सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि लोग एक दूसरे पर पत्थरबाजी कर रहे हैं। वीडियो में कुछ गार्ड पत्थर फेंकते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो नोएडा की पॉश कॉलोनी महागुन सोसाइटी का है। यहां बांग्लादेशी बस्ती में रहने वाले लोगों ने सोसाइटी में हमला बोल दिया है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में यह सामने आया है कि वीडियो 2017 का है। वीडियो को गलत सांप्रदायिक दावे को साथ अभी शेयर किया जा रहा है। यह मामला नोएडा के सेक्टर 78 महागुन सोसायटी में काम करने वालों के द्वारा हमला किए जाने का था। आरोप है कि एक फ्लैट मालिक ने काम करने वाली एक नौकरानी को बंधक बनाकर उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद बाकी काम करने वालों ने सोसाइटी में घुसकर पत्थरबाजी की थी।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि नोएडा की पॉश कालोनी महागुन सोसाइटी। एक परिवार जिसके यहां एक बांग्लादेशी मुस्लिम महिला घरेलू नौकरानी का काम करती थी। उस पर चोरी करने का आरोप था। महिला घर वापस गई और बांग्लादेशी बस्ती से लोगों को बुलाकर लाई और सोसाइटी में हंगामा कर दिया।
जितेन्द्र प्रताप सिंह (@jpsin1) नाम के एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर करके लिखा “नोएडा की पॉश कालोनी महागुन सोसाइटी। एक परिवार जिसके यहां एक बांग्लादेशी मुस्लिम महिला घरेलू नौकरानी का काम करती थी, उन्होंने नौकरानी से शक के आधार पर पिछले काफी दिनों से घर से गायब हो रही छुटपुट वस्तुओं और पिछले दिन गायब हुए 10000 रुपये के विषय में पूछताछ की…. पहले तो नौकरानी ने साफ मना कर दिया पर जब परिवार ने चोरी करते हुए उसकी CCTV रिकॉर्डिंग का सबूत अपने पास होने की बात कही तो उसने 10000 रुपये चोरी करना स्वीकार कर लिया…. और अगले दिन पैसे लेकर आने को कहकर अपने घर लौट गयी… परंतु परिवार ने यह बात सोसाइटी में बता दी पूरी सोसाइटी में पास की बांग्लादेशी बस्ती की बहुत सारी महिलाएं काम करती हैं पूरी सोसाइटी ने कल से उन्हें काम पर आने से मना कर दिया फलस्वरूप… आज 12 जुलाई को प्रातः 6 बजे वह औरत अपने पास ही में बसी बांग्लादेशियों की बस्ती से सैकड़ों लोगों की भीड़ लेकर महागुन सोसाइटी में पहुँचती है और वो भीड़ पूरी सोसाइटी में आतंक मचा देती है “लूट लो मार दो” की आवाजें आने लगती हैं घरों और गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू हो जाती है….. बाकी आप वीडियो में देख सकते हैं। कुल मिलाकर अगर आप इस घटना से सबक लेते हैं तो अपने घरों से इन बांग्लादेशी और जिहादी तत्वों को निकालिए वर्ना किसी दिन आप भी भुगतेंगे। हम लोग ही इन्हें अपने घरों में घुसाते हैं।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें इस वीडियो से जुड़ी रिपोर्ट एबीपी न्यूज पर देखने को मिली। इस रिपोर्ट को 12 जुलाई 2017 के प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि “नोएडा के सेक्टर 78 स्थित महागुन मॉडर्न सोसाइटी में एक बड़ी हिंसा भड़क उठी, जब एक निवासी ने कथित तौर पर एक नौकरानी की पिटाई कर दी। खबरों के अनुसार, सोसाइटी के निवासियों ने कथित तौर पर नकदी चुराने के आरोप में नौकरानी पर हमला किया। इससे उसके रिश्तेदार और आसपास रहने वाले गुस्साए ग्रामीण सुबह 7 बजे परिसर में इकट्ठा हो गए और लाठी-डंडों और ईंटों के साथ सोसाइटी में घुस गए।”
आगे हमें इस मामले से जुड़ी एक और रिपोर्ट इंडिया टीवी पर देखने को मिला। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि नोएडा के सेक्टर 78 में एक सोसायटी में कुछ लोगों ने बुधवार सुबह जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि सोसायटी में काम करने वाली एक मेड को बंधक बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। लापता चल रही मेड को जब ढूंढा गया तो वो सोसायटी के एक फ्लैट में मिली। आक्रोशित लोगों की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस रिपोर्ट को 12 जुलाई 2017 में प्रकाशित किया गया था।
इस वीडियो के बारे में और पता लगाने के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें पता चला कि मामला 2017 का है। नोएडा के सेक्टर 78 महागुन सोसायटी में काम करने वालों ने जमकर बवाल काटा। आरोप है कि एक फ्लैट मालिक ने काम करने वाली एक नौकरानी को बंधक बनाकर उसकी पिटाई कर दी। जिसके बाद बाकी काम करने वालों ने सोसाइटी में घुसकर पत्थरबाजी की। इस मामले में 50 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो 2017 का है। जिसे अभी भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। साथ ही रिपोर्ट में किसी बांग्लादेशी बस्ती से लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिली।








