राजदीप सरदेसाई का कॉलम:  अब हमारे नेताओं को ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर नहीं सताता?
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राजदीप सरदेसाई का कॉलम: अब हमारे नेताओं को ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर नहीं सताता?

वैसी छवियां एक जमाने में राजनेताओं के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती थीं। दिल्ली में तृणमूल के सांसदों के पाला बदलने की तैयारी के दौरान उन्हें वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ पूरी तरह से कम्फर्टेबल देखा गया। गोपनीयता बनाए रखने की कोशिश तक नहीं की गई। महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी विधायक चार्टर्ड विमानों […]

शेखर गुप्ता का कॉलम:  क्या राजनीति में सिद्धांत मायने रखते हैं?
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शेखर गुप्ता का कॉलम: क्या राजनीति में सिद्धांत मायने रखते हैं?

सामूहिक दलबदल के इस मौसम में कई सवाल उभरते हैं : पार्टियां टूटती क्यों हैं? नेता दल क्यों बदलते हैं? क्या विचारधारा, सिद्धांत या वफादारी की कोई अहमियत है? इनके साथ एक और सवाल उभरता है : कुछ दल क्यों टूट जाते हैं, मगर कुछ क्यों नहीं टूटते? पहले यह देखें कि भारी ‘आवाजाही’ के […]

पवन के. वर्मा का कॉलम:  हमारे नेता आज भी अटल जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं
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पवन के. वर्मा का कॉलम: हमारे नेता आज भी अटल जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशती-वर्ष पर आयोजित समारोहों का सिलसिला गत दिसम्बर तक चलता रहा था। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री विजय गोयल ने वाजपेयी पर एक चित्रात्मक-जीवनी प्रकाशित करवाई है, जो उनके जीवन की समृद्ध-झांकी पेश करती है। लेकिन जब तक हम उनकी विरासत के कुछ अहम सबकों को फिर से नहीं […]