सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल है। पोस्ट में लिखा है कि ब्रिक्स देशों से भारत को बाहर किया जा रहा है। इसके साथ ही पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारत को ब्रिक्स सम्मेलन से बाहर कर इंडोनेशिया को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।
अमर उजाला ने अपने पड़ताल में वायरल दावे को झूठा पाया है। हमारी पड़ताल में पता चला है कि हाल ही में ब्राजील के ब्रासीलिया में 4-5 जून को ब्रिक्स संसदीय फोरम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। इसके साथ ही ब्राजील के रियो डी जेनेरो में 6-7 जुलाई को ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होने वाला है। इसके साथ ही हमने पाया कि इंडोनेशिया पहले से ही ब्रिक्स समूह में शामिल है।
साल 2009 में ब्रिक्स की स्थापना की गई थी। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल थे। हालांकि 2024 में ब्रिक्स सम्मेलन का विस्तार कर ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात को जोड़ा गया है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ब्रिक्स सम्मेलन से भारत को बाहर किया जा रहा है।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर महेश सिंह (@maheshs97394123) नाम के यूजर ने लिखा “भारत के गुप्त इरादों से तंग आकर ब्रिक्स देश भारत को बाहर निकालने और उसकी जगह इंडोनेशिया को लाने की योजना बना रहे हैं। ब्रिक्स का एक बड़ा समूह भारत को किनारे कर पाकिस्तान को बढ़ावा देने की कोशिश में है। वह चीन की योजना का समर्थन कर रहे हैं।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।
इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
हमने दावे की पड़ताल करने के लिए पोस्ट में इस्तेमाल कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें भारत को ब्रिक्स सीमिट से बाहर होने की कोई रिपोर्ट नहींं मिली।
हालांकि हमें प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की एक प्रेस विज्ञप्ति मिली। यह विज्ञप्ति 6 जून 2025 को प्रकाशित की गई थी, जिसमें बताया गया था कि 4-5 जून को ब्राजील के ब्रासीलिया में 11वां ब्रिक्स संसदीय फोरम आयोजित किया गया, जिसमें भारत के साथ सभी 10 सदस्य देशों की संसदों ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में एक उच्च स्तरीय संसदीय दल भी मौजूद था।
ब्रिक्स संसदीय फोरम ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण भाग है। पहला ब्रिक्स संसदीय फोरम 8 जून 2015 को मास्को में आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता रूस ने की थी। इसके साथ ही भारत ने अक्टूबर 2016 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अंतर-संसदीय संघ की 135वीं सभा के दौरान ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन की मेजबानी की थी।
इसके बाद हमें आकाशवाणी की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि ब्राजील के ब्रासीलिया में 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक वीडियो संदेश साझा किया है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने, एआई प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने और आर्थिक मामलों पर सामूहिक रूप से काम करने के लिए सार्थक बातचीत की गई है। इसके साथ ही ब्रिक्स देशों ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है।
आगे की पड़ताल के दौरान हमें द हिंदू की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में बताया गया था कि ब्राजील के ब्रासीलिया में 4-5 जून को ब्रिक्स संसदीय फोरम आयोजित किया गया था। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई साथ ही सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रूप से कार्रवाई करने पर सहमति जताई है। इस फोरम में दस देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
हमने इंडोनेशिया को ब्रिक्स सीमिट में शामिल करने के दावे के बारे में पड़ताल किया। इस दौरान हमें डीडब्लू की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि इंडोनेशिया ब्रिक्स समूह में शामिल हो गया है। यह घोषणा इस संगठन के संस्थापक सदस्य और 2025 तक के लिए अध्यक्षता करने वाले ब्राजील ने की है। एक बयान में कहा गया कि ब्राजील सरकार ब्रिक्स में इंडोनेशिया के प्रवेश का स्वागत करती है।
यहां से साफ होता है कि ब्रिक्स देशों से भारत को बाहर नहीं किया गया है। भारत ने हाल ही ब्रजील में आयोजित ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लिया है। इसके साथ ही ब्राजील के रियो डी जेनेरो में 6-7 जुलाई को ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होने वाला है, जिसमें भारत भी अपना प्रतिनिधत्व करने वाला है। इसके साथ ही इंडोनेशिया 2025 की शुरुआत में ही ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुआ है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में सोशल मीडिया पर वायरल दावे को झूठा पाया है। भारत को ब्रिक्स सम्मेलन से बाहर नहीं किया गया है।








