विराग गुप्ता का कॉलम:  सिस्टम की नाकामी के नजारे आज हर तरफ नजर आ रहे हैं
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विराग गुप्ता का कॉलम: सिस्टम की नाकामी के नजारे आज हर तरफ नजर आ रहे हैं

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5 घंटे पहले

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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील और 'डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत' के लेखक - Dainik Bhaskar

विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील और ‘डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत’ के लेखक

33 साल पुरानी वोहरा कमेटी रिपोर्ट के निष्कर्षों को दोहराते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि बिल्डर-माफिया और नौकरशाहों की सांठ-गांठ से हो रहे अवैध निर्माणों की वजह से चंडीगढ़ की सुखना झील सूख रही है। नोएडा स्पोर्ट्स सिटी के गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में भी एसआईटी जांच शुरू हो गई है।

गोवा के क्लब में अग्निकांड से 25 मौतों और स्वच्छतम शहर इंदौर में भी दूषित पानी से 25 मौतों के मामलों में हाईकोर्टों में सुनवाई हो रही है। ऐसे सभी मामलों में सिस्टम के गुनहगार साफ दिखने के बावजूद जांच समितियों के नाम पर बढ़ रही टालमटोल संस्कृति से लोग ऊब रहे हैं। इनमें निलम्बन, बर्खास्तगी और गिरफ्तारी से आगे बढ़कर इन 4 बिंदुओं पर कार्रवाई की जरूरत है :

1. स्मार्ट सिटी : दावोस के विश्व आर्थिक फोरम में ग्रेटर नोएडा में डेटा सेंटर की स्थापना के लिए यूपी सरकार ने 2.27 लाख करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। नोएडा के निकट 29650 करोड़ की लागत से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है। 2015 में 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 2.3 लाख करोड़ की योजना बनी थी। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

दंतेवाड़ा के अबूझमाड़ में बाढ़ से क्षतिग्रस्त 23 पुलियाओं की तत्काल मरम्मत के लिए फंड नहीं होने से 100 गांवों के एक लाख लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है। जीडीपी में 60% योगदान देने वाले इलाकों को कवर करने वाली नगर पालिकाएं 80% से ज्यादा खर्चों के लिए सरकारी मदद पर निर्भर हैं।

वेतन भुगतान, कचरा उठान, जल आपूर्ति और सड़कों के रख-रखाव के लिए पैसे नहीं हैं। नोएडा के हाईटेक एक्सपो में तकनीकी का ढोल पीटने के साथ ही आपदा प्रबंधन के मॉकड्रिल का भी दिखावा होता है। लेकिन हादसे के समय ड्रोन, गोताखोर, नाव, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित स्टाफ, एक्शन प्लान : सब नदारद थे।

2. भ्रष्टाचार : दिल्ली में कूड़े के तीन पहाड़ प्रदूषण के साथ ही राष्ट्रीय शर्मिंदगी का भी विषय हैं। दिल्ली नगर निगम का सालाना बजट 16530 करोड़ का है। लेकिन सीवर लाइन और नालों को ठीक करने के लिए 57 हजार करोड़ के बजट की मांग हो रही है। पार्षद निधि के बजट को दो करोड़ सालाना किया जा रहा है। मुम्बई में 70 हजार करोड़ से अधिक के बजट वाली बीएमसी पर कब्जे के लिए 5 स्टार होटल में पार्षदों की मौज हो रही है। नेताओं-अफसरों के पास पानी, सफाई, सीवर लाइन के लिए विजन, प्रयास और इच्छाशक्ति- सभी का अभाव मालूम होता है।

3. ऑडिट : इंदौर में दूषित जल के खतरों के बारे में सीएजी ने 2019 में ही आगाह किया था। उसी तरह नोएडा स्पोर्ट्स सिटी के घोटाले के बारे में सीएजी की 2021 की रिपोर्ट में विवरण है। नेताओं और बिल्डरों की मिलीभगत से कई टुकड़ों में प्लॉटों को बांटने की वजह से सरकार को 9 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। नोएडा में बिल्डर और बैंक माफिया की मिलीभगत और प्राधिकरण के अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कई आदेश पारित किए हैं। सीएजी की रिपोर्ट पर नौकरशाही की चुप्पी अब पांच साल पुरानी हो गई है। दूसरी तरफ छुटभैये मामलों में पुलिस ने 5 बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। नोएडा प्राधिकरण को हादसे वाले भूखंड के स्वामित्व की जानकारी तक नहीं है!

4. जवाबदेही : विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार दिल्ली में बीते दो सालों में सीवर और नालों में डूबने से 89 लोगों की जानें गई हैं। लेकिन नोएडा मामले में सरगर्मी इसलिए बढ़ी, क्योंकि पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ और एयरफोर्स समेत कोई भी एजेंसी ढाई घंटे तक उस युवक को बचा नहीं सकी। अफसरों की जवाबदेही के लिए केंद्र सरकार मासिक स्कोर बोर्ड का नया सिस्टम ला रही है। भारत में अगले महीने एआई का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है। ऐसे में सरकार को फैसला लेना चाहिए कि भविष्य में किसी भी हादसे के बाद नई जांच समिति के गठन के बजाय एआई के माध्यम से पुराने आयोगों और समितियों की रिपोर्ट हासिल की जाएगी। इससे लंबित काम और शिकायतों का पता चलने के साथ ही अफसरों की त्वरित जवाबदेही भी फिक्स हो सकेगी।

नोएडा के हाईटेक एक्सपो में तकनीकी का ढोल पीटने के साथ ही आपदा प्रबंधन के मॉकड्रिल का भी दिखावा होता है। लेकिन हादसे के समय ड्रोन, गोताखोर, नाव, लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित स्टाफ, एक्शन प्लान : सब नदारद थे। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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