हमें स्वीकारना होगा कि हमारे लोकतंत्र के केंद्र में एक विरोधाभास है। हम इसमें व्याप्त विसंगतियों का विरोध तो करते हैं, लेकिन शायद ही कभी पूछते हैं कि वे क्यों बनी रहती हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, परीक्षा में अनियमितताओं, महंगाई, आरक्षण, हिंसा और अन्याय जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर आंदोलन खड़े तो होते हैं, लेकिन […]
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पवन के. वर्मा का कॉलम: सूझबूझ इसी में कि हम पड़ोसियों के साझेदार बनें
Hindi News Opinion Pavan K. Varma’s Column: The Prudent Course Is To Become Partners With Our Neighbors 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक एक प्रमुख शक्ति के रूप में भारत का उदय स्थिर और सहयोगी पड़ोस की अपेक्षा करता है। कोई भी देश अपने आस-पड़ोस के स्ट्रैटेजिक परिवेश […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: दोष सिद्ध होने से पहले ही सजा देना कितना न्यायपूर्ण?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उमर खालिद को जमानत देने से अतीत में किए गए अपने ही इनकार पर प्रश्न उठाए हैं। उमर पांच वर्ष से अधिक समय से कारावास में हैं। यह संकेत देता है कि देश की सर्वोच्च अदालत स्वयं राज्यसत्ता और संवैधानिक-स्वतंत्रताओं के बीच उचित संतुलन खोजने का प्रयास कर रही […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: हमारे देश में ‘ग्रॉस डोमेस्टिक हैप्पीनेस’ भी कुछ कम नहीं
Hindi News Opinion Pavan K. Varma’s Column: In Our Country, ‘Gross Domestic Happiness’ Is No Less Significant 37 मिनट पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक भूटान- जहां मैंने राजदूत के रूप में सेवाएं दी हैं- को जीडीपी के बजाय ‘जीडीएच’ (ग्रॉस डोमेस्टिक हैप्पीनेस) शब्द रचने का श्रेय दिया जाता है। […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में भी कुछ क्षण पूरे राष्ट्र के लिए होते हैं
Hindi News Opinion Pavan K. Varma’s Column: Even In A Competitive Democracy, There Are Moments That Belong To The Entire Nation 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ दिया था। उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि वे सरकार […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: हमारे नेता आज भी अटल जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशती-वर्ष पर आयोजित समारोहों का सिलसिला गत दिसम्बर तक चलता रहा था। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री विजय गोयल ने वाजपेयी पर एक चित्रात्मक-जीवनी प्रकाशित करवाई है, जो उनके जीवन की समृद्ध-झांकी पेश करती है। लेकिन जब तक हम उनकी विरासत के कुछ अहम सबकों को फिर से नहीं […]









