दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। शनिवार को पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) की सुनवाई के लिए जेल से कोर्ट पहुंची शालू के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि वह मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान देना चाहती है। वहीं, अभियोजन ने इसका विरोध किया। इसपर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। बयान की अनुमति मिले या न मिले लेकिन शालू की ओर से दी गई इस अर्जी ने पुलिस और सुब्रत दोनों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं। बयानों में अगर शालू अब तक की पुलिस की कार्रवाई को गलत बताती है तो सवाल उठना तय है कि फिर कारोबारी विनीत की हत्या किसने कराई।
बता दें कि कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित फ्लैट में पांच सितंबर को विनीत मिनोचा (65) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने विनीत की बहू शालू, उनके पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को जेल भेजा था। पिछले दिनों विवेचक ने जेल में बंद शालू और विशाल के बयान दर्ज किए थे। बयान के आधार पर विवेचक ने सीजेएम कोर्ट में दोनों 24 घंटे के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी दी थी। रिमांड के माध्यम से पुलिस फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बरामद कराने का प्रयास करेगी।
इसी सुनवाई के लिए जेल से तीनों आरोपियों को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान शालू के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि शालू के जिस बयान के आधार पर विवेचक पीसीआर मांग रहे हैं वह बयान शालू के हैं ही नहीं। नियमानुसार आरोपी के बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी होनी चाहिए लेकिन विवेचक ने ऐसा नहीं किया। इसलिए शालू कोर्ट को सच्चाई बताना चाहती है। इस पर अभियोजन अधिकारी ने कहा कि कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।