इलाहाबाद हाईकोर्ट में कोडीन कफ सिरप मामले से जुड़ी 74 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही एकल पीठ के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने खुद को इससे अलग कर लिया है। सुनवाई के दाैरान उन्होंने बेहद कड़ी टिप्पणी की है। कहा कि लंबित मामले को प्रभावित करने या न्यायाधीश तक पहुंच बनाने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है।
उन्होंने इसे न्यायालय के इतिहास का काला दिन करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सभी मामलों को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेजने का आदेश दिया। यह आदेश उन्होंने भोला प्रसाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दाैरान दिया है।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि न्याय व्यवस्था की पूरी नींव इस विश्वास पर टिकी है कि न्याय निष्पक्ष, निर्भीक और किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त होकर दिया जाता है। यदि कोई पक्षकार या उससे जुड़ा व्यक्ति न्यायाधीश तक पहुंचने या निजी तौर पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास करता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और कानून के शासन पर सीधा प्रहार है।
अदालत ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी। आदेश पारित किया जाना था। इसी दौरान संबंधित पक्षों की ओर से पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंचने के प्रयास किए गए। ऐसे आचरण को नजरअंदाज किया गया तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा। यह संदेश जाएगा कि न्यायिक आदेशों को प्रभावित किया जा सकता है।








