टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: मजबूत बिलीफ आपके फूड बिजनेस को जीवन के बाद भी ‘प्रॉफिट’ दिला सकती है

1960 के दशक में मेरे पिता नागपुर रेलवे स्टेशन के कैटरिंग सुपरवाइजर के तौर पर कार्यरत थे। उनके पास श्रीनिवासन नाम के एक शेफ काम करते थे, जिनसे उनका स्थायी विवाद रहता था। दरअसल, वड़ा या इडली का वजन भारतीय रेलवे द्वारा प्रिस्क्राइब्ड वजन से कम होता था। पहले उन्होंने शेफ को समझाने की कोशिश […]