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- Pension Benefit Card Scam; Fake Ad Prevention Guide | FD Interest Airport Access Fraud
12 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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इन दिनों एक नया फ्रॉड चल रहा है। इसमें साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ का फर्जी एड दिखाकर रिटायर्ड कर्मचारियों और पेंशनर्स को निशाना बना रहे हैं।
वे दावा कर रहे हैं कि सभी पेंशनर्स के लिए यह कार्ड बनवाना जरूरी है। इसके साथ ही हेल्थ बेनिफिट, FD पर 9.2% ब्याज और अनलिमिटेड एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसे फायदों का झांसा दे रहे हैं।
हाल ही में गह मंत्रालय और ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) ने ऐसे फर्जी पोस्ट और विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दी है।
इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ के नाम पर होने वाले इस स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- स्कैमर्स पेंशनर्स को कैसे ठगते हैं?
- अपने माता-पिता और बुजुर्गों को इस स्कैम से कैसे बचाएं?
एक्सपर्ट– राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- पेंशन बेनिफिट कार्ड के नाम पर चल रहा फ्रॉड क्या है?
जवाब- यह एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग सोशल मीडिया पर ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ का फर्जी पोस्ट या विज्ञापन दिखाते हैं। वे कार्ड के फायदों का झांसा देकर पेंशनर्स को फर्जी लिंक पर क्लिक करने, फॉर्म भरने या पर्सनल डिटेल्स शेयर करने को उकसाते हैं। ठग इसके जरिए फ्रॉड को अंजाम देते हैं।
सवाल- ठग इस कार्ड से कौन-से फायदे देने का दावा कर रहे हैं?
जवाब- ठग पेंशनर्स को फंसाने के लिए कार्ड के साथ कई अलग-अलग तरह के फायदे देने का दावा कर रहे हैं, जैसेकि-
- एफडी पर 9.2% तक ब्याज।
- अनलिमिटेड एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस।
- दवाइयों और मेडिकल खर्च पर छूट।
- ट्रेन और फ्लाइट टिकट पर डिस्काउंट।
- फ्यूल भराने पर छूट।
- इमरजेंसी के लिए लोन सुविधा।
- लाइफटाइम फ्री कार्ड और नो जॉइनिंग फीस।
सवाल- ठग पेंशनर्स को ही क्यों निशाना बना रहे हैं?
जवाब- इसके पीछे कई वजहें हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- पेंशनर्स के खाते से रेगुलर ट्रांजैक्शन होता है। ऐसे में ठग उन्हें फाइनेंशियल बेनिफिट के झांसे में फंसाते हैं।
- ठग पेंशन रुकने, डॉक्यूमेंट्स अपडेट न होने या सरकारी लाभ छूटने की बात कहकर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाते हैं।
- पेंशनर्स अक्सर सरकारी योजनाओं और पेंशन से जुड़े मैसेजेस या कॉल पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
- इसकी वजह ये है कि कुछ पेंशनर्स डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड के प्रति कम जागरूक होते हैं।
सवाल- ठगों को पेंशनर्स के बारे में कौन-सी जानकारी पहले से मिल सकती है?
जवाब- ठग अलग-अलग सोर्सेस से पेंशनर्स की बेसिक जानकारी जुटाकर उसका इस्तेमाल फर्जी कॉल, मैसेज या लिंक भेजने के लिए करते हैं। ठगों के पास पेंशनर्स की ये जानकारी पहले से मौजूद हो सकती है-
- नाम, उम्र और मोबाइल नंबर।
- रिटायरमेंट से जुड़ी डिटेल्स।
- पेंशन से जुड़ी बेसिक डिटेल्स।
- सोशल मीडिया प्रोफाइल।
- लीक हुए डेटा से मिली डिटेल्स।
सवाल- स्कैमर्स पेंशनर्स को कैसे ठगते हैं? सिलसिलेवार ढंग से पूरा समझाएं?
जवाब- साइबर ठग आमतौर पर पेंशनर्स को भरोसे में लेकर फ्रॉड को अंजाम देते हैं। स्कैम का पूरा खेल ग्राफिक से समझिए-

सवाल- फोन या वॉट्सएप पर ऐसे कौन-से खतरे के संकेत हैं, जिनसे हर किसी को सावधान और जागरूक रहना चाहिए?
जवाब- चाहे पेंशन फ्रॉड हो या और किसी भी तरह का साइबर फ्रॉड, ठगों के व्यवहार में एक चीज हमेशा कॉमन होगी। वे लालच देंगे, डर दिखाएंगे और दबाव डालेंगे। अगर आप इन संकेतों को समझते हैं और इनसे सावधान रहते हैं तो आप ठगों के जाल में नहीं फंसेंगे। खतरे के सभी संकेत नीचे ग्राफिक में देखिए-
फोन या वॉट्सएप पर दबाव, डर या लालच वाले मैसेज/कॉल को खतरे का संकेत मानें। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सरकारी योजना और उसके नाम पर चल रहे फर्जी ऑफर में अंतर कैसे पहचानें?
जवाब- मुख्य बात ये है कि सरकारी योजना की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर होगी। वहीं फर्जी ऑफर की जानकारी सोशल मीडिया, ई-मेल, फोन और वॉट्सएप, कहीं भी आ जाएगी। इसके अलावा कुछ और सॉलिड संकेत हैं, जिनसे साफ समझ में आता है कि ऑफर असली है या फर्जी। दोनों के बीच का अंतर नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किसी भी सरकारी योजना की सही जानकारी कैसे हासिल करें?
जवाब- इसके लिए सोशल मीडिया पोस्ट या फॉरवर्ड मैसेज पर भरोसा करने की बजाय इन तरीकों से पुष्टि करें-
- संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
- योजना का नाम सरकारी पोर्टल पर सर्च करके उसकी पात्रता और नियम जांचें।
- सरकारी विभाग की आधिकारिक हेल्पलाइन से जानकारी लें।
- किसी योजना के लिए आवेदन करने से पहले देखें कि वेबसाइट का डोमेन और जानकारी सही है।
- किसी अनजान व्यक्ति के बताए नंबर, लिंक या एप के जरिए आवेदन न करें।

सवाल- सरकारी वेबसाइट की पहचान कैसे करें?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-
- वेबसाइट डोमेन ध्यान से देखें। सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों में आमतौर पर .gov.in या .nic.in डोमेन होता है।
- वेबसाइट पर संबंधित सरकारी विभाग/मंत्रालय का नाम और आधिकारिक जानकारी दी होती है।
- वेबसाइट का URL स्पष्ट और सही होता है। उसमें अनावश्यक शब्द या अजीब स्पेलिंग नहीं होती।
- वेबसाइट पर आधिकारिक कॉन्टैक्ट डिटेल्स और विभाग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है।
सवाल- अगर पेंशनर ने गलती से OTP बता दिया तो तुरंत क्या करें?
जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं। पैसे और डिटेल्स की सुरक्षा के लिए तुरंत ये कदम उठाएं-

सवाल- अगर बैंक खाते से पैसा निकल गया है तो पहला कदम क्या होना चाहिए?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- सबसे पहले तुरंत अपने बैंक को सूचना दें।
- अकाउंट/डेबिट कार्ड/UPI को अस्थाई तौर पर ब्लॉक कराएं।
- साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फ्रॉड की शिकायत करें, ताकि ट्रांजैक्शन को रोकने या रकम फ्रीज कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके।
सवाल- अगर पैसा नहीं गया, लेकिन ठगी की कोशिश हुई तो क्या करें?
जवाब- इसे नजरअंदाज न करें। संदिग्ध नंबर, मैसेज, लिंक या एप की डिटेल्स सुरक्षित रखें, उसे ब्लॉक करें। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। अगर बैंक या कार्ड की डिटेल्स शेयर किया है तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचना दें।
सवाल- बच्चे अपने माता-पिता/बुजुर्गों को इस तरह के स्कैम से कैसे बचा सकते हैं?
जवाब- अपने माता-पिता या बुजुर्गों को स्कैम के प्रति जागरूक करें। उन्हें समझाएं कि किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। इसके लिए उन्हें ये जरूरी बातें सिखाएं-समझाएं-

सवाल- ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत कहां दर्ज करें?
जवाब- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं। फाइनेंशियल फ्रॉड हुआ है तो तुरंत 1930 पर भी कॉल करें।
सवाल- साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करते समय कौन-सी जानकारी तैयार रखनी चाहिए?
जवाब- शिकायत दर्ज करने से पहले फ्रॉड से जुड़ी जरूरी जानकारी और सबूत अपने पास रखें, जैसेकि-
- शिकायतकर्ता का नाम और मोबाइल नंबर।
- घटना की तारीख और समय।
- ठगी में इस्तेमाल हुआ मोबाइल नंबर/वॉट्सएप नंबर।
- संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या सोशल मीडिया प्रोफाइल की डिटेल्स।
- ठगी से जुड़े स्क्रीनशॉट, चैट और कॉल डिटेल्स।
- बैंक/UPI ट्रांजैक्शन की डिटेल्स।
- ट्रांजैक्शन ID/UTR नंबर।
- बैंक खाते/UPI से जुड़ी डिटेल्स।
- संदिग्ध व्यक्ति ने जो नाम या पहचान बताई हो।
ध्यान रखें: सबूतों को डिलीट न करें और ओरिजनल चैट/मैसेज सुरक्षित रखें।
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ग्राफिक्स- अजीत सिंह
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