हरिद्वार8 मिनट पहले
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सत्य निष्ठ रहें। सत्य सागर जैसा गहरा है, आसमान जितना ऊंचा है। सूर्य जैसा उसमें प्रकाश है और चंद्र जैसी शीतलता है। सत्य में सूर्य और चंद्र जैसा प्रकाश है, धरती जैसा धैर्य है, अंतरिक्ष जैसी सामर्थ्य है। सत्य ईश्वर का स्वाभाविक और साकार रूप है। भगवान सत्य में विराजते हैं। सत्य में जय है, सत्य मेव जयते। जीवन में सत्य को अपनाइए।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए सफलता पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
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