रिटायरमेंट के लिए पहले से ज्यादा तैयार भारतीय:  50% शहरी बच्चों या पारिवारिक संपत्ति पर निर्भर नहीं; शारीरिक-मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार
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रिटायरमेंट के लिए पहले से ज्यादा तैयार भारतीय: 50% शहरी बच्चों या पारिवारिक संपत्ति पर निर्भर नहीं; शारीरिक-मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार

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गुरुग्राम में रहने वाले 65 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मी महेश सलूजा की तमन्ना ऋषिकेश जाकर रिवर राफ्टिंग करने की थी। उन्होंने बुजुर्गों के लिए यात्रा का प्रबंध करने वाली ट्रैवल एजेंसी से बुकिंग की। फंड की व्यवस्था अपने म्यूचुअल फंड से की। यात्रा में फिट रहने के लिए खासतौर पर फिटनेस और वेलनेस प्रोग्राम भी जॉइन किया। देश में रिटायरमेंट के बाद के जीवन को लेकर सोच तेजी से बदल रही है। जहां पहले यह जीवन का ‘अंतिम चरण’ माना जाता था, वहीं अब यह जीवन की ‘दूसरी पारी’ बनता जा रहा है। रिसर्च और डेटा बताते हैं कि आज अधिकतर लोग रिटायरमेंट लाइफ को लेकर पहले से ज्यादा तैयार हैं। ये तैयारी केवल वित्तीय नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक भी है। 5 वर्षों में रिटायरमेंट इंडेक्स 44 से 48 हुआ मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और कैंटा की ‘इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी’(आईआरआईएस 5.0) से पता चलता है कि शहरी भारत में रिटायरमेंट की तैयारी का इंडेक्स 2021 के मुकाबले 2025 के अंत तक (100 में से) 44 से बढ़कर 48 हो गया है। ये बेहतर, सतर्क तैयारी का संकेत देता है। रिपोर्ट के मुताबिक 50% शहरी भारतीय रिटायरमेंट के बाद बच्चों या पारिवारिक संपत्ति पर निर्भर नहीं हैं।
निवेश से मजबूत वित्तीय तैयारी
कॉरपोरेट वेल्थ स्ट्रैटेजिस्ट गिरीश सोडानी कहते हैं, ‘पहले रिटायरमेंट फंड का मतलब था पीएफ, ग्रेच्युटी और थोड़ी-बहुत बचत। लेकिन अब लोग म्यूचुअल फंड, रिटायरमेंट प्लान, एनपीएस, इक्विटी और रियल एस्टेट जैसे विविध निवेश विकल्प अपना रहे हैं।’ इंटरनेशनल जर्नल फॉर रिसर्च ट्रेंड्स एंड इनोवेशन में प्रकाशित एक सर्वे में 48.9% लोगों ने रिटायरमेंट प्लानिंग में वित्तीय सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। 72.3% लोग रिटायरमेंट फंड के लिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं। 57.4% ईपीएफ पर निर्भर हैं। 65% लोग 10 लाख से ज्यादा का हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे। आराम नहीं बल्कि एक्टिव रिटायरमेंट लाइफ रिटायरमेंट अब आराम नहीं बल्कि एक्टिव लाइफ का समय है। फिटनेस एक्सपर्ट विशाल वर्मा कहते हैं, ‘लोग 40–50 की उम्र से ही फिटनेस, डाइट, योग और हेल्थ चेकअप पर ध्यान दे रहे हैं। न्यूक्लियर फैमिली, बच्चों के बाहर बसने से बुजुर्गों का सपोर्ट सिस्टम घट गया है। वे बुढ़ापे में फिट रहना चाहते हैं।’ वर्ल्ड जर्नल ऑफ बायोलॉजी, फार्मेसी एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित एक सर्वे में देश के 60-69 आयु वर्ग के 96% लोगों ने कहा कि वे जिम जैसी प्रिवेंटिव एक्टिविटी अपनाने को तैयार हैं।’ दूसरी पारी के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे लोग क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट काकोली रॉय के पास रिटायरमेंट से पहले सलाह लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। वे कहती हैं, पहले रिटायरमेंट के बाद खालीपन और दूसरों पर निर्भरता का डर रहता था। बेटों-बेटियों पर निर्भरता ज्यादा थी। अब लोग मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं। रिटायरमेंट कम्युनिटी बन रही हैं। नई स्किल्स सीखना, पार्ट-टाइम काम या वॉलंटियरिंग करना आम हो गया है। पहले से बेहतर और अनुकूल माहौल बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, सीनियर-फ्रेंडली हाउसिंग और डिजिटल सर्विसेज ने सीनियर सिटीजंस के लिए काफी सहयोगी माहौल बना दिया है। बैंकिंग, निवेश और हेल्थ सेवाएं अब ऑनलाइन और आसान हैं। ट्रैवल एजेंसियां, रिटायरमेंट कम्युनिटीज और सीनियर क्लब्स इस उम्र के लोगों के लिए खास सुविधाएं दे रहे हैं। तीर्थयात्रा की जगह अब अनुभव आधारित ट्रैवल जहां पहले रिटायरमेंट के बाद तीर्थयात्रा प्रमुख विकल्प थी, अब अनुभव आधारित यात्रा बढ़ी हैं। ग्रैंड व्यू रिसर्च के डेटा के मुताबिक देश का सिल्वर टूरिज्म (बुजुर्गों द्वारा की जाने वाली यात्रा) मार्केट 18.2% सालाना की दर से बढ़ रहा है। इंडियाआउटबाउंड की रिपोर्ट के मुताबिक देश के वरिष्ठ नागरिकों में अंतरराष्ट्रीय क्रूज यात्रा, वेलनेस रिट्रीट और एडवेंचर टूर में दिलचस्पी बढ़ी है।



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