अरिजेता लाजका. द न्यू यॉर्क टाइम्स4 घंटे पहले
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विशेषज्ञ मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा असली लगने वाले एआई कॉन्टेंट से बच्चों को नुकसान है क्योंकि वे कल्पना और असलियत में अंतर नहीं कर पाते हैं। – सिम्बॉलिक इमेज
यूट्यूब पर बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बने वीडियो भले ही उन्हें अक्षरों और जानवरों के बारे में पढ़ाने का दावा करते हों, लेकिन उनका बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। कुछ वीडियो में जानवरों या लोगों के चेहरे विकृत रहते हैं। जानकारी भी गलत होती है।
एआई टूल्स और ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स की मदद से बने ऐसे कई वीडियो को लाखों व्यू मिलते हैं। अधिकांश वीडियो 30 सेकेंड के होते हैं। लिहाजा बच्चों को आइडिया सोचने और सीखने के लिए कम समय मिल पाता है। इससे उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में बाल व्यवहार विशेषज्ञ डॉ. जेनी राडेस्की कहती हैं। ये वीडियो केवल ध्यान खींचते हैं।
डॉ. राडेस्की और अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा असली लगने वाले एआई कॉन्टेंट से बच्चों को नुकसान है क्योंकि वे कल्पना और असलियत में अंतर नहीं कर पाते हैं। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिक और रिसर्चर मैककाल बूथ का कहना है कि भविष्य में बच्चों को नकली कॉन्टेंट पहचानने में मुश्किल होगी क्योंकि उनका मानसिक ढांचा असंभव, लेकिन असली लगने वाली गतिविधियों के अनुकूल हो जाता है।
बच्चों के लिए नियंत्रित डिजिटल वातावरण मुहैया कराने वाले यूट्यूब किड्स चैनल पर प्रसारित हुए एआई निर्मित जानवरों के वीडियो टिकटॉक पर ट्रेंड कर रहे थे।
सनसनीखेज कॉन्टेंट से बचें
अमेरिकन पीडियाट्रिक्स अकादमी ने पेरेंट्स के लिए गाइडलाइन जारी की है। अकादमी ने बच्चों के लिए वीडियो चुनते समय एआई जनरेटेड या बेहद सनसनीखेज कॉन्टेंट से बचने की सलाह दी है। शॉर्ट वीडियो देखने के खिलाफ भी आगाह किया है।









