5 घंटे पहले
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- किताबों से जानिए, कमजोरी दिखाना क्यों कमजोरी नहीं कहलाता है? आखिर क्यों लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती?
कमजोरी दिखाना भी साहस का प्रमाण है कमजोरी दिखाना कमजोरी नहीं कहलाता है, यह तो साहस का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब हम अपने डर, असुरक्षा और अपूर्णताओं को स्वीकारते हैं, तभी मजबूत बनते हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि खुद को बचाने के लिए भावनाएं छुपाना जरूरी होता है, लेकिन असल में खुलकर जीना ही रिश्तों और जीवन, दोनों को गहराई दे सकता है। (डेयरिंग ग्रेटली)
मजबूत इरादे हैं तो हर दरवाजा खोल सकते हैं मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका डर है और सबसे बड़ा मित्र उसका आत्मविश्वास। जब तक हम अपने डर को नहीं जीतते, तब तक अपनी क्षमताओं को नहीं पहचान सकते। हर असफलता याद दिलाती है कि हमने प्रयास किया। जीवन में जीतता वही है, जो हार कर भी मुस्कराता है और दोबारा खड़ा हो जाता है। बस इरादे मजबूत हों। (मन के मोती)
सफलता का रहस्य कभी न रुकने में है किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती। निरंतर प्रयास और धैर्य जरूरी है। लोग शुरुआत में तेजी से आगे बढ़ते हैं, लेकिन जल्दी हार मान लेते हैं। जो कठिनाइयों के बावजूद लगातार छोटे कदम उठाता है, वह मंजिल तक पहुंचता है। जुनून रास्ता दिखाता है, धैर्य उस रास्ते पर टिकाए रखता है। बस रुकें नहीं, चलते रहें। (ग्रिट- द पावर ऑफ पैशन)
अपने काम में हमेशा एक मकसद की तलाश करें लोग केवल पुरस्कार से प्रेरित नहीं होते। उनका उत्साह तब जागता है जब वे अपने काम में कोई उद्देश्य देखते हैं। यदि हम किसी कार्य को केवल वेतन या लाभ के लिए करते हैं, तो प्रेरणा क्षणिक होती है। लेकिन जब हम महसूस करते हैं कि हमारा प्रयास किसी बड़े मकसद से जुड़ा है, तब काम आनंद में बदल जाता है। आत्मनिर्भरता, निपुणता और उद्देश्य प्रेरणा देते हैं। जब व्यक्ति को निर्णय लेने की स्वतंत्रता और सुधार करने का अवसर मिलता है, तो उसकी क्षमता दोगुनी हो जाती है।(ड्राइव द सरप्राइजिंग ट्रुथ)








