एन. रघुरामन का कॉलम:  आपका रोज का भोजन ही लंबे और सेहतमंद जीवन का आधार है
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: आपका रोज का भोजन ही लंबे और सेहतमंद जीवन का आधार है

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman Column: Your Daily Food Is The Basis For A Long & Healthy Life

7 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

इन दिनों जब मैं अपने एक बीमार परिजन की देखभाल में ज्यादातर समय अस्पताल में बिता रहा हूं तो मैंने वहां दो तरह के लोग देखे। एक, जो खराब सेहत के कारण बिस्तर पर हैं। दूसरे, वो जो सफेद कोट पहने अस्पताल के गलियारों में चलते हुए चर्चा कर रहे हैं कि कैसे स्वस्थ जीवन जिएं और उम्र लंबी रखें। वे कभी नहीं कहते कि क्या नहीं खाना चाहिए। सिवाय तब के, जब किसी के शरीर में पोटेशियम जैसे मिनरल्स की अत्यधिक मात्रा हो जाए और उसे केला न खाने को कहा जाए- क्योंकि केले में पोटेशियम बहुत अधिक होता है।

किसी स्वस्थ हो रहे मरीज के पास बैठकर बातचीत करते हुए मुझे कई तथ्यों की खोज करने का काफी समय मिला। मुझे पता चला कि धरती पौधों और उनकी उपज से हमें 88 ट्रेसेबल और 118 नॉन-ट्रेसेबल खनिज देती है। भारतीय आबादी पर जंक फूड का असर जब ‘अर्बन लग्जरी’ से आगे बढ़कर एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा बन रहा है तो मुझे एहसास हुआ कि हम सभी को यह समझने की महती आवश्यकता है कि भोजन को महज लंबे जीवन ही नहीं, बल्कि सेहतमंद जीवन का औजार कैसे बनाया जाए। बेरीज, अखरोट, पत्तेदार सब्जियां और मसाले ऐसे ही कुछ खाद्य हैं, जो ‘पॉलीफेनोल्स’ से भरपूर होते हैं।

यह एक प्लांट कंपाउंड है, जिसे कार्डियोवैस्कुलर, मेटाबोलिक ब्रेन और आंतों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। विज्ञान कहता है कि अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो यकीनन जीवन लंबा ही नहीं, सेहतमंद भी होगा।

तो आखिर पॉलीफेनोल्स हैं क्या? ये पौधों द्वारा उत्पादित कंपाउंड्स का विशाल और विविध समूह हैं। इन्हीं से उन पौधों की प्रजाति के रंग और स्वाद बनते हैं। पौधे इन्हें क्यों बनाते हैं? क्योंकि ये उन्हें पराबैंगनी किरणों और बीमारियों से बचाते हैं। ऐसे में जब हम इन्हें खाते हैं तो ये हमारी भी सुरक्षा करते हैं।

हालांकि 8 हजार प्रकार के ज्ञात पॉलीफेनोल्स हैं, लेकिन वे इन चार में से किसी एक वर्ग से संबंधित होते हैं। 1. फ्लेवोनॉइड्स, जो बेरीज, साइट्रस फलों, सेब, पत्तेदार सब्जियों, सोयाबीन, चाय और कोको में मिलते हैं। 2. फेनोलिक एसिड, जो कॉफी, बेरीज, साबुत अनाज, लाल प्याज, नट्स, जड़ी-बूटियों और मसालों में मिलते हैं। 3. स्टिलबीन्स, जो बेरीज, लाल अंगूर और मूंगफली में मिलते हैं। 4. लिग्नैन्स, जो फ्लैक्ससीड्स, तिल और साबुत अनाज में होते हैं।

पॉलीफेनोल्स सेहतमंद तरीके से उम्र बढ़ाने में कैसे सहयोगी हैं? ये शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट हैं और इनमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। ये रक्तवाहिकाओं का कार्य बेहतर बनाते हैं, खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं। ये प्रोबायोटिक हैं, जो आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया को पनपाते हैं।

माना जाता है कि ये इंसुलिन स्राव और मसल्स कोशिकाओं में ग्लूकोज का प्रवेश बेहतर करते हैं। ये न सिर्फ दिमाग में रक्त प्रवाह सुधारते हैं, बल्कि कुछ पॉलीफेनोल्स में तो ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार करने की क्षमता भी होती है- जो मस्तिष्क कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से बचाते हैं। शोध बताते हैं कि पॉलीफेनोल्स फैट ऑक्सीडेशन बढ़ाकर कुछ हद तक वजन नियंत्रण में भी मदद करते हैं।

यानी फैट को तोड़ सकते हैं। इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि पॉलीफेनोल्स से भरपूर भोजन, खासकर फ्लेवोनोइड्स, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से सुरक्षा देता है। हालांकि पॉलीफेनोल्स की कोई डेली डोज निर्धारित नहीं है, लेकिन अध्ययन बताते हैं कि रोज 500 से 1500 मिलीग्राम का इनटेक हमें क्रोनिक बीमारियों से बचा सकता है। जो लोग जानना चाहते हैं कि किस पौधे में कितने पॉलीफेनोल्स होते हैं, वे मुझे लिख सकते हैं, मैं जवाब दूंगा।

अब हमारे पूर्वजों की खाने की आदतों पर नजर डालिए। ऊपर बताई गई हर चीज किसी न किसी रूप में हमारे भोजन में रहती थी। अब फैसला आपको करना है कि आप हमारे बुजुर्गों की खानपान आदतों को अपनाना चाहते हैं या पश्चिमी फास्ट फूड को। चुनाव आपका है।

फंडा यह है कि जीने के लिए हमें भोजन चाहिए, तो फिर इसमें गलत क्या है कि हम अपने दैनिक भोजन को लंबी और स्वस्थ जिंदगी का औजार बनाने की कोशिश करें?

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *