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खूबसूरत दिखने की होड़ में हॉलीवुड में बोटॉक्स और डर्मल फिलर का चलन तेजी से बढ़ा है। इसका असर अब फिल्मों में एक्टिंग पर दिखने लगा है। न्यूयॉर्क के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. डेविड ए. कोल्बर्ट के मुताबिक एक फिल्म डायरेक्टर ने उन्हें फोन कर कहा था कि उनके स्टार ने इतना फिलर करवा लिया है कि अब स्क्रीन पर इमोशन ही नहीं दिखा पा रहे। कोल्बर्ट ने नाम नहीं बताया, लेकिन उनका कहना है कि डायरेक्टर्स अब कलाकारों के चेहरों में नेचुरल मूवमेंट की कमी से जूझ रहे हैं। आज कई सेलिब्रिटीज महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह फूले हुए होंठ, खिंची त्वचा और स्थिर माथे को तरजीह दे रहे हैं। नतीजा यह कि स्क्रीन और स्ट्रीमिंग पर चेहरे बंधे हुए और अस्वाभाविक लगते हैं। डॉ. कोल्बर्ट कहते हैं, चेहरे का न हिलना अब एक तरह का स्टैंडर्ड बन रहा है, जो एक्टिंग के लिए खतरा है। उनके मुताबिक बेहतरीन परफॉर्मेंस अक्सर तब आते हैं जब कलाकार चेहरे को खुला छोड़ते हैं और परफेक्ट दिखने की चिंता नहीं करते। सुझाव – एक्सपर्ट कहते हैं परफेक्ट दिखने से ज्यादा चेहरे का स्वाभाविक रहना जरूरी है अब हॉलीवुड के पुरुष कलाकार निशाने पर यह दबाव सिर्फ अभिनेत्रियों तक सीमित नहीं है। अभिनेता बैरी क्योगन पर फिलर के आरोपों और भद्दे कमेंट्स के बाद उन्होंने पब्लिक लाइफ से दूरी बनानी शुरू की। वहीं रयान गोस्लिंग के उम्रहीन लुक को लेकर भी सोशल मीडिया पर अस्वाभाविक बनावट की आलोचना हुई। ट्रोलिंग से मेंटल हेल्थ पर असर कॉस्मेटिक बदलावों पर होने वाली ट्रोलिंग कलाकारों की मानसिक सेहत बिगाड़ रही है। महज 22 साल की ब्रिटिश अभिनेत्री मिली बॉबी ब्राउन इसका बड़ा उदाहरण हैं। एक प्रेस टूर के दौरान उनके फ्रीज एक्सप्रेशंस (चेहरे के हाव-भाव न बदलना) पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। रोल की सच्चाई के लिए बोटॉक्स से दूरी कुछ अभिनेत्रियां रोल की सच्चाई के लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट से दूरी बना रही हैं। केट हडसन ने 1980 के दशक की पृष्ठभूमि वाली फिल्म की शूटिंग के दौरान बोटॉक्स बंद किया। जेनिफर लॉरेंस ने कहा कि वह बोटॉक्स लेती हैं, लेकिन माथे पर फिलर नहीं करवाएंगी क्योंकि वह कैमरे पर साफ दिखता है। भारत में भी तेजी से बढ़ रहा बोटॉक्स-फिलर भारत में भी बोटॉक्स (झुर्रियां कम करने के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन) और डर्मल फिलर (चेहरे में वॉल्यूम व आकार देने वाला इंजेक्शन) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आईएसएपीएस के 2024 सर्वे के अनुसार देश में 76,720 बोटॉक्स और 97,160 फिलर प्रक्रियाएं दर्ज की गईं। एस्थेटिक प्रक्रियाएं वे उपचार हैं जो सौंदर्य या लुक बेहतर बनाने के लिए कराए जाते हैं।
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