21 घंटे पहले
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एपल आज एनुअल इवेंट में अपने पहले फोल्डेबल फोन के साथ आईफोन 18 सीरीज के प्रीमियम मॉडल 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स लॉन्च करने जा रही है।
हर बार की तरह इस बार भी नए आईफोन पहले से ज्यादा एडवांस प्रोसेसर के साथ आएंगे, लेकिन इस बार कैमरे की बात ज्यादा की जा रही है।
क्योंकि, आईफोन में पहली बार DSLR कैमरे में इस्तेमाल की जाने वाली वैरिएबल अपर्चर तकनीक देखने को मिलेगी।
आईफोन कैमरा क्वालिटी के लिए दुनियाभर में पॉपुलर हैं। एक ओर जहां एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में ज्यादा मेगापिक्सल वाले कैमरे देने पर फोकस रहता है।
वहीं, आईफोन कम मेगापिक्सल वाले कैमरे होने के बावजूद 200 मेगापिक्सल कैमरे वाले स्मार्टफोन्स से बेहतर फोटो आती हैं। इसी वजह से कंटेंट क्रिएटर्स भी इसे पसंद करते हैं।
ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि आखिर आईफोन के कैमरों में ऐसा क्या है जो कम मेगापिक्सल के बाद भी बेहतर फोटो और वीडियो शूट करता है?

इसे समझने के लिए सबसे पहले कैमरे की बेसिक जानकारी…
सभी स्मार्टफोन कैमरे तीन बेसिक पार्ट्स से बने होते हैं। पहला लेंस, जो लाइट को कैमरे के अंदर भेजता है। दूसरा सेंसर, जो लाइट के फोकस से आने वाले छोटे-छोटे टूकड़ों (फोटोन) को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलता है और तीसरा वह सॉफ्टवेयर है, जो उन इलेक्ट्रिक सिग्नल्स को फोटो में बदलता है।
स्मार्टफोन कैमरे के 3 सबसे जरूरी पार्ट्स
सभी स्मार्टफोन कैमरे तीन बेसिक पार्ट्स से बने होते हैं…
लेंस: यह बाहर की रोशनी को समेटकर सीधे सेंसर तक पहुंचाता है। लेंस जितना बेहतर होगा, फोटो उतनी साफ आएगी।
शटर और अपर्चर: अपर्चर तय करता है कि कितनी रोशनी अंदर जाएगी और शटर यह तय करता है कि रोशनी कितनी देर तक अंदर रहेगी।

अपर्चर से यह तय होता है कि कितनी लाइट सेंसर तक पहुंचेगी। f/1.4 में सबसे ज्यादा लाइट और f/16 में सबसे कम लाइट सेंसर तक पहुंचती है।
सेंसर और सॉफ्टवेयर: सेंसर रोशनी को डिजिटल सिग्नल (पिक्सल्स) में बदलता है। इसके बाद फोन का सॉफ्टवेयर इन सिग्नल्स को जोड़कर आपकी फाइनल फोटो तैयार करता है। बड़ा सेंसर बेहतर फोटो देता है।
इमेज प्रोसेसर (ISP) और सॉफ्टवेयर: सेंसर से मिले डेटा के रंग, ब्राइटनेस और शार्पनेस को ठीक करके फाइनल फोटो तैयार करता है। आईफोन का सॉफ्टवेयर यहीं बाजी मार लेता है।
ऑटोफोकस व स्टेबलाइजेशन (OIS): ऑटोफोकस सब्जेक्ट पर तुरंत फोकस सेट करता है और OIS हाथ हिलने पर भी फोटो-वीडियो को धुंधला होने से बचाता है।

ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन कैमरे की हलचल को कम करने के लिए लेंस या सेंसर को इस तरह शिफ्ट करता रहता है।
यानी सिर्फ मेगापिक्सल बड़ा होने से फोटो अच्छी नहीं आती, बल्कि बेहतरीन लेंस, बड़ा सेंसर और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर मिलकर ही शानदार फोटो बनाते हैं।
बड़ा सेंसर कम रोशनी में भी बेहतरीन फोटो देता है
फोटो कैसी आएगी, यह काफी हद तक सेंसर के साइज और क्वालिटी पर निर्भर करता है। सेंसर जितना बड़ा होगा (जैसे 1-इंच सेंसर), वह उतनी ही ज्यादा रोशनी समेट सकेगा। इससे रात या अंधेरे में भी आपकी फोटो धुंधली नहीं होगी, बल्कि बिल्कुल साफ, शार्प और पूरी डिटेल्स के साथ आएगी।

ज्यादा मेगापिक्सल्स बेहतर इमेज क्वालिटी की गारंटी नहीं
ज्यादा मेगापिक्सल्स का मतलब अधिक डीटेल्स, लेकिन यह सब क्वालिटी और साइज के साथ भी जुड़ा होता है। ज्यादा मेगापिक्सल्स वाले कैमरे तस्वीरों में ज्यादा डिटेल्स कैप्चर कर सकते हैं, लेकिन हमेशा बेहतर इमेज क्वालिटी की गारंटी नहीं होती है।
आईफोन का कैमरा एंड्रायड फोन से कैसे अलग होता है?
आईफोन का कैमरा हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और वीडियो तकनीक के मामले में एंड्रॉयड से काफी अलग होता है:
सेंसर टेक्नोलॉजी: एपल आमतौर पर हाई क्वालिटी वाले कस्टम एन्हांस सेंसर का इस्तेमाल करता है, जो सही रंग और साफ डिटेल्स देते हैं। इसके उलट, ज्यादातर बजट एंड्रॉयड फोन्स में कंपनियां खर्च बचाने के लिए सस्ते सेंसर लगाती हैं, जिससे मेगापिक्सल ज्यादा होने पर भी फोटो अच्छी नहीं आती।
लेंस और अपर्चर: आईफोन के लेंस और अपर्चर खास तौर पर रात में अच्छी फोटो खींचने और फोटो को धुंधला होने से बचाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
सॉफ्टवेयर और इमेज प्रोसेसिंग: आईफोन में ‘स्मार्ट HDR’ और ‘डीप फ्यूजन’ जैसे एडवांस्ड फीचर्स होते हैं, जो फोटो खींचते ही उसके रंगों और रोशनी को खुद-ब-खुद परफेक्ट बना देते हैं। आजकल प्रीमियम एंड्रॉयड फोन में पावरफुल प्रोसेसिंग फीचर मिलने लगे हैं।
वीडियो कैपेबिलिटी: आईफोन में मिलने वाला 4K वीडियो, डॉल्बी विजन और स्टेबलाइजेशन इसे वीडियो शूटिंग के लिए बेस्ट बनाता है- जो कि फ्लैगशिप मॉडल्स को छोड़कर ज्यादातर एंड्रॉयड फोन्स में नहीं मिल पाता।
अच्छा कैमरा फोन खरीदने से पहले ध्यान रखें ये 5 बातें
कैमरा सेंसर की क्वालिटी: अच्छा कैमरा वाला फोन खरीदने के लिए बड़ा सेंसर और ज्यादा अपर्चर वाला कैमरा चुनें, ताकि रात या कम रोशनी में भी साफ फोटो आ सके। साथ ही, हैंड-शेक से बचाने के लिए इमेज स्टेबिलाइजेशन जरूर हो। इसके अलावा उसमें ऑटोफोकस, पोर्ट्रेट, नाइट, HDR, पैनोरमा जैसे अन्य मोड्स भी होना चाहिए।
वीडियो और रिजॉल्यूशन: अगर वीडियो बनाना पसंद है, तो फोन में कम से कम 4K रिकॉर्डिंग, स्लो-मोशन और टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स होने चाहिए।
बैटरी और फास्ट चार्जिंग: फोटो और वीडियो शूट करने से बैटरी तेजी से खत्म होती है। इसलिए कम से कम 5000mAh बैटरी और फास्ट चार्जिंग वाला फोन ही लें।
पावरफुल प्रोसेसर: फोन का प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर अच्छा होगा, तभी फोटो में कलर और ब्राइटनेस की प्रोसेसिंग सही होगी और कैमरा बिना अटके काम करेगा।
यूजर रिव्यू और प्रोफेशनल रिव्यूज: खरीदने से पहले टेक एक्सपर्ट्स के रिव्यू और यूजर्स द्वारा ली गई असली फोटोज जरूर देख लें, जिससे कैमरे की सही परफॉर्मेंस का पता चल सके।
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एपल का लॉन्चिंग इवेंट कल यानी बुधवार देर रात होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इसमें आईफोन 18 प्रो, प्रो मैक्स और अल्ट्रा लॉन्च कर सकती है। लेकिन नए आईफोन से पहले जानते हैं उस नाम और फोन की कहानी, जिसने करीब दो दशक में मोबाइल की दुनिया बदल दी।
आपको जानकर हैरानी होगी कि आईफोन नाम शुरू में एपल का था ही नहीं। अमेरिकी नेटवर्किंग कंपनी सिस्को के पास इस नाम का ट्रेडमार्क था। पूरी खबर पढ़े…








