19 घंटे पहलेलेखक: रेणु रखेजा
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40 के बाद कई लोग एसिडिटी की शिकायत करने लगते हैं। देर से डिनर करना, लगातार बैठना, कमर पर वजन बढ़ना और रात की ‘चाय-बिस्किट’ जैसी आदतें इसे और बढ़ा देती हैं। उम्र के साथ पेट से खाना खाली होने की गति धीमी होती है। इसका हल दवाइयों से पहले रोजमर्रा की आदतों में छिपा है। आइए जानते हैं इनके बारे में…
क्यों बढ़ता है एसिड रिफ्लक्स?
धीमी पाचन गति: उम्र और तनाव से खाना पेट में ज्यादा देर रहता है।
रात का हैवी खाना: नाश्ता छोड़कर डिनर भरपूर करने से पेट पर दबाव बढ़ता है।
कमर पर दबाव: बढ़ा हुआ पेट और टाइट बेल्ट एसिड को ऊपर की ओर धकेलते हैं।
सोने से पहले के 3 सुधार
- डिनर सोने से कम-से-कम 3 घंटे पहले करें। देर रात भूख लगे तो दही के साथ भुना चना या खीरे के साथ पनीर लें, चाय-बिस्किट नहीं।
- बिस्तर का सिरा 10–15 सेमी ऊंचा करें। बेडपोस्ट के नीचे ईंट या किताब रखें। सिर्फ तकिया लगाने से फायदा नहीं होता।
- बाईं करवट सोएं। इस पोजिशन से पेट का एसिड ऊपर जाने से रुकता है।

प्लेट में ये छोटे बदलाव करें
- पहले प्रोटीन, फिर कार्ब: अंडा, पनीर या दाल से खाना शुरू करें, फिर सब्जी और उसके बाद चावल/रोटी लें।
- फ्लेयर-अप में बचें: कच्चा प्याज, सिरका, साइट्रस और अचार। बाद में दोबारा टेस्ट कर सकते हैं।
- स्मार्ट स्वैप करें: बिस्किट की जगह भुना चना/मूंगफली, तैलीय खाने के बाद जीरा-अजवाइन वाला गरम पानी, पूड़ी/पराठे के साथ सलाद।
- पोर्टियन और स्पीड कंट्रोल करें: छोटी प्लेट लें, धीरे-धीरे खाएं और “बस संतुष्ट” पर रुकें।
7 दिन का छोटा रीसेट
दिन 1–2: जल्दी डिनर, बाईं करवट सोना, बेड ऊंचा करना।
दिन 3–4: प्रोटीन से शुरुआत करें, लेट-नाइट चाय-बिस्किट की जगह दही या भुना चना लें।
दिन 5–7: हर भोजन के बाद 10 मिनट वॉक, अपने टॉप-2 ट्रिगर कॉम्बिनेशन हटाएं।
रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं।
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