परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी […]
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एन. रघुरामन का कॉलम: डेटिंग की अर्थव्यवस्था ‘सोल्जर पेमेंट’ से ‘ब्यूटी टैक्स’ तक बढ़ चुकी है
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column The Dating Economy Has Evolved From ‘soldier Payments’ To ‘beauty Tax’ 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु डेट का बिल किसे चुकाना चाहिए, इस पर बहस उतनी ही पुरानी है जितनी खुद डेटिंग। 1980 के दशक में जब मैं युवा और अविवाहित था तो दोस्तों के […]
एन. रघुरामन का कॉलम: जो रोमांस देखे जा सकने वाले जेस्चर्स पर निर्भर नहीं होता उसकी उम्र लम्बी होती है
मुंबई में पवई झील के प्रोमेनेड की कुछ शामें आमतौर पर शांति से भरी होती हैं। लेकिन उस शाम वो जगह निष्ठा की एक गहरी मिसाल की गवाह बनी। सत्तर से अस्सी वर्ष की आयु के कुछ सेवानिवृत्त व्यक्ति अपनी नियमित की गपशप के लिए बैठे थे। जैसे ही घड़ी ने पांच बजाए, उनमें से […]
एन. रघुरामन का कॉलम: प्रेम के कई रूप हैं, इसे किसी भी तरह से व्यक्त कर सकते हैं
लगभग तीन दशकों से मेरा हर शनिवार एक ही तरह से शुरू होता आ रहा है। डिजिटल अलार्म दखल दे, इससे पहले ही मैं जाग जाता हूं। पूरा घर भोर की खास मखमली शांति में लिपटा रहता है। मैं एक कप फिल्टर कॉफी बनाता हूं और एक शांत कोने में बैठ जाता हूं। मद्धम रोशनी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘सही करने’ से ज्यादा अहम ‘आगे निकलना’ हो जाए तो सामाजिक मूल्य खत्म होते हैं
किसी भी समाज की ताकत अकसर उसके संस्थानों की ईमानदारी से मापी जाती है- जैसे स्कूल, जो हमारे युवाओं को गढ़ते हैं या पुलिसकर्मी, जो हमारे मोहल्लों की सुरक्षा करते हैं। लेकिन, इस हफ्ते देश के विभिन्न हिस्सों में हुई तीन घटनाओं ने इस बुनियाद में आती चिंताजनक दरार को दिखाया। जौनपुर और गोवा में […]
एन. रघुरामन का कॉलम: हमें रॉ डेटा को मथ कर बिजनेस के लिए स्वर्णिम मौके बनाने होंगे
मंगलवार को मैं मुंबई के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पवई शाखा में खड़ा था। ऑपरेशन मैनेजर के सामने कतार में दूसरे नंबर पर खड़े हुए मैंने एक लॉजिस्टिक नाकामी देखी। मेरे आगे खड़ा व्यक्ति तीस मिनट इंतजार करके थक चुका था। वह अजीब-सी परेशानी में था। पांच दिन पहले उसने ब्रांच की ऑटोमेटेड मशीन […]
एन. रघुरामन का कॉलम: परीक्षा देने वाले बच्चों को 1990 के दशक की जीवनशैली का छोटा-सा हिस्सा दें
Hindi News Opinion Mumbai Exam Students: Give Kids A Glimpse Of 1990s Lifestyle | N. Raghuraman Column 16 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ‘परीक्षा उद्या पसून, आता कुठे जातो,’ मुंबई में सोमवार को आगे वाले गेट से बस में चढ़ते एक विद्यार्थी से ड्राइवर ने यह बात पूछी। मैं वहां इंतजार कर […]
एन. रघुरामन का कॉलम: सहानुभूति विकसित करना स्कूल में बेहतर रैंक लाने से ज्यादा जरूरी है
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Developing Empathy Is More Important Than Getting Better Grades In School. 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु हाल ही में जब मेरी एक रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती थीं तो बेंगलुरु से आईं उनकी एक दोस्त ने रात को अस्पताल में रुकने की पेशकश की। वो मेरी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: सहानुभूति विकसित करना स्कूल में बेहतर रैंक लाने से ज्यादा जरूरी है
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Developing Empathy Is More Important Than Getting Better Grades In School. 4 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु हाल ही में जब मेरी एक रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती थीं तो बेंगलुरु से आईं उनकी एक दोस्त ने रात को अस्पताल में रुकने की पेशकश की। वो मेरी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: दादी-नानी मां से अपनी एआई स्किल्स को निखारना सीखें!
यह 1968 की एक रविवार की शाम थी। उन्होंने गली के छोर से उन्हें चलकर आते देखा। उनकी आंखों ने भांप लिया कि वे अपनी सामान्य अवस्था में नहीं थे। उनके एआई यानी एक्चुअल इंटेलिजेंस ने फौरन उन घटनाओं को परखना शुरू कर दिया, जो उनके दफ्तर में घट सकती थीं। उस दिन उनके बॉस […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘टूल-बेल्ट’ जनरेशन का फैशन स्टेटमेंट हमारी जनरेशन से उलट है
हाल ही में अमेरिका रहने वाली मेरी बहन ने मुझे 28 डॉलर की काउबॉय हैट गिफ्ट की। यह इसीलिए अलग नहीं थी कि उसने धूप से बचने के लिए मेरा पूरा चेहरा ढक दिया था, बल्कि जैसे जूतों के छेदों में फीता बंधा होता है, वैसे ही उस हैट के चारों तरफ फीता बंधा था। […]
एन. रघुरामन का कॉलम: उम्रदराज होने का अर्थ है जीवन अधिक पवित्र, समझदारी और सौम्यता भरा हो
अस्पताल में भर्ती मेरे एक परिजन को लेकर बुधवार को मैंने डॉक्टर से पूछा कि वे कब डिस्चार्ज हो सकते हैं? डॉक्टर ने कहा कि ‘इतनी जल्दबाजी क्यों?’ मैंने कहा, जल्दबाजी नहीं लेकिन गुरुवार और शुक्रवार को मुझे अपने अंकल के 80वें जन्मदिन में शामिल होना है। उन्होंने ऐसे देखा, जैसे कोई शिक्षित व्यक्ति किसी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: आपका रोज का भोजन ही लंबे और सेहतमंद जीवन का आधार है
Hindi News Opinion N. Raghuraman Column: Your Daily Food Is The Basis For A Long & Healthy Life 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु इन दिनों जब मैं अपने एक बीमार परिजन की देखभाल में ज्यादातर समय अस्पताल में बिता रहा हूं तो मैंने वहां दो तरह के लोग देखे। एक, जो […]
एन. रघुरामन का कॉलम: जल्द ही हम ‘टाइपिंग’ की जगह ‘टॉकिंग’ तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे
अब तक मैं और आप यह शिकायत करते रहे हैं कि हममें से अधिकतर लोग सड़क, ट्रेन में या सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल स्क्रीन में आंखें गड़ाए कुछ न कुछ टाइप करते रहते हैं। लेकिन चिंता न करें, एआई ने आपकी शिकायत सुन ली है। लोग अब आंखों में आंखें डालकर आपको देखेंगे और बात […]
एन. रघुरामन का कॉलम: पैसा और त्याग कभी बराबरी से नहीं तौले जा सकते
कई साल पहले मैंने अपने माता-पिता का फ्लैट अपनी बहन को देने का फैसला किया था। जब इस पर सवाल उठे, तो मैंने कहा यह इस बात की ईमानदार स्वीकृति थी कि पिता के गंभीर बीमार होने पर बहन ने ही उनकी देखभाल की थी। अधिकांश परिवारों की तरह हमारे परिवार में भी दो तरह […]
एन. रघुरामन का कॉलम: पैसा और त्याग कभी बराबरी से नहीं तौले जा सकते
कई साल पहले मैंने अपने माता-पिता का फ्लैट अपनी बहन को देने का फैसला किया था। जब इस पर सवाल उठे, तो मैंने कहा यह इस बात की ईमानदार स्वीकृति थी कि पिता के गंभीर बीमार होने पर बहन ने ही उनकी देखभाल की थी। अधिकांश परिवारों की तरह हमारे परिवार में भी दो तरह […]
एन. रघुरामन का कॉलम: टीनएजर्स क्या देख रहे हैं, उससे ज्यादा जरूरी ये जानें कि वे क्या लिख रहे हैं!
फोन स्क्रीन की हल्की रोशनी में उन्होंने टाइप किया, ‘मैं भी जीने से तंग आ गया हूं। क्या तुम मुझे अपने साथ ले जाओगे, मुझे डर लग रहा है।’ वह एक ही सेकंड पहले आए मैसेज का रिप्लाई दे रहे थे, जिसमें लिखा था कि ‘मैं पहले जा रहा हूं।’ अपने साथ ले जाने की […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों कुछ युवा बहुत जल्दी कामकाज को अलविदा कह रहे हैं
‘अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना, मेरे जिक्र का जुबां पे स्वाद रखना, दिल के संदूकों में मेरे अच्छे काम रखना, चिट्ठी तारों में भी मेरा तू सलाम रखना…।’ यह महज 38 वर्षीय गायक अरिजीत सिंह का गाना नहीं है, बल्कि कार्यस्थलों पर युवाओं की जीवनशैली भी बन रहा है। अरिजीत ने पार्श्वगायन से […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों कुछ युवा बहुत जल्दी कामकाज को अलविदा कह रहे हैं
‘अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना, मेरे जिक्र का जुबां पे स्वाद रखना, दिल के संदूकों में मेरे अच्छे काम रखना, चिट्ठी तारों में भी मेरा तू सलाम रखना…।’ यह महज 38 वर्षीय गायक अरिजीत सिंह का गाना नहीं है, बल्कि कार्यस्थलों पर युवाओं की जीवनशैली भी बन रहा है। अरिजीत ने पार्श्वगायन से […]
एन. रघुरामन का कॉलम: इस गणतंत्र दिवस सफाई की सामूहिक जिम्मेदारी उठाने का संकल्प करें
Hindi News Opinion N Raghuraman Column This Republic Day, Let Us Resolve To Take Collective Responsibility For Cleanliness. 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु जब आप किसी पर्यटक के रूप में वहां जाते हैं तो आपको लोकल फूड चखने को कहा जाता है। जाहिर है आप उसे पसंद भी करेंगे। लेकिन डिश […]
एन. रघुरामन का कॉलम: आप रिटायरमेंट का लुत्फ उठाना तो नहीं भूल रहे हैं?
मैं एक ऐसे शख्स को जानता था, जिन्होंने अपनी सर्विस के दौरान राजसी जीवन जिया। अपनी तीन बेटियों की शादी करवाई और उन्हें अच्छी तरह से बसाया। कुछ ही सालों में उनकी बेटियां उनसे भी ज्यादा धनवान हो गईं। 27 साल पहले रिटायर होने के बाद वे बेहद संयमी खर्च करने लगे। जो हर साल […]
एन. रघुरामन का कॉलम: सफल होने के लिए लीडर, पैरेंट्स और शिक्षक- सभी एक टेलर से भी सीखें!
Hindi News Opinion N Raghuraman Column Leaders, Parents, And Teachers All Learn From A Tailor To Succeed! 3 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु वसंत पंचमी के दिन- जब मैं अपने टेलर के पास जाने ही वाला था- मेरी पत्नी नाराज हो गईं। वे बोलीं, मुझे समझ नहीं आता तुम एक ही शर्ट […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ऐसा पछतावा ना हो कि ‘एक बार पूछ लेता तो अच्छा होता’
कैंसर पीड़ित एक युवक ने घर और अस्पताल में कई महीने गुजारने के बाद एक दिन बाहर निकलने का फैसला किया। वह एक म्यूजिक स्टोर पर सीडी खरीदने रुका और वहां मौजूद सेल्स गर्ल उसे अच्छी लग गई। जैसे ही वह अंदर गया, उसे पहली ही नजर में प्यार हो गया। वह काउंटर तक गया […]
एन. रघुरामन का कॉलम: डायबिटीज और ऑटिज्म वाले खिलौने भी बिजनेस खड़ा कर सकते हैं
Hindi News Opinion Raghuraman Column: Diabetes & Autism Toys Create Business Opportunities 26 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु वो दिन याद करें, जब बच्चे रसोई के सामान से खेलते थे, क्योंकि गिलास, प्लेट और चूल्हे जैसी छोटी एक्सेसरीज उन्हें असल जिंदगी की ऐसी परिस्थितियों से परिचित कराती थीं- जिनका सामना उन्हें जीवन […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘5:2 डाइट’ जादू की छड़ी है, जो आपका दिन लंबा बनाएगी
दिन के कितने घंटों को प्रोडक्टिव बनाया जा सकता है? सवाल को बचकाना मान कर और यह कहते हुए खारिज मत करिए कि ‘कोई चाहे तो पूरे 24 घंटों को भी प्रोडक्टिव बना सकता है।’ यह जवाब 1995 तक सही था। 2026 में सही जवाब है- करीब 20 घंटे 45 मिनट। सोच रहे कि कैसे? […]


























