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कोस्टा रिका एक ऐसा देश जो आमतौर पर स्थिर राजनीति, सुंदर पहाड़ों और शांति के लिए जाना जाता है, पिछले दिनों असामान्य बेचैनी में डूबा था। वजह स्पष्ट थी, राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने लगे थे और थोड़ी ही देर में तय हो गया कि 39 वर्षीय लॉरा फर्नांदेज ने 58% मतों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। देश को सबसे युवा राष्ट्रपति नेतृत्व मिल चुका था। दिलचस्प यह कि इस जीत की कहानी सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि उस महिला की है, जिसने कई बार जीवन में अचानक नए मोड़ लेकर अपनी दिशा खुद तय की। लॉरा का बचपन एक छोटे स्कूल से शुरू होता है। शिक्षक पिता जब क्लास के बाद बच्चों के सवाल सुनते रहते, छोटी लॉरा उनके पास बैठीं सवालों को ध्यान से सुनतीं। यहीं से उन्हें पहले सुनने और फिर निर्णय लेने की पहली सीख मिली, जो आगे चलकर उनके प्रशासन की पहचान बनती है। कॉलेज में यह स्वभाव आवाज में बदल गया। 2014 में भ्रष्टाचार पर एक बहस में जब उन्होंने तीखी टिप्पणी की, तो मॉडरेटर ने माइक्रोफोन बंद कर दिया, लेकिन छात्रों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उन्हें दोबारा बोलने को मजबूर करवा दिया। यह पहली बार था जब लॉरा को महसूस हुआ कि उनकी आवाज दबने वाली नहीं है। 2016 में पहला चुनाव और 2019 में सामाजिक सुरक्षा मंत्री का पद किस्सों की तरह उतार-चढ़ाव से भरा था। मंत्री बनकर उन्होंने बिना औपचारिकता के तटीय इलाकों का गुप्त दौरा किया। पुलिस और मछुआरों की बात सुनी और उसी आधार पर नीतियां बदलीं। परिणामत: अपराध शिकायतों में 17% की गिरावट। तब उन्होंने सत्ता को पहली बार अपने हाथों में होना महसूस किया। आज लॉरा सिर्फ राष्ट्रपति नहीं, वह कहानी हैं, उस लड़की की जिसने स्कूल के बरामदे में सुनना सीखा, कैंपस में बोलना, तटों पर खतरा पहचाना, पहाड़ों में खुद को ताकत दी और फिर देश का जज्बा बदल दिया। समुद्र और पहाड़ से निकली नीति: लॉरा की ताकत का स्रोत 2020-2025 में तटीय क्षेत्रों में ड्रग-तस्करी और समुद्री गिरोह बढ़े, तो लॉरा ने वह नारा दिया जो बाद में राष्ट्रीय भावना बना, ‘समुद्र से सीमा तक अपराध-मुक्त कोस्टा रिका।’ लोग नहीं जानते कि यह नारा किसी राजनीतिक रणनीतिकार का नहीं, बल्कि उनके अपने समुद्री शोध का परिणाम था।
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