नंदितेश निलय का कॉलम:  हमारे प्रजातंत्र का अंतिम व्यक्ति 2 मिनट के विलम्ब से क्यों हारा?
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नंदितेश निलय का कॉलम: हमारे प्रजातंत्र का अंतिम व्यक्ति 2 मिनट के विलम्ब से क्यों हारा?

रोजाना सिर्फ तीन सौ रुपये कमाने वाले पिता ने जब बेटी की आंखों में डॉक्टर बनने का ख्वाब देखा तो कर्ज लेने से नहीं चूके, लेकिन बेटी को नीट के परीक्षा केंद्र पर समय पर पहुंचाने से जरूर चूक गए। कुछेक रुपये कमाने वाले पिता ने सत्तर किलोमीटर की यात्रा बेटी के साथ तय तो […]