पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  परछाई पर टिकने की कोशिश न करें, इसके बजाय देह को समझें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परछाई पर टिकने की कोशिश न करें, इसके बजाय देह को समझें

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column | Understand Body Beyond Shadow Philosophy 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता अपनी ही परछाई देखकर खुश होना समझदारी है। उसे देखकर डर जाना नादानी है, क्योंकि परछाई का अस्तित्व देह से है। पर परछाई को ही देह समझ लें तो माया का प्रवेश हो जाता […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  जीवन में भक्ति उतर आए तो फिर हर कृत्य में सेवा ही होगी
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जीवन में भक्ति उतर आए तो फिर हर कृत्य में सेवा ही होगी

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column | Bhakti And Seva Life Philosophy | 2026 9 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कहते हैं कि सेवक को सपने में भी सुख नहीं मिलता। लेकिन यह बात लक्ष्मण जी और हनुमान जी जैसे सेवकों ने बदल दी। तुलसीदास जी ने लिखा है- कहइ भसुंड सुनहु […]

रीटा कोठारी का कॉलम:  हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?
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रीटा कोठारी का कॉलम: हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?

मेरे मायके की शब्दावली सत्संग से आती है। जब किसी की मृत्यु होती है तो हमारे यहां कहा जाता है- ‘उनका शरीर शांत हो गया है।’ जिस सिंधी कौम ने बंटवारे के दुःख देखे हों, तरह-तरह के व्यापारों में हाथ डालकर कभी कामयाबी तो कभी बेहद नुकसान उठाए हों, वह मृत्यु और बीमारियों से जल्दी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  ‘मनचाहा’ और ‘अनचाहा’ के बीच झूलता रहता है जीवन
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ‘मनचाहा’ और ‘अनचाहा’ के बीच झूलता रहता है जीवन

धन मेहनत से आता है, लेकिन समृद्धि अपने साथ दूसरों को धनवान बनाने से भी आती है। जब हम विकास यात्रा में हों तो किसी को पीछे भले छोड़ दें, उसको बर्बाद ना करें। अपने प्रयासों से आगे बढ़ जाएं। जो पीछे रह गया, यदि वो नादान है तो खुद बर्बाद हो जाएगा, लेकिन हमारी […]

सेल्फ हेल्प किताबों से:  जीवन को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ें
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सेल्फ हेल्प किताबों से: जीवन को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ें

1 घंटे पहले कॉपी लिंक किताबों से जानिए, कैसे कठिन परिस्थितियां भी हमें तोड़ नहीं पातीं? जीवन में केवल खुशी ही नहीं, अर्थ भी ढूंढें जीवन में खुशी तलाशना आसान है, लेकिन असली संतोष तब मिलता है जब व्यक्ति अपने जीवन में अर्थ खोजता है। अर्थ का मतलब है यह महसूस करना कि हमारा जीवन […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने जीवन में विचार और वीरता, दोनों ही बनाए रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने जीवन में विचार और वीरता, दोनों ही बनाए रखें

मनुष्य का जीवन निराला है। यह मां की गोद और चिता की वेदी के बीच का है। जब आप पहली बार आंख खोलते हैं तो अपने को मां की गोद में पाते हैं। कई लोग प्रसन्न हो रहे होते हैं। आगमन का आनंद मनाया जाता है। उस आगमन से आप अनजान हैं, लेकिन आपका जन्म […]

रसरंग में चिंतन:  मौन के गुंबद पर लहराता है आनंद का ध्वज
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रसरंग में चिंतन: मौन के गुंबद पर लहराता है आनंद का ध्वज

घर के सामने एक घना वृक्ष है। कई लोगों से इस वृक्ष के बारे में पूछा, पर कोई भी उसके बारे में विस्तार से बता नहीं पाया। उसका नाम भी किसी ने नहीं बताया, तो मैंने ही उसका नाम रख दिया – “सत्यकाम’। बिना नाम और लेबल के कोई वस्तु हर तरह से पूर्ण हो, […]

रश्मि बंसल का कॉलम:  थोड़ा खट्टा, थोड़ा नमकीन भी चलेगा, बस कड़वाहट से दूर रहें…
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रश्मि बंसल का कॉलम: थोड़ा खट्टा, थोड़ा नमकीन भी चलेगा, बस कड़वाहट से दूर रहें…

Hindi News Opinion Rashmi Bansal Column: Lifes Lessons Bitter Sweet Is Fine, Avoid Bitterness 2 घंटे पहले कॉपी लिंक रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर मेरे साथ आईआईएम में पढ़ी एक सहेली अचानक चल बसी। 31 दिसंबर को वॉट्सएप पर मैसेज आया था कि सांस लेने में कुछ दिक्कत है, हॉस्पिटल में भर्ती हूं। 17 जनवरी […]

रश्मि बंसल का कॉलम:  थोड़ा खट्टा, थोड़ा नमकीन भी चलेगा, बस कड़वाहट से दूर रहें…
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रश्मि बंसल का कॉलम: थोड़ा खट्टा, थोड़ा नमकीन भी चलेगा, बस कड़वाहट से दूर रहें…

Hindi News Opinion Rashmi Bansal Column: Lifes Lessons Bitter Sweet Is Fine, Avoid Bitterness 6 घंटे पहले कॉपी लिंक रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर मेरे साथ आईआईएम में पढ़ी एक सहेली अचानक चल बसी। 31 दिसंबर को वॉट्सएप पर मैसेज आया था कि सांस लेने में कुछ दिक्कत है, हॉस्पिटल में भर्ती हूं। 17 जनवरी […]