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अगर शॉपिंग मॉल या व्यस्त बाजारों में आपका भारी भरकम शॉपिंग बैग उठाने या कार तक पहुंचाने के लिए असिस्टेंट मिल जाए तो कैसा रहेगा। दिल्ली के एक स्टार्टअप ने ग्राहकों की इस बड़ी परेशानी को भांपते हुए बिजनेस मॉडल बना लिया है। जैसे फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और एप बेस्ड वॉलेट सर्विसेज ने रोजमर्रा की परेशानियों को बिजनेस मॉडल में बदला, उसी तरह कैरीमैन नाम के स्टार्टअप ने भी थकाऊ शॉपिंग को एक नए सर्विस सेक्टर में बदल दिया है। वेबसाइट के अनुसार 30 मिनट का पैकेज 79 रुपए, एक घंटे का 119 और दो घंटे का पैकेज 219 रुपए से शुरू होता है। लंबे समय के पैकेज भी उपलब्ध हैं। फिलहाल ये सेवा दिल्ली तक सीमित है लेकिन बाद में अन्य शहरों में शुरू हो सकती है। यह दिखाता है कि स्टार्टअप की दुनिया में बड़ा आइडिया हमेशा हाई-टेक नहीं होता, कभी-कभी भीड़भाड़ वाले बाजार में थके हुए खरीदार का शॉपिंग बैग भी बिजनेस आइडिया दे सकता है। दुनिया के कुछ देशों में इससे मिलती-जुलती सेवाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका फोकस थोड़ा अलग रहा है। भारत में भी कुछ पर्सनल शॉपर या वीडियो शॉपिंग सेवाएं मौजूद हैं। उदाहरण के लिए शॉपिन और ई-स्काउट सर्विसेज जैसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों के लिए बाजार से सामान खरीदने, वीडियो कॉल के जरिए शॉपिंग कराने या इंटरनेशनल डिलीवरी जैसी सेवाएं देते हैं। छाता, मोबाइल चार्जिंग, फोल्डिंग कुर्सी भी इस सेवा की शुरुआत सिर्फ बैग उठाने तक सीमित नहीं है। कंपनी बुजुर्गों के लिए पोर्टेबल फोल्डिंग चेयर, बारिश और धूप के लिए छाते, मोबाइल चार्जिंग सपोर्ट, पावर बैंक और बच्चों के लिए स्ट्रोलर जैसी सुविधाएं भी दे रही है। यही वजह है कि यह सर्विस महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, परिवारों और लंबे समय तक खरीदारी करने वाले ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कई अन्य देशों में भी हैं इससे मिलती-जुलती सेवाएं ब्रिटेन की वी कैरीबैग्स नाम की कंपनी भी ग्राहकों के बैग स्टोर से घर या होटल तक पहुंचा देती है। लेकिन वहां फोकस बैग डिलीवरी पर है। इसी तरह ड्रॉपिंग की हैंड्स फ्री सेवा के तहत यूरोप और यूके के मॉल्स में ग्राहक खरीदारी के बाद सामान छोड़ देते हैं और बाद में डिलीवरी पा लेते हैं। लेकिन कैरीमैन की खास बात यह है कि यह ऑन-ग्राउंड फिजिकल असिस्टेंस दे रहा है।
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