एन. रघुरामन का कॉलम:  अपने वयस्क बच्चे को आप क्या देना चाहते हैं– सीख या लग्जरी
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: अपने वयस्क बच्चे को आप क्या देना चाहते हैं– सीख या लग्जरी

यह 1978 का साल था। भारत के अंधेरे सिनेमाघरों में ‘डॉन’, ‘त्रिशूल’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में ‘एंग्री यंग मैन’ अमिताभ बच्चन छाए हुए थे। लेकिन 18.5 वर्ष की उम्र में मेरे लिए असली ड्रामा सिल्वर स्क्रीन पर नहीं, घर के ड्रॉइंग रूम में चल रहा था। पहली सैलरी मिलने के सिर्फ […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  अपनों के बीच आ रही दूरी को कैसे टालें?
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: अपनों के बीच आ रही दूरी को कैसे टालें?

अपने आसपास देखिए, पांच साल की उम्र के कई बेटे होंगे, जो अपने पिता को ‘माय सुपर हीरो’ कहते हैं। जब वह 10 साल का होता है तो यह छवि थोड़ी दूसरे दर्जे पर आती है और बेटा कहने लगता है कि ‘मेरे पिता सुपर हीरो हैं, लेकिन अकसर गुस्सा हो जाते हैं।’ आप लहजा […]