एन. रघुरामन का कॉलम:  वर्कप्लेस बदलने वाले हैं, आप भी खुद को बदल लीजिए
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: वर्कप्लेस बदलने वाले हैं, आप भी खुद को बदल लीजिए

‘दिमाग का दही हो गया’- ये बात एक मिडिल लेवल मैनेजर खुद से बड़बड़ा रहा था, क्योंकि वहां उससे बोलने के लिए कोई था ही नहीं। उस बड़े से शॉप फ्लोर पर वह अकेला इंसान था। लेकिन अचानक पीछे से आवाज आई- ‘ये दही क्या होता है?’ उसे पता था कि कौन है। उसने पलटकर […]