में हिट हो रही थीं। आप गाड़ी में जा रहे हो और अचानक आपके सामने स्कूटर की स्टेफनी पर कुली नंबर 1 लिखा अा जाता था। कभी आप बारिश में जा रहे हो और अचानक से कोई छतरी लिए आ जाता था, जिस पर लिखा रहता था बीवी नंबर 1 तो कभी बड़े मियां छोटे मियां। बॉम्बे की जितनी भी स्कूटर, गाड़ियां, छतरियां, हर जगह कहीं न कहीं आपको वाशु जी के बैनर का नाम छपा दिख जाता था। उसके बाद इंडस्ट्री की आंखें खुलीं और सबको समझ में आया कि ये प्रमोशन कितना जरूरी है।

मुझे अभी भी याद है, जब शाहरुख खान, जूही चावला और अजीज मिर्जा ने मिलकर अपनी कंपनी ड्रीम्स अनलिमिटेड शुरू की। उसका ऑफिस खरीदा तो सबसे पहले वाशु जी को बुलाकर कहा कि आप हमें सिखाइए कि मार्केटिंग और प्रमोशन कैसे किया जाता है। तो आज वाशु जी के लिए उनकी इतनी सारी हिट फिल्मों में से एक कुली नंबर 1 का ये गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए और खुश रहिए।

मैं तो रस्ते से जा रहा था, मैं तो भेलपुरी खा रहा था, तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं…



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