सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक मंदिर में कुछ पुजारी नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि पुजारी दान पेटी से पैसे चुरा रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो अयोध्या के राम मंदिर का है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो दो साल पुराना और कर्नाटक का है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो राम मंदिर का है। नीरज सिंह नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा,’रामममंदिर 200 करोड़ का बड़ा खुलासा CCTV ने खोली सबकी पोल’। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें Tv9 Kannada के यूट्यूब चैनल पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 27 सिंतबर 2024 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि गली अंजनेय मंदिर से पैसे की चोरी।
आगे की पड़ताल में bangalore mirror की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 27 सितंबर 2024 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हजारों लोग गाली अंजनेया स्वामी मंदिर जाते हैं और मंदिर के मैनेजमेंट पर भरोसा करते हैं कि वे चढ़ावे का इस्तेमाल मंदिर के विकास के लिए करेंगे। वीडियो में दिख रहा है कि दान की गिनती कर रहे सुपरवाइजरों में से एक, बैठे हुए व्यक्ति को कैश का बंडल थमाता है, और वह व्यक्ति उसे अपनी जेब में रख लेता है, जबकि गिनती की प्रक्रिया की देखरेख की जिम्मेदारी उसी की थी। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर गाली अंजनेया स्वामी मंदिर में दान की चोरी दिखाई गई है। हालांकि, मुख्य पुजारी का दावा है कि यह एक पुरानी क्लिप है, लेकिन दो लोगों को कैश के बंडल चुराते हुए दिखाने वाला फुटेज मंदिर के भक्तों के लिए परेशान करने वाला है।
आगे की पड़ताल में हमें इंडिया टुडे की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 14 जुलाई 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया हया है कि बंगलूरू के गली अंजनेय स्वामी मंदिर को राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपने नियंत्रण में ले लिया है और कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 के तहत इसे ‘अधिसूचित संस्थान’ घोषित किया है। यह निर्णय भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और मंदिर के दान में चोरी के आरोपों सहित कई विवादों के बाद लिया गया है, जो पिछले साल सामने आए थे।
कर्नाटक के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि यह हस्तक्षेप आवश्यक था। उन्होंने कहा, “हमने आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की खबरों के बाद मंदिर को अपने नियंत्रण में लिया है। यह नियंत्रण पांच साल की अवधि के लिए है। हम प्रशासन को सुव्यवस्थित करेंगे और फिर इसे मंदिर के ट्रस्टियों को वापस सौंप देंगे। इसी तरह, भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने भी अपने कार्यकाल के दौरान आठ मंदिरों को अपने नियंत्रण में लिया था। यदि हम अनियमितताओं को पहले ही सुलझा लेते हैं, तो हम इसे जल्द ही वापस सौंप देंगे।”
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को कर्नाटक का पाया है। इस वीडियो का अयोध्या के राम मंदिर से कोई संबंध नहीं है।








