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सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी की दिवालिया याचिका मंजूर: चीनी फाउंडर को उम्रकैद; कंपनी पर ₹28 लाख करोड़ का कर्ज था

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11 घंटे पहले

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चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी 'एवरग्रैंड' के संस्थापक हुई का यान को धोखाधड़ी समेत कई संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।  - Dainik Bhaskar

चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी ‘एवरग्रैंड’ के संस्थापक हुई का यान को धोखाधड़ी समेत कई संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

2018 में ब्रांड वैल्यू के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बनी चीन की एवरग्रैंड की दिवालिया याचिका कोर्ट ने मंजूर कर ली है। इससे पहले गुरुवार को धोखाधड़ी के मामले में कंपनी के फाउंडर हुई का यान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कंपनी पर करीब ₹28 लाख करोड़ का कर्ज था।

चीन के गुआंगडोंग प्रांत के शैनजेन की इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट में खड़े चाइना एवरग्रैंड ग्रुप के संस्थापक हुई का यान (फोटो: शैनजेन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट, 20 अगस्त 2026)

चीन के गुआंगडोंग प्रांत के शैनजेन की इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट में खड़े चाइना एवरग्रैंड ग्रुप के संस्थापक हुई का यान (फोटो: शैनजेन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट, 20 अगस्त 2026)

गरीब घर का लड़का बना देश का सबसे अमीर शख्स

एवरग्रैंड के फाउंडर हुई का यान की कहानी गांव के एक गरीब लड़के के शहरी सपनों का सौदागर बनकर चीन का सबसे अमीर आदमी बनने की है। उसने ‘एवरग्रैंड’ नाम का एक ऐसा विशाल साम्राज्य खड़ा किया, जो गगनचुंबी इमारतें बनाता था, फुटबॉल क्लब खरीदता था।

मॉडल सरल था- जमीन खरीदो, नींव डलने से पहले ही कागजों पर पूरे फ्लैट बेच दो और ग्राहकों से मिले उस एडवांस पैसे से अगला प्रोजेक्ट शुरू कर दो। लेकिन ताश के पत्तों से बने इस महल की बुनियाद बेतहाशा कर्ज पर टिकी थी। जब सरकार ने कर्ज के नल बंद किए, तो साम्राज्य भरभराकर ढह गया।

280 शहरों में फैले 1,300 अधूरे प्रोजेक्ट्स और 300 अरब डॉलर यानी करीब ₹28 लाख करोड़ के कर्जों का पहाड़ छोड़कर एवरग्रैंड आखिरकार इतिहास के पन्नों में दफन हो गया। संस्थापक हुई का यान को अदालत ने वित्तीय धोखाधड़ी में उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया और अगले ही दिन गुआंगडोंग की अदालत ने कंपनी को पूरी तरह बंद करने के आदेश पर मुहर लगा दी।।

समझिए चीन के इस सबसे बड़े एस्टेट क्रैश से जुड़े 10 जरूरी सवाल-जवाब:

सवाल 1. कोर्ट ने एवरग्रैंड के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की याचिका क्यों स्वीकार की?

जवाब: गुआंगझू की अदालत ने गुआंगझू रूरल कॉमर्शियल बैंक की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि कंपनी करंज चुकाने में पूरी तरह असमर्थ है और उसकी कुल संपत्ति देनदारियों की तुलना में बहुत कम है। इसके साथ ही कंपनी को पूरी तरह बंद करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई।

सवाल 2. एवरग्रैंड के संस्थापक हुई का यान और कंपनी पर क्या-क्या कार्रवाई हुई है?

जवाब: 66 साल के हुई का यान को धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ियों में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा दी गई है। उनके सभी राजनीतिक अधिकार छीन लिए गए हैं और पूरी निजी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा शैनजेन कोर्ट ने पेरेंट कंपनी चाइना एवरग्रैंड पर 8.82 अरब युआन और हेंगडा रियल एस्टेट पर 7 अरब युआन का भारी जुर्माना भी लगाया है।

सवाल 3. हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज (HKEX) से डीलिस्ट होने का क्या मतलब है?

जवाब: लगातार 18 महीनों तक ट्रेडिंग निलंबित रहने के बाद 25 अगस्त 2025 को एवरग्रैंड के शेयरों को हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिया गया था। डीलिस्टिंग का मतलब है कि एक पब्लिक ट्रेडेड कंपनी के रूप में एवरग्रैंड का अस्तित्व अब खत्म हो चुका है। कभी दुनिया की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी रही एवरग्रैंड के शेयरों की वैल्यू अब लगभग शून्य हो गई है।

सवाल 4. एवरग्रैंड कितनी बड़ी कंपनी थी और इसकी तरक्सी कैसे हुई?

जवाब: एवरग्रैंड चीन के शहरीकरण की लहर पर सवार होकर बड़ी बनी थी। चीन में शहरी आबादी 1980 के 20% से बढ़कर आज 66% तक पहुंच गई है। एवरग्रैंड ने “कर्ज लो, जमीन खरीदो, एडवांस बुकिंग में फ्लैट बेचो और उसी पैसे से अगला प्रोजेक्ट शुरू करो” का मॉडल अपनाया।

ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में एवरग्रैंड ब्रांड वैल्यू में दुनिया की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बनी थी। तब कंपनी की ब्रांड वैल्यू पिछले साल के मुकाबले 118% बढ़ी थी। ये दोगुनी से भी ज्यादा होकर 16.2 बिलियन डॉलर पहुंच गई थी।

चीन के नानतोंग में कंट्री गार्डन के 'टेन माइल बे' प्रोजेक्ट के सेल्स ऑफिस में रखा एक मॉडल (फोटो: 19 अगस्त 2023)

चीन के नानतोंग में कंट्री गार्डन के ‘टेन माइल बे’ प्रोजेक्ट के सेल्स ऑफिस में रखा एक मॉडल (फोटो: 19 अगस्त 2023)

सवाल 5. इस दिग्गज कंपनी के पतन की असली शुरुआत कैसे हुई?

जवाब: पतन की मुख्य वजह चीनी सरकार की ‘थ्री रेड लाइन्स’ पॉलिसी थी, जो 2020 में ज्यादा कर्ज लेने वाले डेवलपर्स को रोकने के लिए लाई गई थी। इससे एवरग्रैंड को मिलने वाला सस्ता कर्ज बंद हो गया। कंपनी केवल नए फ्लैट्स के एडवांस पैसों के भरोसे काम कर रही थी। जैसे ही कर्ज मिलना बंद हुआ और घरों की बिक्री घटी, कंपनी का पूरा कैश फ्लो ठप हो गया।

सवाल 6. एवरग्रैंड पर कितना कर्ज है और वसूली की क्या स्थिति है?

जवाब: ब्लूमबर्ग के अनुसार 2025 में एवरग्रैंड पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज था। लिक्विडेशन की जिम्मेदारी संभाल रही फर्म अल्वारेंज एंड मार्सल ने 18 महीनों में करीब 255 मिलियन डॉलर के एसेट बेचे थे, जबकि लेनदारों ने 45 बिलियन डॉलर (₹3.75 लाख करोड़) के दावे पेश किए गए थे।

सवाल 7. क्या एवरग्रैंड के डूबने से आम लोगों के मकान अधर में लटक गए हैं?

जवाब: हां। जब कंपनी डूबी, तब चीन के 280 शहरों में इसके 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स अधूरे पड़े थे। हालांकि चीनी सरकार ने विदेशी कर्जदाताओं के बजाय अपने स्थानीय नागरिकों के हितों को प्राथमिकता दी है और बिल्डरों को केवल वही अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरे करने के निर्देश दिए हैं।

सवाल 8. क्या एवरग्रैंड की तुलना 2008 के अमरीकी ‘लेहमन ब्रदर्स’ संकट से की जा सकती है?

जवाब: विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ‘चीन का लेहमन मोमेंट’ नहीं है। 2008 में लेहमन ब्रदर्स के डूबने से पूरे वैश्विक बैंकिंग सिस्टम में भूचाल आ गया था, क्योंकि उसका कर्ज अंतरराष्ट्रीय बैंकों से जुड़ा था। इसके विपरीत एवरग्रैंड के संकट को चीनी सरकार ने बहुत धीरे-धीरे और नियंत्रण में रखकर संभाला है, जिससे वैश्विक वित्तीय संकट टल गया और चीन का बैंकिंग सिस्टम स्थिर रहा।

सवाल 9. इस संकट का चीन की पूरी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?

जवाब: रियल एस्टेट चीन की जीडीपी का लगभग एक-चौथाई (25-30%) हिस्सा था। एवरग्रैंड के डूबने से कंस्ट्रक्शन सुस्त पड़ा, जिससे स्टील और सीमेंट की मांग गिर गई। स्थानीय सरकारों की जमीन बिक्री से होने वाली कमाई बंद हो गई। आम चीनियों का भरोसा भी टूट गया।

सवाल 10. इस पूरी कहानी से दुनिया और भारत के लिए क्या सबक है?

जवाब: यह मामला साबित करता है कि अत्यधिक कर्ज पर टिका ग्रोथ मॉडल कभी न कभी धराशायी होता है। चीन की कर्ज-संचालित एस्टेट ग्रोथ का दौर अब खत्म हो चुका है।

भारतीय रियल एस्टेट और रेगुलेटर्स जैसे RERA के लिए सबक है कि एस्क्रो अकाउंट और समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी के कड़े नियम कितने जरूरी हैं ताकि आम खरीदारों का पैसा सुरक्षित रहे।

नॉलेज बॉक्स – ‘थ्री रेड लाइन्स’ क्या थीं?:

  • लायबिलिटी रेशियो < 70% यानी कंपनी के पास जितनी संपत्ति है, उसका 70% से ज्यादा हिस्सा कर्ज का नहीं होना चाहिए। कम से कम 30% खुद का पैसा होना जरूरी है।
  • नेट डेट रेशियो < 100% यानी कंपनी पर कुल जितना कर्ज है, वह उसकी वैल्यू से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर वैल्यू ₹100 है, तो वह ₹100 से ज्यादा का नेट कर्ज नहीं रख सकती।
  • कैश-टू-शॉर्ट टर्म डेट > 1 यानी अगले 1 साल के अंदर जो कर्ज चुकाना है, उसे भरने के लिए कंपनी के बैंक खाते में कम से कम उतना ही कैश मौजूद होना चाहिए। यानी अगर 1 साल में 100 रुपए लौटाने हैं, तो हाथ में 100 रुपए या उससे ज्यादा कैश होना जरूरी था।

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