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किताबों से जानिए, कैसे दूसरों की बातों को व्यक्तिगत रूप से लेना बंद करें? हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देना तय करें
अपने शब्दों को साफ और सच्चा रखें। जो आप कहते हैं, उसका असर केवल दूसरों पर ही नहीं, काफी हद तक आप पर भी पड़ता है। दूसरों की बातों को व्यक्तिगत रूप से लेना बंद करें, क्योंकि लोग जो कहते हैं, वह उनके अपने अनुभवों का प्रतिबिंब होता है। हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें, यही आपको शांति और संतुलन की ओर ले जा सकता है। (द फोर एग्रीमेंट्स -डॉन मिगुएल रुइज) याद रखें, कोई भावना हमेशा के लिए नहीं रहती
कभी-कभी जीवन इतना भारी लगने लगता है कि कुछ भी ठीक होता हुआ दिखाई नहीं देता। ऐसे समय में यह याद रखना जरूरी है कि कोई भावना हमेशा के लिए नहीं रहती। दर्द, चिंता और उदासी… ये सब लहरों की तरह आते-जाते हैं। आप टूट नहीं रहे, आप बस एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। खुद के प्रति थोड़ा नरम रहें। धीरे-धीरे समय के साथ, चीजें फिर से हल्की होने लगती हैं। (द कंफर्ट बुक -मैट हेग) छोटे कदम ही आपको लक्ष्य के करीब ले जाएंगे
हर दिन प्रेरणा का इंतजार करना जरूरी नहीं है। असली काम तो तब होता है जब आप बिना प्रेरणा के ही जीवन में आगे बढ़ना तय करते हैं। छोटे-छोटे कदम, चाहे वे कितने ही मामूली क्यों न लगें, आपको आपके लक्ष्य के करीब ले जाते हैं। रचनात्मकता कोई एक बड़ा क्षण नहीं है, लगातार किए गए छोटे प्रयासों का परिणाम है। जब आप रुकते नहीं, तब रास्ते बनते चले जाते हैं। (कीप गोइंग -ऑस्टिन क्लिऑन) अहम यह है कि जो भी काम करें, पूरे मन से करें
असाधारण बनने के लिए आपको कुछ अलग करने की जरूरत नहीं। जो भी करें, उसे पूरे मन से करना होता है। साधारण काम भी खास बन जाते हैं, जब आप उनमें दिल और समर्पण जोड़ते हैं। फर्क इस बात से नहीं पड़ता कि आपका काम क्या है, बल्कि इस बात से पड़ता है कि आप उसे कैसे करते हैं। हर दिन आपके पास एक मौका होता है, साधारण को असाधारण बनाने का। (द फ्रेड फैक्टर -मार्क सैनबॉर्न)
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