18% जेन जी महिलाएं बच्चे नहीं चाहतीं:  बिना बच्चे के परिवार हर साल बढ़ रहे, बदलती जीवनशैली और महंगाई से ‘चाइल्ड फ्री इंडिया’ जैसी मुहिम को बढ़ावा मिल रहा
अअनुबंधित

18% जेन जी महिलाएं बच्चे नहीं चाहतीं: बिना बच्चे के परिवार हर साल बढ़ रहे, बदलती जीवनशैली और महंगाई से ‘चाइल्ड फ्री इंडिया’ जैसी मुहिम को बढ़ावा मिल रहा

Spread the love




बेंगलुरु के युवा दंपती अंकित और श्रेया बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत हैं। वे हर साल विदेश यात्रा करते हैं, फिटनेस और स्किल-अपग्रेड पर निवेश करते हैं। उनकी शादी को 4 साल हो चुके हैं, लेकिन वे बच्चा नहीं चाहते। ऐसा नहीं है कि वे शारीरिक या आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। अंकित और श्रेया भारतीय युवा दंपतियों में बढ़ते ट्रेंड डिंक (डबल इनकम नो किड्स) के पैरोकार हैं। ये तेजी से बढ़ती उस शहरी पीढ़ी का चेहरा हैं, जो बच्चे पैदा न करने को मजबूरी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध विकल्प मानती है। चेन्नई के राखी और तुशीर के परिवार में उनके अलावा चार डॉबरमैन डॉग्स हैं, जिन्हें वे बच्चों की तरह पालते हैं। राखी कहती हैं, ‘मैंने कभी अधूरापन महसूस नहीं किया। परिवार का अर्थ अब सिर्फ बच्चे नहीं हैं।’ सर्वे; महानगरों में बिना बच्चे या एक बच्चे वाले कपल 20-30% तक हुए – दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में हुए एक निजी सर्वे में 28–40 उम्र के 27% जोड़ों ने कहा कि वे अपनी इच्छा से संतानहीन रहना पसंद कर रहे। – प्यू रिसर्च सेंटर की एक वैश्विक रिपोर्ट में भारत के करीब 12% शहरी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे बच्चे नहीं चाहते या अनिश्चित हैं। – इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्रिएटिव रिसर्च थॉट्स: महानगरों में बिना बच्चे या एक बच्चे वाले कपल की आबादी 20-30% तक पहुंची। – नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी अवेयरनेस सर्वे में 18% जेन जी महिलाएं बच्चे नहीं चाहतीं। – यूगोव इंडिया के सर्वे में मेट्रो शहरों के करीब 18% युवा कपल ने एक से अधिक बच्चे न रखने की इच्छा जताई। डिंक, डिस्क और डिंकवाड: महानगरों की शिक्षित आबादी में संतानहीन रहने के चलन को ‘नए नाम’ डिंक (डबल इनकम नो किड्स): दोहरी आय वाले ऐसे दंपती जिन्होंने जानबूझकर बच्चे नहीं पैदा करने का निर्णय लिया है। डिंकवाड (डबल इनकम नो किड्स विद ए डॉग): डिंक का ही एक उपसमूह, जो संतानहीन रहते हुए पालतू पशुओं, अक्सर कुत्ते को परिवार का हिस्सा बनाते हैं डिस्क (डबल इनकम सिंगल चाइल्ड): इस कैटेगरी में दोहरी आमदनी रखने वाले वे दंपती आते हैं, जो केवल एक बच्चा रखते हैं और छोटे परिवार को प्राथमिकता देते हैं। एक्सपर्ट- खपत का 50% इन्हीं से आ रहा डबल इनकम, नो किड्स (डिंक) वर्ग के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम है। ये देश में खपत का 50% संचालित करने वाले टॉप 6 करोड़ उपभोक्ताओं में शामिल हैं। लेकिन इनके कार्ट में ‘फैमिली पैक’ के लिए जगह नहीं है। ये एक बड़ा बदलाव है। वे 5 किलो के वैल्यू पैक के बजाय 500 ग्राम के ऑर्गेनिक बैग चुनते हैं। – – दीपक मालू, वीपी, स्विगी के कस्टमर एक्सपीरियंस एंड न्यू इनिशिएटिव्स डिंक वर्ग यात्रा, लग्जरी, फिटनेस, पालतू पशु, निवेश व अनुभवों पर खर्च करता है। यह क्विक कॉमर्स के लिए मुख्य ग्राहक वर्ग है। डिंक फैमिली के हिसाब से पैकेज बना रहीं कंपनियां
डिंक ट्रेंड से ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, प्रीमियम रिटेल, पेट केयर और पर्सनल सर्विसेज जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा हो रहा है। इसलिए कंपनियां अब डिंक केंद्रित प्रोडक्ट और ऑफरिंग्स तैयार कर रही हैं। वहीं, बच्चों से जुड़े सेक्टर्स में धीरे-धीरे बदलाव दिख रहा है। डिंक फैमिली के हिसाब से पैकेज बना रहीं कंपनियां डिंक ट्रेंड से ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, प्रीमियम रिटेल, पेट केयर और पर्सनल सर्विसेज जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा हो रहा है। इसलिए कंपनियां अब डिंक केंद्रित प्रोडक्ट और ऑफरिंग्स तैयार कर रही हैं। वहीं, बच्चों से जुड़े सेक्टर्स में धीरे-धीरे बदलाव दिख रहा है। चुनौतियां, संपत्ति किसे देंगे? ​रिश्तेदार हड़प न लें देश में संतानहीन रहने के इच्छुक युवाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद भविष्य की चिंता और चुनौतियां कायम हैं। चाइल्ड फ्री इंडिया ग्रुप से जुड़े अनुग्रह की मानें तो अभी भी समाज और परिवार में इसकी स्वीकार्यता कम है। इस बात की भी चिंता है कि ऐसे लोग अपनी संपत्ति किसे देंगे। कुछ लोग गरीबों को दान करना चाहते हैं लेकिन उन्हें चिंता है कि उनके बाद उनके नजदीकी रिश्तेदार कानून का फायदा उठाकर संपत्ति हड़प लेंगे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *