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पहले जेल में सिर्फ पुरुष और महिला वार्ड होते थे। ट्रांसजेंडर कैदियों को किस वार्ड में रखा जाए, ये बड़ी दिक्कत थी। अब उनके लिए अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल होगा, जहां वो अपनी पहचान के हिसाब से रह सकेंगे और अपनी पसंद के कपड़े भी पहन सकेंगे। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के हस्तक्षेप के बाद हैदराबाद सेंट्रल जेल में देश का पहला जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाया गया है। NHRC ने गुरुवार यह जानकारी दी। यह कदम 8 अक्टूबर को NHRC के विशेष मॉनिटर के जेल दौरे के बाद उठाया गया। विशेष मॉनिटर ट्रांसजेंडर लोगों और LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालते हैं। ट्रांस कैदिया के लिए गृह मंत्रालय की एडवाइजरी दिल्ली हाईकोर्ट सितंबर में जारी कर चुका आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने सितंबर 2026 में केंद्र और दिल्ली पुलिस से कहा था कि NHRC की मई 2026 वाली एडवाइजरी को मानकर ट्रांसजेंडर की गिरफ्तारी और हिरासत के लिए SOP बनाएं। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं के लिए नियम हैं, लेकिन ट्रांसजेंडर के लिए कोई नियम नहीं है। हैदराबाद अकेला नहीं, औरंगाबाद में भी काम शुरू छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) की हरसूल सेंट्रल जेल में अभी 16 ट्रांसजेंडर कैदी हैं। वहां उनके लिए अलग बैरक बनाने के लिए ₹12.12 करोड़ का टेंडर निकला है, साथ में 100 कैदियों की ओपन जेल भी बन रही है। यानी अब कई जेलें अलग बैरक की तरफ जा रही हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रांसजेंडर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस: सर्जरी से महिला बने व्यक्ति को महिला अधिकार देने पर सवाल; केंद्र ने 7 साल पहले कानून बनाया था क्या बायोलॉजिकल तौर पर पुरुष जन्मा व्यक्ति, सर्जरी करवाने के बाद महिला के लिए आरक्षित अधिकारों का दावा कर सकता है… इस सवाल को लेकर एक महिला संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका के मुताबिक, यह प्रावधान बायोलॉजिकल पुरुषों को सर्जरी के बाद सरकारी दस्तावेजों में खुद को ‘महिला’ के तौर पर दर्ज कराने की अनुमति देता है। याचिका में 2014 के NALSA जजमेंट पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है, जिसमें ट्रांसजेंडर लोगों को अपनी जेंडर पहचान की कानूनी मान्यता का अधिकार दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर…
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