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क्या 80 वर्ष की उम्र के बाद भी दिमाग 40-50 साल जैसा तेज रह सकता है? नई दिल्ली एम्स की रिसर्च और अमेरिकन फेडरेशन फॉर एजिंग (एएफएआर) की सुपरएजर्स स्टडी कहती है- यदि सही लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो यह संभव है। स्टडी में ऐसे बुजुर्गों को देखा गया, जिनकी याददाश्त और सोचने की क्षमता उनकी उम्र से कहीं बेहतर थी। उनकी ब्लड जांच, एमआरआई व न्यूरोसाइकोलॉजिकल परीक्षण किया गया। जिस बुजुर्ग का दिमाग तेज काम कर रहा था उनकी जीवनशैली, खानपान, योग-व्यायाम करने का समय भी देखा गया। इन दोनों शोध में निष्कर्ष यह निकला कि उम्र पर जीन से ज्यादा असर रोजमर्रा की आदतों का होता है। यानी सही दिनचर्या अपनाकर बुढ़ापे में भी याददाश्त व सोचने की क्षमता मजबूत बनाए रख सकते हैं। जानिए रिसर्च से निकली 6 आदतें। जो बुजुर्ग रोज चलते, मिलते व सीखते हैं; उनका दिमाग 20-30 साल ज्यादा सक्रिय रहता है रोजाना चलना – दिमाग तक खून पहुंचाने का सबसे आसान तरीका रोज 20-30 मिनट तेज चाल से चलें। घुटनों में दर्द हो तो हल्का व्यायाम करें। फायदा – दिमाग में रक्त संचार बेहतर, मानसिक सुस्ती व थकान कम होती है। लोगों से जुड़े रहें – बढ़ती उम्र में अकेलेपन के खतरे से बचे रहेंगे परिजन, पड़ोसियों या दोस्तों से बात करें। पोते-पोतियों के साथ में समय बिताएं। फायदा- दिमाग सक्रिय रहता है, डिप्रेशन और भूलने की समस्या कम होती है। योग-अभ्यास करें – तनाव कम और फोकस बेहतर होता है 5-10 मिनट गहरी सांस लें। 4 सेकंड अंदर लें, 4 रोकें, 6 सेकंड में बाहर करें। फायदा – तनाव हार्मोन घटते हैं। याददाश्त के साथ निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। घर का संतुलित भोजन – दिमाग की असली ऊर्जा का सोर्स है दाल-रोटी, सब्जी, दही के साथ बादाम-अखरोट खाएं। चीनी,तेल, नमक कम करें। फायदा – बीपी व शुगर नियंत्रित रहते हैं। दिल और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं। अच्छी नींद – दिमाग की सफाई होती, हार्मोंस संतुलित रहते हैं 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और टीवी बंद कर दें। फायदा -नींद में दिमाग खुद को रीसेट करता है। सोचने की क्षमता तेज रहती है। नियमित जांच – बीमारी पहले ही पकड़ में आने से तनाव नहीं होता साल में एक बार शुगर बीपी, विटामिन-D, थायरॉइड जैसी जांचें करवाएं। फायदा – शुरुआत में बीमारी का इलाज होने से दिमाग की गिरावट रुकती है। स्वस्थ सुपरएजर्स की आदतें परखीं
अमेरिकन स्टडी में 95 वर्ष व उससे अधिक उम्र के ऐसे सुपरएजर्स शामिल हैं, जो शारीरिक-मानसिक रूप से स्वस्थ हैं। वहीं एम्स की रिसर्च में 80 या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के साथ 25 से 50 वर्ष के लोग शामिल रहे हैं।
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