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6 घंटे पहले
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सवाल- मेरी उम्र 28 साल है। मैं पिछले 3 साल से रिलेशनशिप में हूं और अब हम शादी के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन एक बात मुझे परेशान कर रही है कि मेरे बॉयफ्रेंड के अपने परिवार से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। वह इस बारे में बात भी नहीं करता। मैं अपने परिवार के काफी करीब हूं। क्या यह फर्क हमारे रिश्ते पर असर डाल सकता है? मुझे डर लग रहा है कि मैं भी अपनी फैमिली से दूर हो जाऊंगी? क्या मेरे बच्चों पर भी असर पड़ेगा? मैं इस बारे में उससे बात कैसे करूं? मुझे क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब- सबसे पहले तो सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपकी फिक्र बता रही है कि आप अपने भविष्य को लेकर संजीदा हैं। चलिए आपकी सिचुएशन समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं।
बचपन तय करता है हमारा स्वभाव
- व्यक्ति के स्वभाव की जड़ें उसके बचपन से जुड़ी होती हैं। हमारे सभी इमोशन और एक्शन अतीत से प्रभावित होते हैं।
- आपने लिखा कि आप अपने पेरेंट्स के काफी करीब हैं। इसका एक मतलब ये भी है कि आपको बचपन में प्यार, सुरक्षा और केयर मिली है।
- दूसरी ओर आपके पार्टनर के बचपन में शायद ये बुनियादी चीजें न मिली हों।
- आपने लिखा कि अपने पेरेंट्स के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं हैं।
- उनके इस व्यवहार के पीछे कुछ ‘अनरिजॉल्व्ड पेन’ यानी अनसुलझे दर्द हो सकते हैं।
- बचपन में हमें जैसा माहौल और केयर मिलती है, उससे हमारी ‘इमोशनल लैंग्वेज’ तय होती है।
- जिन्हें बचपन में भरपूर प्रेम मिलता है, बड़े होने पर उनके भीतर प्यार होता है।
- आपके पार्टनर के मामले में शायद उनकी परिस्थितियां ऐसी रही हों कि उनके और पेरेंट्स के बीच ‘इमोशनल कनेक्शन’ डेवलप न हो पाया हो।

आपके मन में उठ रहे डर की वजह
जब हम किसी को जीवनसाथी चुनते हैं, तो चाहते हैं कि हमारे परिवार भी आपस में जुड़ें। इसलिए आपके मन में कुछ डर होना स्वाभाविक है। इस डर के पीछे कई कारण छिपे हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है-

शुरुआती रिश्तों में प्रेम बेहद जरूरी
साइकोलॉजी के मुताबिक, इस दुनिया में मनुष्य का पहला रिश्ता अपने पेरेंट्स से बनता है। यही रिश्तों की बुनियाद होती है। अगर जड़ ही कमजोर हो तो इंसान की प्यार करने, जुड़ने और भरोसा करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।
यह आपके रिश्ते को कैसे प्रभावित कर सकता है?
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ जुड़ते हैं, जो अपनी जड़ों से कटा हुआ है तो वह डिस्कनेक्शन आपसी कम्युनिकेशन में भी झलक सकता है। उनके रिएक्शंस में भी इसके कुछ संकेत दिख सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

हमारे रिएक्शंस का मनोविज्ञान
मशहूर मनोवैज्ञानिक जॉन गॉटमैन और एस्थर पेरेल के मुताबिक, रिश्तों में होने वाले झगड़े अक्सर ‘उस वक्त से’ जुड़े नहीं होते हैं। ये रिएक्शन कहीं और से आ रहे होते हैं।
अगर आपके पार्टनर को लगता है कि कोई उन्हें प्यार नहीं करता तो आपकी थोड़ी सी एब्सेंस भी उन्हें ये एहसास करा सकती है कि आप उन्हें शायद प्यार नहीं करती हैं। कुल मिलाकर ऐसे माहौल में बड़े हुए बच्चों का रिएक्शन असल स्थिति से कहीं बड़ा और आक्रामक होता है।
मौजूदा स्थिति पर अतीत का साया
जब कोई पुराना दर्द प्रोसेस नहीं होता, तो वह वर्तमान की किसी भी छोटी घटना से ‘ट्रिगर’ हो जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने उनका फोन नहीं उठाया, तो उन्हें सिर्फ फोन न उठने का दुख नहीं होगा। उन्हें वह पूरा बचपन याद आ जाएगा, जब उन्हें ‘इग्नोर’ किया जाता था। इस समय एडल्ट व्यक्ति नहीं रो रहा, वह बच्चा रो रहा है, जिसका कभी ख्याल नहीं रखा गया। जिसे वह अनकंडीशनल मोहब्बत नहीं मिली। ऐसी मामूली घटनाएं उनके ट्रामा को ट्रिगर कर सकती हैं-

बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?
जब पेरेंट्स अपने परिवार से खुद इमोशनली डिस्कनेक्टेड होते हैं, तो अनजाने में उसका असर बच्चों पर भी पड़ता है। मनोविज्ञान में इसे ‘इंटरजनरेशनल ट्रॉमा’ कहते हैं। यानी एक पीढ़ी का अनसुलझा दर्द अगली पीढ़ी में ट्रांसफर हो जाता है। अगर पिता के मन में परिवार को लेकर कड़वाहट है, तो संभव है कि वह अपने बच्चे को भी ‘जुड़ाव’ और ‘भरोसे’ के बुनियादी सबक न दे पाए।
पिता का छोटी बातों पर ‘आउट ऑफ प्रपोर्शन’ रिएक्शन देना बच्चे के मन में डर पैदा कर सकता है, जिससे वे अपनी भावनाएं छिपाने लगते हैं। इसके ये असर हो सकते हैं-
- असुरक्षित लगाव- बच्चों में जुड़ाव की कमी होना।
- रिश्तों का डर- उन्हें लगेगा कि रिश्ते बोझिल होते हैं।
- इमोशनल रेगुलेशन- जज्बातों को काबू करने में दिक्कत होती है।
- एंग्जाइटी- घर के भारी माहौल से घबराहट होने लगती है।
- सोशल स्किल- बाहरी लोगों से घुलने-मिलने में हिचक।
- आइडेंटिटी क्राइसिस- अपनी फैमिली हिस्ट्री पर शर्मिंदगी।
- भरोसे की कमी- लोगों पर भरोसा करने में कठिनाई होना।
बच्चों को इस मुश्किल से बचाएं
अगर पेरेंट्स ने कुछ झेला है तो जरूरी नहीं है कि वही ट्रॉमा बच्चों पर भी ट्रांसफर हो। उन्हें इससे बचाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे-
- हीलिंग: पार्टनर को अपने अतीत के गुस्से पर काम करना होगा।
- ट्रांसपेरेंसी: बच्चों के सामने किसी भी परिवार की बुराई न करें।
- हेल्दी एनवार्नमेंट: पिता अपनी कहानी या नफरत बच्चों पर न थोपें।
- ननिहाल से जुड़ाव: बच्चों को फैमिली से मिलने वाले प्यार का अनुभव होने दें।

आपको अब क्या करना चाहिए?
ऑब्जर्व करें:
- देखें कि क्या वह आपके परिवार का सम्मान करते हैं?
- क्या वह आपको पेरेंट्स से मिलने से रोकते हैं?
- अगर ऐसा नहीं है और वह आपके रिश्तों का सम्मान करते हैं, तो स्थिति आराम से संभल सकती है।
थेरेपी का सुझाव: अगर उनका गुस्सा कंट्रोल से बाहर है, तो उन्हें प्रोफेशनल काउंसलिंग या थेरेपी के लिए मनाएं। उन्हें समझाएं कि यह उनके पुराने घावों को भरने के लिए है।
बाउंड्री तय करें: स्पष्ट करें कि आप अपनी फैमिली से जुड़ी रहेंगी। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि आपके परिवार के करीब होने का मतलब उनसे दूर होना नहीं है।
अंतिम सलाह
आपका डर गलत नहीं है, लेकिन प्यार में बदलाव लाने की ताकत होती है। अगर पार्टनर अपनी कमियों को स्वीकार करने और उन पर काम करने को तैयार है, तो आप एक स्वस्थ भविष्य बना सकते हैं। अपने स्टैंड पर कायम रहें और धीरे-धीरे उन्हें खुशहाल रिश्तों की अहमियत समझाएं।
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