जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

3700 किमी की यात्रा कर हेमकुंड साहिब पहुंचे पाक श्रद्धालु: बर्फबारी के बीच की अंतिम अरदास, उत्तराखंड में मिली सुविधाओं की तारीफ की – Rishikesh(Dehradun) News

Spread the love


पाकिस्तान से आए 40 श्रद्धालुओं के जत्थे ने 10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब में मत्था टेका और कपाट बंद होने के अवसर पर आयोजित अंतिम अरदास में भी हिस्सा लिया।

पाकिस्तान से करीब 3700 किलोमीटर का सफर तय कर उत्तराखंड पहुंचे सिख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब के दर्शन करने के बाद अब वापस लौट गए हैं। पाकिस्तान से आए 40 श्रद्धालुओं के जत्थे ने 10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब में मत्था टेका और कपाट बंद होने के अवसर पर आयोजि

.

करीब 18 वर्षों से पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा करते आ रहे हैं। हालांकि, बीच में कुछ कारणों से इस यात्रा में रुकावट भी आई थी। इस बार श्रद्धालुओं ने न केवल पवित्र धाम के दर्शन किए, बल्कि उत्तराखंड में मिली सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की भी जमकर तारीफ की। श्रद्धालुओं ने पुलिस-प्रशासन और स्थानीय लोगों का आभार जताते हुए कहा कि यात्रा का अनुभव बेहद सुखद रहा।

हेमकुंड साहिब के दर्शन और ऋषिकेश में रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार को यह जत्था दिल्ली के लिए रवाना हो गया। देहरादून में जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद श्रद्धालु दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के रास्ते आगे बढ़े। यह यात्रा एक बार फिर दिखाती है कि धार्मिक आस्था और गुरु के प्रति श्रद्धा किस तरह सरहदों की दूरी को भी छोटा कर देती है।

जत्थे में 10 बच्चे, 15 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल हैं।

जत्थे में 10 बच्चे, 15 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल हैं।

3700 किलोमीटर का सफर कर पहुंचे हेमकुंड पाकिस्तान से आए 49 सिख श्रद्धालु पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब से ताशकंद के रास्ते दिल्ली पहुंचे। 49 सदस्यीय जत्थे में से करीब 40 श्रद्धालुओं को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा की अनुमति मिली। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की पहल और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से यात्रा की व्यवस्था की गई। 9 अक्तूबर की रात करीब एक बजे 40 पाकिस्तानी श्रद्धालु ऋषिकेश के गुरुद्वारा हेमकुंड पहुंचे।

जत्थे में 10 बच्चे और 15 महिलाएं पाकिस्तान से आए 40 श्रद्धालुओं के जत्थे की अगुवाई पपिंदर सिंह कर रहे हैं। जत्थे में 10 बच्चे, 15 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल हैं।

10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब पहुंचे 9 अक्टूबर को ऋषिकेश से चमोली पहुंचने के बाद जत्था गोविंदघाट गया और वहां से घांघरिया के लिए रवाना हुआ। 10 अक्टूबर की सुबह करीब पांच बजे घांघरिया से श्रद्धालु हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए और करीब आठ बजे धाम पहुंच गए। उस दिन हेमकुंड साहिब में सीजन की अंतिम अरदास और कपाट बंद होने का कार्यक्रम था।

हेमकुंड साहिब पहुंचने के बाद श्रद्धालु अंतिम धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब का पाठ, 11:20 बजे शबद-कीर्तन और दोपहर 12:30 बजे इस यात्रा काल की अंतिम अरदास हुई। इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब को पंच प्यारों की अगुवाई में सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया और दोपहर दो बजे हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

बर्फबारी के बीच किए दर्शन पाकिस्तानी श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा इसलिए भी खास रही क्योंकि कपाट बंद होने से एक दिन पहले हेमकुंड साहिब में जमकर बर्फबारी हुई थी। पूरा धाम बर्फ की सफेद चादर में ढक गया था। इसके बावजूद श्रद्धालु घांघरिया से पैदल हेमकुंड साहिब पहुंचे और अंतिम अरदास में शामिल हुए। इस दौरान करीब 40 सदस्यीय पाकिस्तानी जत्था भी ऐतिहासिक बंदी उत्सव का हिस्सा बना।

12 अक्टूबर को लौटे ऋषिकेश पाकिस्तानी श्रद्धालुओं का दल 12 अक्टूबर को वापस ऋषिकेश पहुंचा और अब दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें यात्रा के दौरान जगह-जगह सम्मान मिला और उत्तराखंड पुलिस-प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा।

हेमकुंड साहिब में इस साल रिकॉर्ड श्रद्धालु इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खुले थे और 10 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद हुए। इस यात्रा सीजन में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। कपाट बंद होने के समय उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब में मत्था टेका। कपाट बंद होने के ऐतिहासिक कार्यक्रम में पांच हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।

——————-

यह खबर भी पढ़ें…

140 दिन बाद बंद हुए हेमकुंड साहिब के कपाट:3.84 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, अंतिम अरदास में शामिल हुए 40 पाकिस्तानी

उत्तराखंड के चमोली में समुद्र तल से करीब 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस साल यहां रिकॉर्ड 3 लाख 84 हजार 573 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। कपाट बंद होने के समय करीब 4 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। इनमें पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी शामिल रहा।(पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *