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किताबों से जानिए, कैसे वर्तमान को टालना हमारे लिए घोर नुकसानदायक है? आराम और पुनर्निर्माण के दौर को कैसे पहचाना जाए? भविष्य के डर में वर्तमान को न टालें
कम लोग यह सोचते हैं कि जीवन जीने का अर्थ क्या है। हर उम्र की अपनी क्षमता होती है। जो अनुभव आज हो सकते हैं, वे कल संभव नहीं रहेंगे। भविष्य के डर में वर्तमान को टालना हमें भीतर से गरीब बनाता है। जीवन का मूल्य इससे तय नहीं होता कि अंत में क्या बचा, इससे होता है कि रास्ते में क्या जिया गया। (डाय विथ जीरो -बिल पर्किन्स) बहुत व्यस्त होना उत्पादक होना नहीं है
हम सभी लगातार व्यस्त रहने और ज्यादा उत्पादक बनने की दौड़ में हैं। ध्यान रहे, बहुत व्यस्त होना उत्पादक होना नहीं है। समय को सिर्फ काम और लक्ष्य पूरा करने के लिहाज से मापना हमें हमारी खुशी से अलग करता है। इससे हमारी मानवीय जरूरतें- जैसे मजबूत रिश्ते, आराम, मौन समय और आनंद पीछे छूट जाते हैं। (डु नथिंग -सेलेस्टे हेडली) कुछ समय रुकना पीछे जाना नहीं होता
जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब सब कुछ धीमा पड़ जाता है। ऊर्जा कम हो जाती है, मन भारी लगता है, आगे का रास्ता साफ नहीं दिखता। इसे हम कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि ये आराम और पुनर्निर्माण के दौर होते हैं। जब आप जीवन के ऐसे फेज को स्वीकार करते हैं, तब गिल्ट कम होता है। कुछ देर रुकना पीछे जाना नहीं है। (विंटरिंग -कैथरीन में) आराम के दायरे से बाहर निकलना स्वयं से मिलने जैसा है
जब जीवन बहुत आरामदायक हो जाता है, तब मन धीरे-धीरे सुस्त पड़ने लगता है। हर सुविधा के साथ हमारी सहनशीलता भी धीरे-धीरे कम होती जाती है। कठिनाई से बचना स्वाभाविक लगने लगता है, लेकिन असल में कठिनाई ही आपकी भीतर छिपी शक्ति को बाहर लेकर आती है। जब शरीर थोड़ा असहज होता है, तब मन जागता है। सीमाओं को छूना डरावना हो सकता है, पर वहीं आत्मविश्वास जन्म लेता है। आराम से बाहर निकलना स्वयं से मिलने जैसा है। (द कंफर्ट क्राइसिस -माइकल ईस्टर)
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