रिश्तों का वर्कआउट:  जिम में पसीना नहीं, अब ‘बॉन्डिंग ड्रिल’ से संवरेगी सेहत, लंबी उम्र के लिए दुनिया में बढ़ा सोशल फिटनेस का ट्रेंड
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रिश्तों का वर्कआउट: जिम में पसीना नहीं, अब ‘बॉन्डिंग ड्रिल’ से संवरेगी सेहत, लंबी उम्र के लिए दुनिया में बढ़ा सोशल फिटनेस का ट्रेंड

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अब तक हम शरीर को फिट रखने के लिए ‘फिजिकल फिटनेस’ और मन की शांति के लिए ‘मेंटल हेल्थ’ की बात करते थे, लेकिन अब डॉक्टरों और चैज्ञानिकों ने एक नया शब्द दिया है सोशल फिटनेस। इसका मतलब है आपके रिश्तों की मजबूती और लोगों से जुड़ने की आपकी क्षमता। सोशल फिटनेस स्टूडियो ऐसी जगहें हैं जहां शरीर की मांसपेशियों के बजाय ‘सोशल स्किल्स’ को बढ़ाने और उनमें सुधारने पर काम किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल फिटनेस कोई ‘मौज-मस्ती नहीं बल्कि लंबी उम्र पाने का बेहतर उपाय है। हार्वर्ड की 85 साल लंबी स्टडी में पाया गया कि इंसान की खुशी और लंबी उम्र का सबसे बड़ा राज उसके पैसे या सफलता नहीं, बल्कि उसके रिश्तों की गुणवत्ता है। रिसर्च कहती है कि जो लोग सामाजिक रूप से सक्रिय हैं, वे न केवल खुश रहते हैं, बल्कि उनकी उम्र भी लंबी होती है। बॉन्डिंग ड्रिलः 40 मिनट तक बिना स्क्रीन लोगों से जुड़कर विचार साझा करते हैं लोग सोशल फिटनेस के लिए यूरोप और अमेरिका में अनजान लोगों के साथ 40 मिनट के मानवीय बॉन्डिंग ड्रिल के सेशन होते हैं। इसमें बिना मोबाइल स्क्रीन के लोगों से जुड़ना, हंसना, सुनना, विचार साझा करना सिखाया जाता है। न्यूयॉर्क और लंदन से लेकर बेंगलुरु व मुंबई तक लोगों में बढ़ रहा सोशल फिटनेस का ट्रेंड न्यूयॉर्क, लंदन और बर्लिन जैसे शहरों में ‘पीपलहुड’ और ‘पीआरएक्स’ जैसे अनोखे स्टार्टअप्स खुल चुके हैं। यहां लोग वेट लिफ्टिंग करने नहीं, बल्कि ‘कनेक्शन वर्कआउट’ करने जाते हैं। भारत में भी अब बेंगलुरु, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में ‘कंवर्सेशन क्लब्स और बोर्ड गेम कैफे के जरिए यह ट्रेंड बढ़ रहा है। लोग अब ‘नेटवर्किंग’ के बजाय ‘कनेक्टिंग’ पर पैसा खर्च कर रहे हैं। सोशल फिटनेस की जरूरत क्यों ऑस्ट्रेलिया की एक स्टडी के मुताबिक,15 से 25 साल के 40% युवा अकेलापन महसूस करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय तक अकेले रहना सेहत के लिए उतना ही खतरनाक है जितना धूम्रपान करना या शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना। यही कारण है कि सोशल फिटनेस क्लब का चलन तेजी से बढ़ रहा है।



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